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Taliban : भरोसे वाला कदम, हिंदू-सिख समुदाय को जमीन लौटाएगा तालिबान, बनाया आयोग

  • Written by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Apr 10, 2024, 11:40 AM IST

Hindu-Sikh in Afghanistan: अफगानिस्तान में अल्पसंख्यकों की हालत अच्छी नहीं है। वे धार्मिक आधार पर उत्पीड़न और भेदभाव का शिकार होते हैं। अब तालिबान ने उनमें भरोसा पैदा करने के लिए उनकी जमीन वापस करने का फैसला किया है।

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अगस्त 2021 से अफगानिस्तान में है तालिबान की सरकार।

Photo : AP
KEY HIGHLIGHTS
  • अमेरिकी और नाटो सेना के जाने के बाद अगस्त 2021 में अफगानिस्तान की सत्ता में आया तालिबान
  • तालिबान के आने के बाद देश से बड़ी संख्या में हिंदू और सिख समुदाय के लोगों ने भारत में शरण ली
  • दोनों समुदायों में भरोसा पैदा करने के लिए तालिबान ने इनकी जमीन वापस करने का फैसला लिया है

Hindu-Sikh in Afghanistan: अफगानिस्तान में हिंदू और सिख समुदाय में भरोसा पैदा करने के लिए तालिबान बड़ा कदम उठाने जा रहा है। तालिबान यहां हिंदुओं एवं सिखों की जमीन उन्हें वापस करेगा। इसके लिए उसने पहल शुरू कर दी है। अफगानिस्तान में हिंदू और सिख अल्पसंख्यक समुदाय हैं। हालांकि, इस देश में धार्मिक आधार पर अल्पसंख्यकों के साथ भेदभाव होता आया है, वे उत्पीड़न का शिकार होते आए हैं। यहां पर इनकी स्थिति ठीक नहीं मानी जाती। फिर भी तालिबान के इस कदम को भारत के साथ उसके रिश्ते बेहतर बनाने से जोड़कर देखा जा रहा है।

अफगानिस्तान में हाशिए पर हैं अल्पसंख्यक

रिपोर्टों के मुताबिक तालिबान वहां के लड़ाकों से जमीन छुड़ाकर इन समुदाय को वापस लौटाएगा। रिपोर्टों में तालिबान के एक अधिकारी के हवाले से कहा गया है कि यह कदम देश में धार्मिक आधार पर दशकों से अन्याय का सामना कर रहे अल्पसंख्यकों को राहत देगा। ये दोनों समुदाय विस्थापन का सामना कर रहे हैं और हाशिए पर हैं। भारत सरकार ने भी तालिबान के इस कदम को एक सकारात्मक रुख की तरह देखा है।

अगस्त 2021 में सत्ता में आया तालिबान

अफगानिस्तान में हाल के दिनों में कुछ ऐसी चीजें हुई हैं जिसे अल्पसंख्यकों में सुरक्षा की भावना पैदा करने और उन्हें अधिकार देने के रूप में देखा गया है। इसी कड़ी में नरेंद्र सिंह खालसा का कनाडा से अफगानिस्तान लौटना भी है। नरेंद्र सिंह अफगानिस्तान की संसद में हिंदू और सिख समुदाय की नुमाइंदगी करते हैं। अगस्त 2021 में तालिबान के सत्ता में आने के बाद नरेंद्र सिंह देश छोड़कर चले गए थे। इनके अलावा बड़ी संख्या में हिंदू और सिख समुदाय के लोगों ने भारत में शरण ली। खालसा अफगानिस्तान से पहले दिल्ली आए और फिर यहां से कनाडा चले गए।

भारत-तालिबान के बीच सुधर रहे रिश्ते

द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक तालिबान के प्रवक्ता सुहैल शाहीन ने कहा, 'पूर्व के शासन के दौरान अल्पसंख्यकों की जमीन एवं सपत्तियों पर जो कब्जा हुआ था, उन्हें वारलॉर्ड्स से मुक्त कराने के लिए न्याय मंत्री की अध्यक्षता में एक आयोग का गठन हुआ है।' बता दें कि अफगानिस्तान की सत्ता में तालिबान के आने के बाद भारत ने काबुल से अपना मिशन और वहां फंसे अपने नागरिकों को वापस बुला लिया। भारत सरकार ने अभी भी तालिबान सरकार को आधिकारिक मान्यता नहीं दी है। फिर भी उसके साथ रिश्ते पटरी पर आने शुरू हुए हैं।

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