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PM मोदी को मिला 31वां सर्वोच्च सम्मान; स्वीडन ने 'रॉयल ​​ऑर्डर ऑफ पोलर स्टार कमांडर ग्रैंड क्रॉस'से नवाजा

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने ’एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, स्वीडन की क्राउन प्रिंसेज विक्टोरिया ने भारत-स्वीडन संबंधों में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के असाधारण योगदान और उनके दूरदर्शी नेतृत्व को मान्यता देते हुए उन्हें 'रॉयल ​​ऑर्डर ऑफ द पोलर स्टार,डिग्री कमांडर ग्रैंड क्रॉस'से सम्मानित किया।

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स्वीडन ने पीएम मोदी को अपने सर्वोच्च सम्मान से सम्मानित किया

पीएम मोदी आज अपने पांच देशों के दौरे के क्रम में स्वीडन पहुंचे हैं। यहां पहुंचने पर प्रधानमंत्री मोदी का भव्य स्वागत किया गया। गुटेनबर्ग हवाई अड्डे पर उनका स्वागत करने के लिए उनके स्वीडिश समकक्ष उल्फ क्रिस्टर्सन खुद मौजूद थे। वहीं, अब स्वीडन ने उन्हें अपने सर्वोच्च सम्मान 'रॉयल ऑर्डर ऑफ पोलर स्टार कमांडर ग्रैंड क्रॉस'से सम्मानित किया है। प्रधानमंत्री मोदी को मिला यह 31वां वैश्विक सम्मान है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने ’एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, स्वीडन की क्राउन प्रिंसेज विक्टोरिया ने भारत-स्वीडन संबंधों में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के असाधारण योगदान और उनके दूरदर्शी नेतृत्व को मान्यता देते हुए उन्हें 'रॉयल ऑर्डर ऑफ द पोलर स्टार,डिग्री कमांडर ग्रैंड क्रॉस'से सम्मानित किया।

जायसवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने यह सम्मान भारत और स्वीडन के बीच मौजूद ऐतिहासिक संबंधों को समर्पित किया। उन्होंने इसे भारत और स्वीडन के लोगों के बीच मौजूद गर्मजोशी और स्नेह का सम्मान बताया।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने यह भी बताया कि नरेंद्र मोदी और उल्फ क्रिस्टर्सन ने स्वीडन दौरे के दौरान गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की विरासत को सम्मान देते हुए विशेष उपहारों का आदान-प्रदान किया। इस अवसर पर स्वीडन की क्राउन प्रिंसेस विक्टोरिया भी मौजूद रहीं। इस दौरान दोनों देशों के नेताओं ने गुरुदेव टैगोर के योगदान और उनकी ऐतिहासिक विरासत को याद करते हुए उन्हें भारत-स्वीडन मित्रता का प्रतीक बताया।

गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर साहित्य के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार पाने वाले पहले गैर-यूरोपीय व्यक्तित्व थे। हालांकि वर्ष 1913 में वे नोबेल पुरस्कार प्राप्त करने के लिए स्वीडन नहीं जा सके थे। बाद में वर्ष 1921 में स्वीडन यात्रा के दौरान उनकी मुलाकात स्वीडन के राजा गुस्ताव पंचम से हुई थी।

इस वर्ष गुरुदेव टैगोर की ऐतिहासिक स्वीडन यात्रा के 100 वर्ष भी पूरे हो रहे हैं। वर्ष 1926 में उनकी स्वीडन यात्रा ने भारत और स्वीडन के सांस्कृतिक संबंधों को नई पहचान दी थी।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि गुरुदेव टैगोर की विरासत केवल भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लिए प्रेरणा का स्रोत है। भारत और स्वीडन के बीच शिक्षा, संस्कृति और बौद्धिक आदान-प्रदान में टैगोर की भूमिका आज भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।

क्या है रॉयल ऑर्डर ऑफ द पोलर स्टार?

रॉयल ऑर्डर ऑफ द पोलर स्टार (Royal Order of the Polar Star) स्वीडन का एक प्रतिष्ठित शाही सम्मान है,जिसकी स्थापना 1748 में स्वीडन के राजा किंग फ्रैडरिक I ने की थी। यह सम्मान उन व्यक्तियों को दिया जाता है जिन्होंने स्वीडन,स्वीडिश समाज या उसके राष्ट्रीय हितों के लिए उल्लेखनीय योगदान दिया हो।

शुरुआत में यह सम्मान स्वीडिश नागरिकों और विदेशी नागरिकों दोनों को दिया जाता था, लेकिन 1975 के बाद इसमें बदलाव किया गया और इसे मुख्य रूप से विदेशी नागरिकों तथा शाही परिवार के सदस्यों तक सीमित कर दिया गया।

इस सम्मान का उद्देश्य खास तौर पर सार्वजनिक सेवा में उत्कृष्ट योगदान,विज्ञान, संस्कृति, शिक्षा और प्रशासन के क्षेत्र में उपलब्धियां,स्वीडन और दूसरे देशों के बीच संबंध मजबूत करने वाले कार्य,स्वीडिश हितों को आगे बढ़ाने वाले प्रयास को मान्यता देना है।

किन-किन लोगों को दिया जाता है ये सम्मान

इस ऑर्डर का प्रतीक एक सफेद एनामेल वाला क्रॉस होता है,जिसके केंद्र में नीले रंग का गोला और 'ध्रुव तारा'(Polar Star) का चिन्ह बना होता है। इसका आदर्श वाक्य लैटिन में 'Nescit Occasum' है, जिसका अर्थ होता है 'जो कभी अस्त नहीं होता।'इसे स्वीडन के सबसे सम्मानित शाही अलंकरणों में गिना जाता है और अक्सर विदेशी राष्ट्राध्यक्षों, राजनयिकों, वैज्ञानिकों और विशिष्ट हस्तियों को प्रदान किया जाता है।

Shiv Shukla
शिव शुक्ला author

शिव शुक्ला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में कार्यरत एक अनुभवी न्यूज राइटर हैं। छह वर्षों के पेशेवर अनुभव के साथ वे डिजिटल पत्रकारिता में तेज, सटीक और प्रभ... और देखें

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