भारत में लड़कियों की शादी (Girl Marriage Age) की उम्र 18 साल है, लेकिन पाकिस्तान (Pakistan) में सही मायने में उम्र से कोई लेना देना नहीं है। उम्र सिर्फ कागजों पर है और शादी की उम्र मर्जी से तय होती है। कहने को तो पाकिस्तान में लड़कियों की शादी (Girl Marriage in Pakistan) की उम्र 16 साल है, यानि कि भारत से दो साल कम। लेकिन हजारों ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां पाकिस्तानी लड़कियों की शादी 12 साल में, 14 साल, 15 साल में कर दी जाती है। लड़कियों की शादी आमतौर पर जिन लड़कों से होती है वो उनसे उम्र में काफी बड़े होते हैं। कई की तो पहली बीवी मर चुकी होती है या तलाक हो चुका होता है।
पाकिस्तान में लड़कियों की कम उम्र में हो जाती है शादी
हाल ये है कि पाकिस्तान में 1 करोड़ 90 लाख लड़कियों की शादी 16 साल से कम में हुई है। पाकिस्तान में बाल विवाह आम है। खासकर ग्रामीण इलाकों में, जहां गरीबी और कट्टरता ज्यादा है। कम शिक्षा ने धार्मिक बंधनों ने पाकिस्तान में लड़कियों की हालत दयनीय कर रखी है। इतना ही नहीं अल्पसंख्य समुदाय, जिसमें हिंदू, सिख, ईसाई शामिल हैं, उनकी लड़की से जबरदस्ती कम उम्र में मुस्लिम समुदाय के लड़के शादी कर लेते हैं। ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं। कई में तो कोर्ट के बाद लड़की वापस घर पहुंची है।
UN कर रहा लड़कियों की मदद
UN पाकिस्तान में ऐसे लड़कियों की मदद कर रहा है, जिनकी जिंदगी कम उम्र में शादी करने से बर्बाद हो गई है। सिंध प्रातं की रहने वाली शमा इशाक कहती हैं, “जब मैं 12 साल की थी, तो मेरी माँ ने मेरी सगाई करवा दी और शादी कर दी। मैं पढ़ना चाहती थी, लेकिन मेरी मां ने मुझे इसकी इजाजत नहीं दी। मेरे पिता की पहले ही मौत हो चुकी थी, इसलिए उन्होंने मुझे मेरे पति को सौंप दिया। जब मेरा पहला बच्चा हुआ, तब मैं बहुत छोटी थी। मेरे बच्चे हमेशा बीमार रहते हैं। मेरा एक बेटा और दो बेटियां हैं। मैं कमजोर और बेबस हूं। मेरी एक बेटी की मौत हो गई, और जब से मेरी आखिरी बेटी पैदा हुई है, तब से मैं बीमार हूं।”
कम उम्र में शादी से लड़कियों की जिंदगी दांव पर
United Nations Population Fund (UNFPA) के अनुसार बाल विवाह लड़कियों को जोखिम भरी प्रेग्नेंसी, फिस्टुला, यौन संचारित संक्रमण या यहां तक कि मौत के खतरे में भी डाल देता है। किशोर लड़कियों की, 20 साल की उम्र की महिलाओं की तुलना में, बच्चे के जन्म के दौरान होने वाली जटिलताओं से मरने की संभावना भी ज़्यादा होती है। कम उम्र में शादी करने से लड़की की अपनी आजादी भी कम हो जाती है। 15-19 साल की उम्र की हर दस में से एक लड़की ही अपनी स्वास्थ्य देखभाल, घर की बड़ी खरीदारी करने और अपने परिवार या रिश्तेदारों से मिलने के मामलों में अपनी राय दे पाती है।
