H-1B और H-4 वीजा आवेदकों पर ट्रंप की सख्ती; सार्वजनिक करना ही होगा सोशल मीडिया अकाउंट, इस तारीख से होगी जांच
- Edited by: शिव शुक्ला
- Updated Dec 15, 2025, 12:09 AM IST
अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा है कि H-1B और H-4 वीजा आवेदकों, छात्र वीजा और एक्सचेंज विजिटर वीजा वाले सभी आवेदकों को अपनी सोशल मीडिया प्रोफाइल की प्राइवेसी सेटिंग 'पब्लिक' करनी होगी, ताकि अधिकारी उनकी जांच कर सकें।
सांकेतिक तस्वीर।
ट्रंप की सख्ती H-1B और H-4 वीजा आवेदकों को लेकर नियमों में राष्ट्रपति ट्रंप ने सख्ती बरतने के आदेश दिए हैं। उनकी तरफ से पहले ही साफ किया जा चुका है कि वीजा आवेदन करने वालों को अपने सोशल मीडिया अकाउंट को सार्वजनिक करना ही होगा। वहीं, अब इसकी तारीख भी सामने आ गई है। ट्रंप प्रशासन 15 दिसंबर से H-1B वीजा और उससे जुड़े H-4 वीजा आवेदकों की सोशल मीडिया प्रोफाइल की जांच शुरू करेगा।
अमेरिकी विदेश विभाग ने इस बाबत आदेश भी जारी कर दिया है। इसमें कहा गया है कि अब H-1B वीजा के लिए आवेदन करने वाले लोगों और उनके परिवार के सदस्यों (H-4 वीजा) आवेदकों की ऑनलाइन गतिविधियों और सोशल मीडिया अकाउंट्स की समीक्षा की जाएगी।
सोशल मीडिया प्रोफाइल करनी होगी पब्लिक
अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा है कि H-1B और H-4 वीजा आवेदकों, छात्र वीजा और एक्सचेंज विजिटर वीजा वाले सभी आवेदकों को अपनी सोशल मीडिया प्रोफाइल की प्राइवेसी सेटिंग 'पब्लिक' करनी होगी, ताकि अधिकारी उनकी जांच कर सकें। पहले यह नियम सिर्फ छात्रों और एक्सचेंज विजिटर पर लागू था, लेकिन अब इसे H-1B और H-4 वीजा तक बढ़ा दिया गया है।
भारत में कई इंटरव्यू किए गए रीशेड्यूल
इस बीच सामने आया है कि नई गाइडलाइन के बाद भारत में कई H-1B वीजा आवेदकों के इंटरव्यू की तारीखें बदली गई हैं, क्योंकि अब सोशल मीडिया वेरिफिकेशन भी प्रक्रिया का हिस्सा बन गया है।
वीजा अधिकार नहीं, सुविधा है
अमेरिकी विदेश विभाग ने साफ कहा है कि अमेरिकी वीजा कोई अधिकार नहीं, बल्कि एक सुविधा (Privilege) है। वीजा जांच में सभी उपलब्ध जानकारियों का इस्तेमाल किया जाता है, इसमें सोशल मीडिया पर की जाने वाली एक्टिविटी भी शामिल हैं।
विभाग का कहना है कि हर वीजा आवेदन राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा फैसला होता है। यह सुनिश्चित किया जाता है कि कोई भी व्यक्ति अमेरिका या उसके नागरिकों को नुकसान पहुंचाने की मंशा न रखता हो।
भारतीय पेशेवर होंगे प्रभावित
इससे पहले सितंबर में ट्रंप ने "कुछ गैर-आप्रवासी श्रमिकों के प्रवेश पर प्रतिबंध" शीर्षक से एक घोषणा जारी की थी, जिसमें नए H-1B वीजा आवेदनों पर 100,000 अमेरिकी डॉलर का एकमुश्त शुल्क लगाया गया था, यह कदम अमेरिका में रोजगार चाहने वाले भारतीय पेशेवरों को प्रभावित कर सकता है।
एक अन्य घटनाक्रम में वाशिंगटन ने एक अफगान नागरिक से जुड़ी गोलीबारी की घटना के बाद 19 चिंताजनक देशों के नागरिकों के ग्रीन कार्ड, नागरिकता और अन्य आव्रजन आवेदनों की प्रक्रिया अस्थायी रूप से रोक दी है। मंगलवार को जारी अमेरिकी नागरिकता और आव्रजन सेवा (USCIS) के एक ज्ञापन में अधिकारियों को आगे की समीक्षा तक सभी शरण दावों पर रोक रखने का निर्देश दिया गया है।
यह कार्रवाई वाशिंगटन डीसी में हुई गोलीबारी के बाद की गई, जिसमें 20 वर्षीय अमेरिकी सेना विशेषज्ञ सारा बेकस्ट्रॉम की मौत हो गई और 24 वर्षीय अमेरिकी वायु सेना स्टाफ सार्जेंट एंड्रयू वोल्फ गंभीर रूप से घायल हो गए। 29 वर्षीय लकनवाल के रूप में पहचाने गए संदिग्ध, कथित तौर पर ऑपरेशन एलाइज वेलकम के माध्यम से संयुक्त राज्य अमेरिका पहुंचा था, जो 2021 में तालिबान के कब्जे के बाद अफगान नागरिकों के लिए स्थापित एक कार्यक्रम है।