संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने संबोधन के दौरान शुक्रवार को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने सिंधु जल संधि को स्थगित करने का मुद्दा उठाया और भारत पर संधि के प्रावधानों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया। हालांकि, शहबाज़ ने पाकिस्तानी सीमाओं से उत्पन्न होने वाले आतंकवाद को रोकने के इस्लामाबाद के प्रयासों का ज़िक्र नहीं किया। पहलगाम आतंकवादी हमले और सीमा पार आतंकवाद के मुद्दे पर संधि को स्थगित करने के भारत के फैसले के बाद यह एक प्रमुख मांग थी।
संबोधन के दौरान शहबाज़ शरीफ़ ने कहा कि सिंधु जल संधि को स्थगित रखने का भारत का एकतरफा और अवैध प्रयास न केवल संधि के प्रावधानों का उल्लंघन करता है, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय क़ानून के मानदंडों का भी उल्लंघन करता है। रोना रोते हुए कहा कि हम इन जलक्षेत्रों पर अपने लोगों की रक्षा करेंगे। हमारे लिए संधि का कोई भी उल्लंघन युद्ध की कार्रवाई है।
कश्मीरी लोगों को लेकर कही ये बात
पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने कश्मीर का मुद्दा उठाते हुए भारतीय सीमाओं का सम्मान न करके अपना असली रूप भी दिखाया। कहा कि 'मैं कश्मीरी लोगों को आश्वस्त करना चाहता हूं कि मैं उनके साथ हूं', पाकिस्तान उनके साथ है, और एक दिन जल्द ही कश्मीर में भारत का अत्याचार रुक जाएगा।
दरअसल, इस साल 22 अप्रैल को पहलगाम आतंकी हमले में 26 नागरिकों के मारे जाने के बाद भारत ने पाकिस्तान के सीमा पार आतंकवाद के प्रयासों के खिलाफ जवाबी उपाय के रूप में इस संधि को स्थगित कर दिया था। भारत और पाकिस्तान के बीच सितंबर 1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता में सिंधु जल संधि पर हस्ताक्षर किए गए थे। इसके तहत तीन पूर्वी नदियों, रावी, व्यास और सतलुज, के जल पर भारत को और तीन पश्चिमी नदियों, सिंधु, झेलम और चिनाब, के जल पर पाकिस्तान को नियंत्रण प्रदान किया गया था।
