पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में तब नई हिंसा हुई जब पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने रावलकोट में नागरिकों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की, जिससे शहर के नए बस टर्मिनल के पास झड़पें हुईं। मंगलवार को टकराव के दौरान सुरक्षा कर्मियों द्वारा कथित तौर पर गोलीबारी करने से कम से कम छह नागरिकों की मौत हो गई, जिससे इलाके में तनाव और बढ़ गया।
मारे गए लोगों में जाहिद मुगल, जफर मुगल, अर्सलान अकबर और वाजिद हयात शामिल थे, जिनकी मौत रावलकोट में मटियाल मीरा बस टर्मिनल के पास हुई। स्थानीय खबरों के अनुसार, ये मौतें बलूच सधुनाती जिले में हुई झड़पों के दौरान हुईं। हाल के महीनों में विरोध-प्रदर्शनों के तेज होने के साथ, इस ताजा अशांति ने इस्लामाबाद के खिलाफ बढ़ते असंतोष को और बढ़ा दिया है।
विरोध-प्रदर्शन गंभीर आर्थिक और राजनीतिक संकट की वजह से
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में विरोध-प्रदर्शन गंभीर आर्थिक और राजनीतिक संकट की वजह से हो रहे हैं। 'जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी' (JAAC) की अगुवाई में लोग बहुत ज़्यादा महंगाई, बिजली की ऊंची दरों और सब्सिडी वाले गेहूं के आटे की कमी के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं।PoK में सुरक्षा हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं, क्योंकि जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी के 15 जुलाई के विरोध मार्च से पहले कई जिलों में आठ बड़े विरोध-प्रदर्शन हुए। सुधनोती और मथियाल मेरा में हुई ताज़ा झड़पों में नौ लोगों की मौत की खबर है इसके साथ ही 5 जून से अब तक मरने वालों की कुल संख्या 28 हो गई है ।
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अशांति के कारण आम जनजीवन प्रभावित
इस अशांति के कारण आम जनजीवन प्रभावित हुआ; लगातार धरने-प्रदर्शन, बाजार और संस्थान बंद, सड़कें जाम और जरूरी सामान की कमी की खबरें सामने आईं।
PoK विरोध प्रदर्शन व्हाइट हाउस तक पहुंचा
हिंसा से एक दिन पहले, अमेरिका में रह रहे पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) के लोगों ने वाशिंगटन में व्हाइट हाउस के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने इस क्षेत्र में बिगड़ते मानवीय संकट की ओर अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान आकर्षित करने की मांग की। इस विरोध प्रदर्शन में महिलाओं, बच्चों और समुदाय के नेताओं समेत करीब 100 लोगों ने हिस्सा लिया। उन्होंने पाकिस्तानी सेना से PoK के रिहायशी इलाकों से हटने की मांग की और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि वे निहत्थे नागरिकों के खिलाफ कथित तौर पर अत्यधिक बल प्रयोग के मामले में दखल दें। प्रदर्शनकारियों ने लंबे समय से बंद इंटरनेट सेवाओं पर भी चिंता जताई।
भारत ने पाकिस्तान को ठहराया जिम्मेदार
वहीं, पीओके की स्थिति पर भारत सरकार ने पाकिस्तान की कड़ी आलोचना की है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि पीओके में चल रहे विरोध प्रदर्शन पाकिस्तान के दशकों पुराने 'व्यवस्थित शोषण, मौलिक अधिकारों से वंचित करने और प्रशासनिक दमन' का परिणाम हैं।उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों की शिकायतों का समाधान करने के बजाय पाकिस्तान सरकार ने बल प्रयोग का रास्ता अपनाया है।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, पाकिस्तानी प्रशासन महिलाओं और बच्चों के खिलाफ भी कठोर कार्रवाई कर रहा है, खाद्य सामग्री और दवाओं जैसी आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बाधित की जा रही है तथा इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई हैं।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय से कार्रवाई की मांग
भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में नागरिकों के खिलाफ हो रही कार्रवाई पर पाकिस्तान को जवाबदेह ठहराने की अपील की है। नई दिल्ली का कहना है कि पीओके में हालात केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं, बल्कि मानवाधिकारों और नागरिक अधिकारों से जुड़ा गंभीर विषय बन चुके हैं।
