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जिनपिंग को अपनों का भ्रष्टाचार भी नहीं मंजूर;चीन के दो पूर्व रक्षा मंत्रियों को सजा-ए-मौत

2012 में सत्ता संभालने के बाद से शी जिनपिंग लगातार सेना और पार्टी के भीतर भ्रष्टाचार विरोधी अभियान चला रहे हैं। चीन में अब तक 20 लाख से ज्यादा अधिकारियों पर कार्रवाई की जा चुकी है।

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शी जिनपिंग

Photo : PTI

चीन के दो पूर्व रक्षा मंत्रियों को सजा ए मौत दी गई है। मौत की सजा पाने वाले पूर्व रक्षामंत्रियों वी फेंघे और ली शांगफू पर भ्रष्टाचार के आरोप थे। हालांकि सजा के साथ ही उन्हें दो साल की राहत भी मिली है। दोनों नेताओं को अलग-अलग सैन्य अदालतों ने दोषी ठहराया। वे चीन की सबसे शक्तिशाली सैन्य संस्था सेंट्रल मिलिट्री कमीशन (CMC) के सदस्य भी रह चुके थे। यह आयोग सीधे राष्ट्रपति शी जिनपिंग के नियंत्रण में काम करता है।

चीनी मीडिया के मुताबिक,फेंघे और उनके बाद रक्षा मंत्री बने शांगफू को 2024 में सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था। दोनों ने राष्ट्रपति शी चिनफिंग के तहत काम किया था। वी फेंघे जहां 2018 से 2023 तक रक्षा मंत्री रहे, वहीं शांगफू ने उनके उत्तराधिकारी के रूप में कुछ ही महीने यह प्रभार संभाला। चीन के एयरोस्पेस इंजीनियर फेंघे ने पीपल्स लिबरेशन आर्मी की अति महत्वपूर्ण रॉकेट (मिसाइल) फोर्स का नेतृत्व किया था। उन्हें रक्षा मंत्री पद के लिए शी चिनफिंग ने स्वयं चुना था।

किन आरोपों में हुई सजा?

72 वर्षीय वी फेंघे पर रिश्वत लेने का आरोप साबित हुआ, जबकि 68 वर्षीय ली शांगफू को रिश्वत लेने और देने दोनों मामलों में दोषी पाया गया। सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार,दोनों की राजनीतिक अधिकार भी जीवनभर के लिए समाप्त कर दिए गए हैं और उनकी निजी संपत्ति जब्त कर ली जाएगी। अदालत ने यह भी साफ किया कि दो साल की राहत अवधि खत्म होने के बाद यदि उनकी सजा उम्रकैद में बदली जाती है,तब भी उन्हें पैरोल या आगे किसी तरह की राहत नहीं मिलेगी।

मिसाइल फोर्स से जुड़े थे दोनों नेता

वी और ली दोनों चीन की बेहद ताकतवर रॉकेट फोर्स का नेतृत्व कर चुके हैं। यह फोर्स चीन की लंबी और छोटी दूरी की मिसाइलों का संचालन करती है और पीएलए की सबसे अहम सैन्य शाखाओं में गिनी जाती है। रॉकेट फोर्स की स्थापना 2015 में शी जिनपिंग के सैन्य सुधार कार्यक्रम के तहत की गई थी। वेई फेंघे इसके शुरुआती प्रमुखों में शामिल थे और बाद में 2018 से 2023 तक रक्षा मंत्री भी रहे।

शी जिनपिंग का सबसे बड़ा सैन्य शुद्धिकरण अभियान

2012 में सत्ता संभालने के बाद से शी जिनपिंग लगातार सेना और पार्टी के भीतर भ्रष्टाचार विरोधी अभियान चला रहे हैं। चीन में अब तक 20 लाख से ज्यादा अधिकारियों पर कार्रवाई की जा चुकी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस अभियान का उद्देश्य केवल भ्रष्टाचार खत्म करना नहीं, बल्कि सेना और पार्टी पर शी जिनपिंग की पकड़ को और मजबूत करना भी है। आलोचक कहते हैं कि इस मुहिम के जरिए शी ने खुद को चीन की कम्युनिस्ट पार्टी का सबसे शक्तिशाली नेता बना लिया है, जिनकी तुलना अब माओ के बाद सबसे प्रभावशाली नेता के रूप में की जाती है।

PLA के शीर्ष अधिकारियों पर भी कार्रवाई

इस साल जनवरी में चीन की सेना के सबसे वरिष्ठ अधिकारियों में शामिल जनरल Zhang Youxia और जनरल Liu Zhenli के खिलाफ भी जांच शुरू की गई थी। इन अधिकारियों पर भ्रष्टाचार, अनुशासनहीनता और कम्युनिस्ट पार्टी के नेतृत्व के प्रति अवज्ञा जैसे आरोप लगाए गए। शी जिनपिंग लगातार इस बात पर जोर देते रहे हैं कि चीन की सेना पूरी तरह कम्युनिस्ट पार्टी के नियंत्रण में रहनी चाहिए।
Shiv Shukla
शिव शुक्ला author

शिव शुक्ला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में कार्यरत एक अनुभवी न्यूज राइटर हैं। छह वर्षों के पेशेवर अनुभव के साथ वे डिजिटल पत्रकारिता में तेज, सटीक और प्रभ... और देखें

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