अमेरिका का NDDA 2026: भारत के साथ रिश्ते और मजबूत, हिंद-प्रशांत में क्वाड की ताकत बढ़ेगी
- Edited by: शिशुपाल कुमार
- Updated Dec 19, 2025, 03:28 PM IST
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2026 के नेशनल डिफेंस ऑथोराइजेशन एक्ट पर हस्ताक्षर किए, जिसमें भारत के साथ रक्षा साझेदारी को और मजबूत करने पर जोर दिया गया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (फोटो- AP)
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वित्त वर्ष 2026 के लिए राष्ट्रीय रक्षा प्राधिकार अधिनियम (नेशनल डिफेंस ऑथोराइजेशन एक्ट- NDAA) पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। इस कानून ने न केवल अमेरिका की वैश्विक सुरक्षा रणनीति को नई दिशा दी है, बल्कि इसमें भारत के साथ रक्षा साझेदारी को मजबूत करने पर भी खास जोर दिया गया है। यह अधिनियम चीन की बढ़ती आक्रामकता और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बदलते शक्ति समीकरणों के बीच भारत-अमेरिका सहयोग को नई मजबूती देता है।
भारत-अमेरिका साझेदारी को मिलेगी नई गति
नए रक्षा अधिनियम में साफ उल्लेख है कि अमेरिका हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत सहित अपने साझेदार देशों के साथ रक्षा सहयोग बढ़ाएगा। इसमें रक्षा व्यापार, नौसैन्य सुरक्षा सहयोग, सैन्य अभ्यास, मानवीय सहायता और आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में समन्वय बढ़ाने की बात कही गई है। उद्देश्य स्पष्ट है— क्षेत्र में चीन के रणनीतिक दबदबे का संतुलन बनाना और मुक्त एवं खुले हिंद-प्रशांत की अवधारणा को मजबूत करना।
क्वाड पर विशेष जोर
इस अधिनियम में खास तौर पर ‘क्वाड’ यानी भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के सुरक्षा समूह की भूमिका को अहम बताया गया है। अमेरिका का मानना है कि क्वाड की सामूहिक ताकत हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने, सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने और चीन की विस्तारवादी नीतियों को संतुलित करने में निर्णायक साबित होगी।
अमेरिकी रणनीति: ताकत के साथ शांति का सूत्र
राष्ट्रपति ट्रंप ने अधिनियम पर हस्ताक्षर करते समय कहा कि यह कानून “ताकत के माध्यम से शांति” कायम करने के उनके एजेंडे को आगे बढ़ाएगा। उनके अनुसार, यह अधिनियम अमेरिका की मातृभूमि को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय खतरों से सुरक्षित रखने, रक्षा औद्योगिक ढांचे को मजबूत करने और बेकार योजनाओं पर होने वाले खर्च को नियंत्रित करने में मदद करेगा।
परमाणु सहयोग पर संयुक्त मूल्यांकन
अधिनियम में भारत और अमेरिका के बीच 2008 में हुए शांतिपूर्ण परमाणु सहयोग समझौते के क्रियान्वयन की नियमित समीक्षा के लिए संयुक्त परामर्श तंत्र स्थापित करने का प्रस्ताव भी शामिल है। इसके ज़रिए दोनों देश परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में तकनीकी और रणनीतिक सहयोग को और बेहतर दिशा दे सकेंगे।
हिंद-प्रशांत में सुरक्षा ढांचा मजबूत करने की तैयारी
अधिनियम के तहत अमेरिकी रक्षा मंत्री और विदेश मंत्री को मिलकर ऐसा सुरक्षा तंत्र बनाने का दायित्व सौंपा गया है, जो अमेरिका और उसके रणनीतिक साझेदार देशों-भारत, जापान, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण कोरिया, फिलीपींस और न्यूजीलैंड- के रक्षा औद्योगिक सहयोग को मजबूत करे।