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CENTCOM: न तो कोई जहाज ईरानी बंदरगाह से निकलेगा, न जाएगा- नाकेबंदी के लिए निकल गई अमेरिकी नेवी

अमेरिका (US) ने ईरानी बंदरगाहों की घेराबंदी करने का ऐलान किया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने कहा है कि नेवी ईरानी में जाने वाले और ईरान से निकलने वाले जहाजों की घेराबंदी करने जा रही है।

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ईरानी बंदरगाहों की घेराबंदी करेगी अमेरिकी नेवी (फोटो-@CENTCOM)

US Action Against Iran: पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बड़ा कदम उठाते हुए घोषणा की है कि वह सोमवार सुबह 10 बजे (ईस्टर्न टाइम) से ईरान के सभी बंदरगाहों की नाकेबंदी शुरू करेगा। यह निर्णय क्षेत्र में बढ़ते सैन्य और कूटनीतिक टकराव के बीच लिया गया है, जिसे विशेषज्ञ एक गंभीर रणनीतिक कदम मान रहे हैं। CENTCOM ने अपने बयान में यह भी कहा है कि नाकेबंदी शुरू होने से पहले वाणिज्यिक जहाजों और शिपिंग कंपनियों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे, ताकि समुद्री यातायात में किसी प्रकार की अनिश्चितता या दुर्घटना से बचा जा सके।

किन-किन बंदरगाहों की घेराबंदी करेगी अमेरिकी नौसेना

CENTCOM के बयान के अनुसार, यह नाकेबंदी ईरान के सभी समुद्री बंदरगाहों और तटीय क्षेत्रों पर लागू होगी। अमेरिकी सेना ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई “सभी देशों के जहाजों के खिलाफ निष्पक्ष रूप से” लागू की जाएगी, यानी किसी विशेष देश को निशाना नहीं बनाया जाएगा। इसका मतलब यह है कि जो भी जहाज ईरानी बंदरगाहों में प्रवेश करेगा या वहां से बाहर निकलेगा, उसे इस नाकेबंदी का सामना करना पड़ेगा।

होर्मुज पर नहीं पड़ेगा कोई असर

हालांकि, अमेरिकी कमांड ने यह भी कहा है कि गैर-ईरानी बंदरगाहों के बीच यात्रा करने वाले जहाजों को होरमुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति दी जाएगी। यह फैसला वैश्विक व्यापार और तेल आपूर्ति को पूरी तरह बाधित होने से बचाने के उद्देश्य से लिया गया माना जा रहा है, क्योंकि होरमुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और गैस का परिवहन होता है।

ईरान को क्या होगा नुकसान?

विशेषज्ञों का मानना है कि ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी किसी भी देश के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के समान गंभीर कदम होता है। इससे न केवल ईरान की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ेगा, बल्कि पूरे पश्चिम एशिया में सुरक्षा और व्यापार की स्थिति भी प्रभावित हो सकती है। ईरान पहले ही इस तरह के कदमों को “आर्थिक युद्ध” करार देता रहा है और उसने जवाबी कार्रवाई की चेतावनी भी दी है।

पश्चिम एशिया में तनाव का नया असर

कुल मिलाकर, ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी का यह फैसला पश्चिम एशिया में तनाव को एक नए स्तर पर ले जा सकता है। यदि इस कदम के जवाब में ईरान कोई कठोर प्रतिक्रिया देता है, तो क्षेत्र में सैन्य टकराव की आशंका और बढ़ सकती है, जिसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर भी साफ दिखाई देगा।

Shishupal Kumar
शिशुपाल कुमारauthor

शिशुपाल कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क में कार्यरत एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें 13 वर्षों का अनुभव हासिल है। राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय और क्राइम रिपोर्टिंग में गहरी रुचि और मजबूत पकड़ के साथ वे समाचारों की बारीकियों को समझने और उन्हें प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते हैं। शिशुपाल ने अपने करियर की शुरुआत एक इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट के रूप में की, जहां उन्होंने प्रोडक्शन से लेकर ग्राउंड रिपोर्टिंग तक पत्रकारिता के कई महत्वपूर्ण पहलुओं में काम किया। फील्ड रिपोर्टिंग और डेस्क दोनों स्तरों पर उनकी दक्षता है। अब तक शिशुपाल कुमार 15,000 से अधिक खबरें प्रकाशित कर चुके हैं। वह ब्रेकिंग न्यूज, रियल-टाइम कवरेज, डेटा-आधारित विश्लेषण और एक्सप्लेनर लिखने में खास महारत रखते हैं। उनकी स्टोरीज तथ्यों की सटीकता और सहज भाषा की वजह से पाठकों पर मजबूत प्रभाव छोड़ती हैं।

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