ईरान ने अब संयुक्त अरब अमीरात (UAE) को जो सीधी धमकी दी है, उससे साफ है कि इस देश में अब IRGC के निशाने पर सिर्फ अमेरिकी ठिकाने नहीं होंगे। ईरान ने साफ कहा है कि UAE ने खुद को ईरान का दुश्मन बना लिया है। जिसकी कीमत उसे चुकानी पड़ेगी। ईरान का मानना है कि हाल ही में अमेरिका ने जो ईरान पर हमले किए हैं, उसमें UAE का हाथ है।
ईरान की धमकी
ईरान के बुशहर परमाणु संयंत्र और अन्य बुनियादी ढांचों पर अमेरिकी हमलों के बाद, ईरान ने अब संयुक्त अरब अमीरात (UAE) को सीधे तौर पर लपेटे में लिया है। ईरान की संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के सदस्य इस्माइल कौसारी (Ismail Kowsari) ने यूएई को चेतावनी देते हुए कहा है कि वाशिंगटन का सहयोग करने के लिए उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। ईरानी बुनियादी ढांचे पर हाल ही में हुए अमेरिकी हवाई हमलों में संयुक्त अरब अमीरात की पर्दे के पीछे की भूमिका का जिक्र करते हुए, कौसारी ने साफ किया कि इस तरह के कदमों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
'दुश्मनों के पाले में खड़ा हुआ यूएई'
ईरानी सांसद इस्माइल कौसारी ने अपने कड़े बयान में यूएई की नीतियों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने जोर देकर कहा कि इन हालिया हरकतों और सैन्य सहयोग के जरिए संयुक्त अरब अमीरात ने खुद को सीधे तौर पर ईरान के दुश्मनों की कतार में खड़ा कर लिया है। कौसारी ने चेतावनी भरे लहजे में कहा, "यूएई को यह अच्छी तरह समझ लेना चाहिए कि अमेरिका को इस तरह का समर्थन देने और ईरान के खिलाफ उसकी साजिशों का हिस्सा बनने की जो कीमत होगी, वह बहुत भारी और दर्दनाक होगी।"
क्षेत्रीय सुरक्षा पर गहराया खतरा
ईरान की ओर से यूएई को मिली यह खुली धमकी खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा और स्थिरता के लिए एक बड़ा खतरा बन सकती है। पहले से ही होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में व्यावसायिक जहाजों पर हमलों के कारण स्थिति तनावपूर्ण है, और अब यूएई को निशाना बनाए जाने की बात से व्यापारिक मार्ग पूरी तरह असुरक्षित हो सकते हैं। यदि ईरान और अमेरिका की यह जंग खाड़ी के अन्य देशों जैसे यूएई, कुवैत या बहरीन को अपनी चपेट में लेती है, तो इसका सीधा असर वैश्विक तेल आपूर्ति और सप्लाई चेन पर पड़ेगा। ईरान की इस आक्रामक बयानबाजी के बाद फिलहाल संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन इस बयान ने खाड़ी के देशों में चिंता की लकीरें जरूर खींच दी हैं।
