नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री और नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एकीकृत मार्क्सवादी-लेनिनवादी) के अध्यक्ष के.पी. शर्मा ओली ने कहा है कि उनकी सरकार ने 8 सितंबर को शुरू हुए ‘जेन जेड’ आंदोलन के पहले दिन प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने का आदेश नहीं दिया था। प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद अपने पहले सार्वजनिक बयान में उन्होंने इस त्रासदी के लिए ‘‘घुसपैठियों’’ को जिम्मेदार ठहराया।
गोलीबारी पर सफाई
ओली ने दावा किया कि प्रदर्शनकारियों पर स्वचालित हथियारों से गोलियां चलाई गईं, जबकि पुलिस के पास इस तरह के हथियार नहीं थे। उन्होंने इस घटना की उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हुए कहा कि ‘‘सरकार की ओर से गोलीबारी का कोई आदेश नहीं था।’’
हिंसा और जनहानि
8 और 9 सितंबर को भ्रष्टाचार और सोशल मीडिया पर प्रतिबंध के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शनों में 72 लोग मारे गए, जिनमें तीन पुलिसकर्मी भी शामिल थे। आंदोलन के दौरान हिंसा भड़कने से सिंह दरबार सचिवालय, नेपाल का मानचित्र और कई सरकारी इमारतों को आग लगा दी गई।
घुसपैठ का आरोप
ओली ने फेसबुक पोस्ट में लिखा कि ‘‘शांतिपूर्ण विरोध’’ को षड्यंत्रकारियों ने हिंसक बना दिया। उनके अनुसार, आंदोलन में घुसपैठ करने वालों ने हिंसा को अंजाम दिया, जिससे बड़ी संख्या में युवाओं की जान गई।
इस्तीफा और बाद का घटनाक्रम
9 सितंबर को प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद सैकड़ों प्रदर्शनकारी उनके कार्यालय में घुस गए और उन्हें पुलिस कार्रवाई के लिए जिम्मेदार ठहराया। इस्तीफे के बाद ओली नौ दिन तक नेपाली सेना की सुरक्षा में रहे और फिर गुप्त स्थान पर चले गए। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वे इस समय भक्तपुर जिले के गुंडू इलाके में निजी आवास पर रह रहे हैं।
संविधान और संप्रभुता पर जोर
संविधान दिवस के अवसर पर जारी संदेश में ओली ने कहा कि नेपाल का संविधान सीमा नाकेबंदी और संप्रभुता पर चुनौतियों के बीच लागू हुआ था। उन्होंने सभी पीढ़ियों से अपील की कि वे ‘‘संप्रभुता पर हमलों का मुकाबला करने और संविधान की रक्षा के लिए एकजुट हों।’’
