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तकनीक, पैसे, सैन्य ताकत का 'कॉकटेल' बनाएंगे सऊदी, PAK-तुर्किये, मध्य पूर्व तेज होगा 'पावर गेम'

समाचार एजेंसी एएफपी ने सूत्र के हवाले से कहा है कि तीनों देशों के बीच इस संयुक्त रक्षा करार लंबे समय से वार्ता चल रही थी लेकिन क्षेत्र में हाल के संघर्षों एवं युद्धों ने इसमें तेजी लाई। बता दें कि ईरान, अमेरिका-इजराइल युद्ध को देखते हुए मध्य पूर्व के देश अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं।

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सऊदी अरब, पाकिस्तान, तुर्किये में होगा रक्षा करार। तस्वीर-AI

Saudi Arab, Pakistan and Turkiye Defence pact: तुर्किये, सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच एक संयुक्त रक्षा समझौता होने जा रहा है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने दो क्षेत्रीय सूत्रों के हवाले से कहा है कि इस्लामिक नाटो की तर्ज वाले इस रक्षा करार पर सऊदी अरब के जेद्दा में हस्ताक्षर होंगे। वहीं, समाचार एजेंसी एएफपी ने सूत्र के हवाले से कहा है कि तीनों देशों के बीच इस संयुक्त रक्षा करार लंबे समय से वार्ता चल रही थी लेकिन क्षेत्र में हाल के संघर्षों एवं युद्धों ने इसमें तेजी लाई। बता दें कि ईरान, अमेरिका-इजराइल युद्ध को देखते हुए मध्य पूर्व के देश अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं और वे रक्षा क्षेत्र में आपसी सहयोग बढ़ाकर अपनी सुरक्षा मजबूत करना चाहते हैं। इससे पहले सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच रक्षा करार हो चुका है। इस रक्षा करार में शामिल होने की तुर्किये ने इच्छा जाहिर की थी।

जेद्दा में मिलेंगे तीनों देशों के नेता

रिपोर्ट के मुताबिक सऊदी सरकार के एक दूसरे करीबी सूत्र ने भी नाम न छापने की शर्त पर इस बात की पुष्टि की कि इस समझौते पर शुक्रवार को हस्ताक्षर किए जाएंगे। सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान का लाल सागर के तट पर स्थित शहर (जेद्दा) में तुर्किये के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से मिलने का कार्यक्रम है। तुर्की के राष्ट्रपति कार्यालय के अनुसार, शरीफ और पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर शनिवार तक चलने वाली अपनी यात्रा के लिए गुरुवार को सऊदी अरब पहुंचे, जबकि एर्दोगन के शुक्रवार को पहुंचने की उम्मीद है।

नाटो जैसा होगा सैन्य गठबंधन!

उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (NATO) का चार्टर-5 कहता है कि इसके किसी एक सदस्य देश पर हमला सभी देशों पर हमला माना जाएगा। यदि कोई देश हमला करता है तो नाटो के सभी देश मिलकर उस हमले का जवाब देंगे। नाटो में 32 देश शामिल हैं। सूत्रों का कहना है कि सऊदी अरब, तुर्किये और पाकिस्तान के बीच होने वाला रक्षा करार इसी तर्ज का हो सकता है। तुर्किये की तकनीक, सऊदी अरब का पैसा और पाकिस्तान का सैन्य सामर्थ्य ये सभी मिलकर इस सैन्य गठबंधन को ज्यादा ताकतवर बना सकते हैं। तुर्किये ड्रोन क्षमता में काफी आगे है। सऊदी अरब के पास पैसे की कमी नहीं है तो पाकिस्तान के पास न्यूक्लियर हथियार हैं।

6 से 8 अगस्त तक हो रही यह यात्रा

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह यात्रा 6 से 8 अगस्त तक हो रही है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने गुरुवार को कहा, 'खाड़ी (गल्फ) में बढ़े तनाव की पृष्ठभूमि में होने के बावजूद, यह यात्रा तात्कालिक संकट और अल्पकालिक विचारों से परे महत्व रखेगी।' तीनों देश महीनों से एक संभावित रणनीतिक गठबंधन की अटकलों का केंद्र रहे हैं। पाकिस्तान ने अमेरिका-ईरान युद्ध को समाप्त करने के प्रयासों में मध्यस्थता करने की कोशिश की है, जबकि तुर्किये ने गाजा में युद्ध खत्म करने के उद्देश्य से हुई वार्ताओं में राजनयिक भूमिका निभाई है।

मध्य पूर्व में बन सकते हैं नए ब्लॉक

सऊदी अरब और पाकिस्तान ने 2025 में ही एक संयुक्त रक्षा समझौते की घोषणा कर दी थी, यह एक ऐसा कदम था जिसने दुनिया भर का ध्यान आकर्षित किया क्योंकि पाकिस्तान मुस्लिम जगत का एकमात्र परमाणु-संपन्न देश है। इन तीनों देशों के बीच रक्षा करार पर हस्ताक्षर होने के बाद मध्य पूर्व एवं खाड़ी के देशों में ताकत का संतुलन बनाने के लिए नए रक्षा समझौते और ब्लॉक बन सकते हैं।

Alok Rao
आलोक कुमार रावauthor

19 वर्षों से मीडिया जगत में सक्रिय आलोक राव ने प्रिंट, न्यूज एजेंसी, टीवी और डिजिटल चारों ही माध्यमों में काम किया है। इस लंबे अनुभव ने उन्हें समाचारों की समझ, प्रेजेंटेशन, डिटेलिंग और न्यूजरूम डायनेमिक्स में असाधारण दक्षता प्रदान की है। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों में विशेष रुचि रखने के साथ-साथ जियो-पॉलिटिक्स एवं डिफेंस की स्टोरीज में इनकी खासी दिलचस्पी है। आलोक ने अलग-अलग माध्यमों में काम करते हुए समाचारों की समझ, प्रस्तुति और विश्लेषण में मजबूत दक्षता विकसित की है और अब तक 25,000 से अधिक आर्टिकल तैयार कर चुके हैं। तथ्यों की गहन जांच, मजबूत न्यूज सेंस और तेज निर्णय क्षमता उनकी पत्रकारिता की प्रमुख खासियतें हैं।

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