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ईरान के साथ आया तुर्की! अजरबैजान से नहीं निकलने दिया इजराइल के राष्ट्रपति का विमान

Israel Iran War: यह घटना तब हुई जब जरायल के प्रेसिडेंट इसाक हर्ज़ोग को अजरबैजान में आयोजित संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन के 29वें सत्र में भाग लेने जाना था। यह सम्मेलन 11 नवंबर को शुरू हुआ। इजरायली सरकार ने इस यात्रा के लिए अनुमति मांगी थी, लेकिन तुर्की अधिकारियों ने इसे खारिज कर दिया।

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तुर्की ने नहीं निकलने दिया इजराइल के राष्ट्रपति का विमान।

Israel Iran War: इजराइल के साथ जंग में तुर्की अब खुलकर ईरान के साथ खड़ा दिखाई दे रहा है। जानकारी के मुताबिक, तुर्की ने इजरायल के प्रेसिडेंट इसाक हर्ज़ोग के विमान को अपने हवाई क्षेत्र से गुजरने की अनुमति देने से इनकार कर दिया। इस बात की जानकारी अर्ध-आधिकारिक अनादोलु एजेंसी ने दी। समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, यह घटना तब हुई जब हर्ज़ोग को अजरबैजान में आयोजित संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन के 29वें सत्र में भाग लेने जाना था। यह सम्मेलन 11 नवंबर को शुरू हुआ।

अनादोलु के अनुसार, इजरायली सरकार ने इस यात्रा के लिए अनुमति मांगी थी, लेकिन तुर्की अधिकारियों ने इसे खारिज कर दिया। इसके बाद, हर्ज़ोग ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए शनिवार को अपनी अज़रबैजान यात्रा रद्द कर दी।

2010 से खराब हैं तुर्की और इजराइल के संबंध

2010 के बाद से तुर्की और इजरायल के बीच संबंध खराब रहे हैं, खासकर फिलिस्तीन मुद्दे को लेकर। हाल के वर्षों में रिश्तों को सुधारने की कोशिश की गई थी, लेकिन गाजा संकट ने फिर से तनाव बढ़ा दिया है। इस बीच दोनों देशों के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं और तुर्की ने इजरायल के साथ सभी व्यापारिक संबंध भी निलंबित कर दिए हैं।

पूरे मिडिल ईस्ट पर दिख रहा संघर्ष का असर

उल्लेखनीय है कि इस क्षेत्र में चल रहे संघर्ष का व्यापक असर आसपास के देशों में भी देखने के लिए मिला है। जैसे इस साल के पहले 10 महीनों में जॉर्डन का पर्यटन राजस्व 6.1 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया, जो पिछले साल की समान अवधि से 4.4 प्रतिशत कम है। समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, इस गिरावट का कारण पर्यटकों की संख्या में 6.6 प्रतिशत की गिरावट है। आर्थिक समाचार संपादक और विश्लेषक इल्हाम सईद ने सिन्हुआ को बताया, पर्यटन में गिरावट का मुख्य कारण गाजा और लेबनान में युद्ध के कारण यूरोपीय एयरलाइंस द्वारा जॉर्डन के लिए कई उड़ानें रद्द करना है। इसी बीच, उत्तरी गाजा पट्टी में दो इजरायली सैनिक मारे गए और एक अन्य गंभीर रूप से घायल हो गया है। अक्टूबर 2023 में फिलिस्तीनी-इजरायल संघर्ष की शुरुआत के बाद से, कई मोर्चों पर चल रहे युद्ध में 798 इजरायली सैनिक मारे गए हैं।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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