पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की (Ex CJI Sushila Karki) को सरकार का प्रमुख बनाने पर इस शाम एक समझौता हो गया है, इसके मुताबिक सुशीला कार्की नेपाल की अंतरिम प्रधानमंत्री होंगी। नेपाल की संसद भंग कर दी गई है। शीशमहल (शीतल निवास) से जुड़े सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल, जो अब तक यह अड़े हुए थे कि प्रतिनिधि सभा का विघटन केवल तभी होगा जब कार्की को सरकार की बागडोर सौंपी जाएगी, अब पीछे हट गए हैं।
सूत्रों के मुताबिक एक छोटा मंत्रिमंडल तैयार किया गया है, लेकिन सदस्यों के नाम अभी तक गुप्त रखे गए हैं। आंदोलन में शामिल कुछ युवाओं ने तुरंत Agitators कहकर धमकी दी कि वे शीतल निवास को घेर लेंगे। इस दबाव के बाद पौडेल ने प्रमुख दलों के शीर्ष नेताओं से कहा कि वे प्रतिनिधि सभा को भंग करने का निर्णय लेने जा रहे हैं और तुरंत सुशीला कार्की को प्रधानमंत्री के रूप में शपथ दिलाने की तैयारी करें।
सूत्रों का कहना है कि वर्तमान में शीतल निवास में प्रतिनिधि सभा को भंग करने का निर्णय और पूर्व मुख्य न्यायाधीश कार्की को प्रधानमंत्री नियुक्त करने का पत्र तैयार किया गया है।
सुशीला कार्की का भारत से गहरा नाता
पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की का भारत से गहरा नाता है। भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ा रुख अपनाने वालीं सुशीला कार्की नेपाल के सुप्रीम कोर्ट की इकलौती महिला चीफ जस्टिस थीं। उन्होंने 11 जुलाई 2016 से 6 जून 2017 तक पद संभाला था। उन्होंने काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) से राजनीति शास्त्र में एमए किया था।
2016 में सुप्रीम कोर्ट की पहली महिला न्यायाधीश बनीं
सुशीला कार्की का जन्म नेपाल के विराटनगर में 7 जून, 1952 को हुआ था। उन्होंने 1979 में वकालत शुरुआत की और 2007 में वरिष्ठ अधिवक्ता बनीं। कार्की को 2009 में सुप्रीम कोर्ट में बतौर एडडॉक जज नियुक्त किया गया और 2010 में वह स्थायी न्यायाधीश बनी थीं। हालांकि, 2016 में उन्हें सुप्रीम कोर्ट की पहली महिला न्यायाधीश बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ था। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने चुनावी विवादों, भ्रष्टाचार सहित कई अहम मामलों की सुनवाई की।
इससे पहले Gen-Z आंदोलनकारियों ने वर्चुअल बैठक बुलाई थी इसमें करीब 5,000 से ज्यादा युवाओं ने हिस्सा लिया और सबसे ज़्यादा समर्थन वहां की पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की को मिला था। पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की नेपाल के अगले प्रधानमंत्री के लिए Gen-Z की शीर्ष पसंद बनकर उभरीं जब एक राष्ट्रव्यापी वर्चुअल बैठक में 5,000 से ज़्यादा युवाओं ने उनका समर्थन किया था।
