Marco Rubio: ‘फॉक्स न्यूज’ को दिए गए साक्षात्कार में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने एक बार फिर भारत और पाकिस्तान के बीच हाल में हुए सैन्य संघर्ष का जिक्र किया, जिसके बारे में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बार-बार दावा किया है कि उन्होंने इसे रुकवाया। रूबियो ने कहा, मुझे लगता है कि हम बहुत भाग्यशाली हैं और हमें एक ऐसे राष्ट्रपति के लिए आभारी होना चाहिए, जिन्होंने शांति बहाली को अपने प्रशासन की प्राथमिकता बनाया है। हमने इसे कंबोडिया और थाईलैंड में देखा है। हमने इसे भारत-पाकिस्तान में देखा है। हमने इसे रवांडा और डीआरसी में देखा है। और हम दुनिया में शांति लाने के लिए हर संभव अवसर का लाभ उठाते रहेंगे।
यूक्रेन युद्ध का भी किया जिक्र
मार्को रुबियो ने कहा कि अमेरिका भारत और पाकिस्तान के साथ-साथ उन अन्य वैश्विक क्षेत्रों की स्थिति पर हर दिन नजर रखता है जहां तनाव बना हुआ है। रुबियो ने कहा, हम हर दिन पाकिस्तान और भारत के बीच, कंबोडिया और थाईलैंड के बीच क्या हो रहा है, इस पर नजर रखते हैं। रुबियो ने कहा कि अमेरिका मौजूदा संघर्षों में युद्धविराम की अपील करता रहा है, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि जब शत्रुता जारी रहती है, तो बातचीत करना मुश्किल होता है। यूक्रेन में युद्ध का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, युद्धविराम का एकमात्र तरीका यह है कि दोनों पक्ष एक-दूसरे पर गोलीबारी बंद करने पर सहमत हों। रूस इस पर सहमत नहीं हुआ है।
कहा-युद्धविराम बनाए रखना अक्सर चुनौतीपूर्ण
उन्होंने आगे कहा कि युद्धविराम बनाए रखना अक्सर चुनौतीपूर्ण होता है, खासकर लंबे संघर्षों के बाद। उन्होंने कहा, युद्धविराम बहुत जल्दी टूट सकता है, खासकर साढ़े तीन साल के युद्ध के बाद, जैसा कि हम अभी झेल रहे हैं। रुबियो ने यह भी कहा कि हमारा लक्ष्य एक ऐसा शांति समझौता होना चाहिए जो वर्तमान और भविष्य के संघर्षों को रोके, न कि सिर्फ लड़ाई को अस्थायी रूप से रोके।
अमेरिकी विदेश मंत्री की यह टिप्पणी ट्रंप द्वारा अलास्का में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात के बाद आई है, जहां उन्होंने कथित तौर पर कहा था कि वह और पुतिन इस बात पर सहमत हैं कि किसी भी शांति प्रक्रिया को बिना किसी पूर्व युद्धविराम की आवश्यकता के आगे बढ़ना चाहिए। यूक्रेन और उसके यूरोपीय सहयोगी इस रुख का लगातार समर्थन करते रहे हैं और अमेरिका ने भी पहले इसका समर्थन किया था। फरवरी 2022 में पूर्ण पैमाने पर आक्रमण शुरू होने के बाद अलास्का बैठक पहली अमेरिका-रूस शिखर बैठक थी और यह तीन घंटे तक चली।
भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष रुकवाने का श्रेय लेते रहे ट्रंप
गौरतलब है कि ट्रंप ने बार-बार भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव कम करने में मदद का श्रेय लिया है, खासकर ऑपरेशन सिंदूर और पहलगाम आतंकी हमले के बाद। उन्होंने कई मौकों पर कहा है कि उनके हस्तक्षेप से दोनों परमाणु संपन्न पड़ोसियों के बीच युद्धविराम हुआ। हालांकि भारत ने हर बार उनके बयान को खारिज किया है। नई दिल्ली का कहना है कि पाकिस्तान के साथ सभी मुद्दे द्विपक्षीय रूप से सुलझाए जाते हैं और इसमें किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता की कोई भूमिका नहीं है। भारत सरकार ने लगातार इस बात से इनकार किया है कि किसी विदेशी नेता ने उसके सैन्य निर्णयों या युद्धविराम की कार्रवाइयों को प्रभावित किया है।
ऑपरेशन सिंदूर पर संसद में एक विशेष चर्चा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि किसी भी विश्व नेता ने भारत से अपनी सैन्य प्रतिक्रिया रोकने के लिए नहीं कहा था। प्रधानमंत्री ने कहा था, हमने पहले दिन से ही कहा था कि हमारी कार्रवाई आक्रामक नहीं थी। दुनिया के किसी भी नेता ने हमें ऑपरेशन सिंदूर रोकने के लिए नहीं कहा था। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी बाहरी हस्तक्षेप के सुझावों को खारिज करते हुए कहा कि युद्धविराम विदेशी हस्तक्षेप का परिणाम नहीं था। उन्होंने आगे स्पष्ट किया कि सैन्य अभियानों को रोकने के फैसले का व्यापार वार्ता से कोई संबंध नहीं है, जो ट्रंप के दावों का खंडन करता है।
