UNSC Reform Process: संयुक्त राष्ट्र (UN) में भारत के स्थायी प्रतिनिधि ने सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधारों को लेकर चल रही बातचीत पर गहरा असंतोष व्यक्त किया है। भारत ने साफ कहा है कि इस सुधार प्रक्रिया को 17 दौर की बातचीत के बाद भी बिना किसी ठोस नतीजे के लटका कर रखा गया है, और इसे कुछ चुनिंदा देशों के संकीर्ण और विभाजनकारी हितों का बंधक बनने नहीं दिया जा सकता।
दरअसल, 193 सदस्यीय संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) ने मंगलवार को सुरक्षा परिषद के सुधारों पर अंतर-सरकारी वार्ता को अपने अगले सत्र के लिए टालने का निर्णय लिया। यह एक वार्षिक प्रक्रिया बन चुकी है, जिसके तहत यह मामला अब बिना किसी ठोस नतीजे या निश्चित समयसीमा के अपने 18वें साल में प्रवेश कर गया है। अब 15 देशों वाली शक्तिशाली सुरक्षा परिषद में सुधार के लिए बातचीत सितंबर से शुरू होने वाले महासभा के 81वें सत्र में जारी रहेगी।
कब तक इंतजार करेगी दुनिया?
भारत इस मसले को अगले सत्र में ले जाने (रोल-ओवर) के आम सहमति वाले मसौदे में शामिल तो हुआ, लेकिन ठोस परिणाम न मिलने और कुछ सदस्य देशों द्वारा इस प्रक्रिया को जानबूझकर बाधित करने के प्रयासों की कड़ी आलोचना की। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत पार्वथनेनी हरीश ने मंगलवार को बयान देते हुए भारतीय दर्शन का एक बेहद अनूठा उदाहरण दिया।
उन्होने कहा- "भारतीय दर्शन के अनुसार, आत्मा को मोक्ष (मुक्ति) पाने से पहले जन्म और मृत्यु के चक्रों से गुजरना पड़ता है, और वह हर बार थोड़ा-थोड़ा सुधार करती है। लेकिन यह IGN प्रक्रिया पहले ही 17 चक्रों (दौर) से गुजर चुकी है। दुख की बात यह है कि यहां दूर-दूर तक कोई मुक्ति (नतीजा) नजर नहीं आ रही है। आखिर दुनिया और कितना इंतजार करे?"
भारत के कड़े ऐतराज और मुख्य मांगें
राजदूत हरीश ने कहा कि सदस्य देश न्यूयॉर्क के अपने आरामदेह कमरों में बैठकर हर सत्र में सिर्फ अपने पुराने रुख को ही दोहराते रहते हैं, जिससे जमीनी हकीकत में एक प्रासंगिक और मजबूत संयुक्त राष्ट्र की उम्मीद कमजोर होती जा रही है। उन्होंने कहा कि दुनिया भर के नागरिकों और सदस्य देशों में इस बात को लेकर गहरी निराशा है कि सुरक्षा परिषद दुनिया भर में चल रहे संघर्षों और युद्धों को रोकने या उनमें सार्थक हस्तक्षेप करने में पूरी तरह असमर्थ रही है। इसलिए UNSC में व्यापक सुधारों की आवश्यकता अब और भी अधिक जरूरी और स्पष्ट हो गई है।
भारत ने जोर देकर कहा कि इस सुधार का रास्ता बिल्कुल साफ है— इसके लिए समयबद्ध और स्पष्ट लक्ष्यों वाली पाठ-आधारित बातचीत शुरू होनी चाहिए। भारत का स्पष्ट रुख है कि इस वास्तविक प्रयास का परिणाम सुरक्षा परिषद के स्थायी और अस्थायी दोनों श्रेणियों के विस्तार के रूप में निकलना चाहिए, जिसमें 'ग्लोबल साउथ' (विकासशील देशों) को बड़ा प्रतिनिधित्व मिले।
पृष्ठभूमि: UNSC में भारत की दावेदारी
2028-29 के लिए अभियान: इसी महीने विदेश मंत्री एस जयशंकर ने साल 2028-29 के कार्यकाल के लिए सुरक्षा परिषद में अस्थायी सीट के लिए भारत के आधिकारिक अभियान की शुरुआत की है। इसके लिए चुनाव अगले साल जून (2027) में होंगे, जहां एशिया-पैसिफिक ग्रुप श्रेणी की इकलौती सीट के लिए भारत और ताजिकिस्तान के बीच मुकाबला होगा।
भारत का इतिहास
भारत आखिरी बार 2021-22 में UNSC का अस्थायी सदस्य रहा था। यह भारत का 8वां कार्यकाल था। इससे पहले भारत 1950-51, 1967-68, 1972-73, 1977-78, 1984-85, 1991-92 और 2011-12 में इस मेज पर बैठ चुका है।
विपक्षी देशों का अड़ंगा (UfC ग्रुप)
भारत ने आगाह किया है कि अगर केवल अस्थायी श्रेणी का विस्तार किया गया, तो यह सुधार पूरी तरह 'विफल' माना जाएगा, क्योंकि इससे मौजूदा 5 स्थायी सदस्यों की निर्णय लेने वाली मुख्य शक्ति संरचना में कोई बदलाव नहीं आएगा। वहीं दूसरी ओर, 'यूनाइटेड फॉर कंसेंसस' (UfC) समूह— जिसमें पाकिस्तान, इटली, कनाडा और तुर्की जैसे देश शामिल हैं, उनका प्रस्ताव है कि स्थायी सदस्यों की संख्या बढ़ाए बिना, परिषद की कुल सीटों को केवल अस्थायी श्रेणी में बढ़ाकर 27 कर दिया जाए, जिसका भारत पुरजोर विरोध करता है।
