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सेहत के लिए ठीक नहीं कहकर पाकिस्तान में काट दिए गए 29 हजार से ज्यादा पेड़, अब मच रहा बवाल

पाकिस्तान में 29 हजार से ज्यादा पेड़ों को यह कहकर काट दिया गया है कि ये पेड़ स्वास्थ्य के लिए सही नहीं थे। इसमें 50-60 साल पुराने पेड़ भी शामिल हैं। अब इसे लेकर हंगामा मचा हुआ है।

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पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में काटे गए हजारों पेड़ (फोटो- Canva)

पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में 29 हजार से अधिक पेड़ों की कटाई को लेकर देश की राजनीति गरमा गई है। मंगलवार को नेशनल असेंबली में इस मुद्दे पर जमकर हंगामा हुआ, जहां विपक्ष ने सरकार पर राजधानी को “फेफड़ों से वंचित” करने का आरोप लगाया, वहीं सरकार ने इसे स्वास्थ्य कारणों से जरूरी कदम बताया।

इस्लामाबाद में काटे गए 29 हजार पेड़

पाकिस्तानी अखबार डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, गृह मंत्रालय के राज्य मंत्री तलाल चौधरी ने संसद को बताया कि इस्लामाबाद कैपिटल टेरिटरी (आईसीटी) क्षेत्र से कुल 29,115 पेड़ हटाए गए हैं। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने के लिए नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर की गई है और आने वाले महीनों में इनकी भरपाई के लिए बड़ी संख्या में नए पेड़ लगाए जाएंगे।

50-60 साल पुराने पेड़ों को भी काटा

इस मुद्दे को संसद में पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के अली मुहम्मद खान और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी की शाजिया मरी ने जोर-शोर से उठाया। अली मुहम्मद खान ने कहा कि यदि गृह मंत्रालय, इस्लामाबाद प्रशासन या जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने नागरिकों को भरोसे में लेकर यह कदम उठाया होता, तो इतना अविश्वास पैदा नहीं होता। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि काटे गए पेड़ इस्लामाबाद के “फेफड़े” थे। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अगर सिर्फ पेपर मलबेरी जैसी एक खास प्रजाति को हटाया जाना था, तो फिर 50 से 60 साल पुराने पेड़ों को क्यों काटा गया।

पाक जनता भी नाराज

बीते कुछ दिनों से यह मुद्दा इस्लामाबाद में आम चर्चा का विषय बना हुआ है। बड़ी संख्या में आम नागरिकों ने भी पेड़ कटाई के खिलाफ विरोध दर्ज कराया है। सोशल मीडिया पर भी इस कार्रवाई को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

पेड़ की थे खराब- मंत्री का दावा

इस बीच, जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण समन्वय मंत्री डॉ. मुसादिक मलिक ने सफाई देते हुए कहा कि लगभग 29,000 पेपर मलबेरी पेड़ों को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत काटा गया है, जो 2023 और 2025 में जारी किए गए थे। मंत्री के अनुसार, ये पेड़ एलर्जी और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन रहे थे, जिससे अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ रही थी।

Shishupal Kumar
शिशुपाल कुमारauthor

शिशुपाल कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क में कार्यरत एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें 13 वर्षों का अनुभव हासिल है। राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय और क्राइम रिपोर्टिंग में गहरी रुचि और मजबूत पकड़ के साथ वे समाचारों की बारीकियों को समझने और उन्हें प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते हैं। शिशुपाल ने अपने करियर की शुरुआत एक इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट के रूप में की, जहां उन्होंने प्रोडक्शन से लेकर ग्राउंड रिपोर्टिंग तक पत्रकारिता के कई महत्वपूर्ण पहलुओं में काम किया। फील्ड रिपोर्टिंग और डेस्क दोनों स्तरों पर उनकी दक्षता है। अब तक शिशुपाल कुमार 15,000 से अधिक खबरें प्रकाशित कर चुके हैं। वह ब्रेकिंग न्यूज, रियल-टाइम कवरेज, डेटा-आधारित विश्लेषण और एक्सप्लेनर लिखने में खास महारत रखते हैं। उनकी स्टोरीज तथ्यों की सटीकता और सहज भाषा की वजह से पाठकों पर मजबूत प्रभाव छोड़ती हैं।

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