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9/11 आतंकी हमले से पहले FBI के पास था अहम साक्ष्य? अल-कायदा के आतंकी से सऊदी के नागरिक का कनेक्शन आया सामने

सऊदी अरब का नागरिक बयूमी 1994 में सैन डिएगो आया। अमेरिका में उसने बताया कि वह अंग्रेजी सीखने आया है लेकिन अदालती दस्तावेजों के मुताबिक उसने पढ़ाई लगभग छोड़ ही दी थी और इसकी जगह धार्मिक गतिविधियों के आयोजन में जुट गया।

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25 साल पहले अमेरिका में अल-कायदा ने किया आतंकवादी हमला।

Photo : AP

9/11 Attack: अमेरिका में 11 सितंबर 2001 को हुए आतंकवादी हमले पर चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। बीबीसी की जांच के मुताबिक एक नए वीडियो में सऊदी अरब का नागरिक ओमर अल-बयूमी आतंकवादी संगठन अल-कायदा के भविष्य के नेता अनवर अल-अवलाकी को अपने आगोश में भरे हुए और उसके साथ पेंटबाल एक्सरसाइज करता नजर आया है। हैरान करने वाली बात है कि फेडरल जांच ब्यूरो (FBI) ने 9/11 हमले के बाद इस सऊदी नागरिक बयूमी से पूछताछ की थी। इस नए वीडियो के सामने आने के बाद जांच एजेंसी पर सवाल उठ खड़े हुए हैं। यह पूछा जा रहा है कि क्या एफबीआई ने इस वीडियो साक्ष्य को जानबूझकर दबाया? और क्या FBI ने जानबूझकर सऊदी अरब का कनेक्शन सामने नहीं आने दिया?

1994 में सैन डिएगो आया बयूमी

सऊदी अरब का नागरिक बयूमी 1994 में सैन डिएगो आया। अमेरिका में उसने बताया कि वह अंग्रेजी सीखने आया है लेकिन अदालती दस्तावेजों के मुताबिक उसने पढ़ाई लगभग छोड़ ही दी थी और इसकी जगह धार्मिक गतिविधियों के आयोजन में जुट गया। बयूमी की कट्टरपंथी गतिविधियों को लेकर FBI को 1998 से ही उस पर शक था लेकिन तब की जांच किसी नतीजे पर नहीं पहुंची। 2000 में, लॉस एंजेलिस के एक रेस्टोरेंट में बयूमी की मुलाकात दो हाईजैकर्स नवाफ अल-हजमी और खालिद अल-मिहधर से हुई। बयूमी का दावा था कि ये मुलाकात महज इत्तेफाक थी। उसने पास की टेबल पर उन्हें अरबी बोलते सुना, और बातचीत शुरू हो गई।

मुकदमे की सुनवाई का हिस्सा है यह फुटेज

यह फुटेज बयूमी को भावी अल-कायदा नेता अनवर अल-अवलाकी के साथ दिखाती है। यह सबूत FBI के पास 2001 के हमलों के तुरंत बाद ही आ गया था। यानी बीस साल से ज्यादा समय तक यह जानकारी सार्वजनिक नहीं हुई। यह नया साक्ष्य 9/11 पीड़ितों के परिवारों की तरफ से सऊदी अरब के खिलाफ दायर एक ट्रिलियन डॉलर के मुकदमे की सुनवाई का हिस्सा है। पूर्व FBI जांचकर्ता स्टीव मूर ने इस मामले पर एक तीखी टिप्पणी की उनके मुताबिक जांच एक बड़ी रुकावट से टकरा गई थी, जिसका झटका बहुत तेज था।

बयूमी पर आज तक कोई आरोप नहीं लगा

रिपोर्टों के मुताबिक इतना ही नहीं जिस अधिकारी जेफ्री ब्रेनहोल्ट जिन्होंने 9/11 केस के अभियोजन की निगरानी की थी, उन्होंने कहा कि इससे भी कम सबूतों पर लोगों को दोषी ठहराया गया है। फिर भी, बयूमी पर आज तक कोई आरोप नहीं लगा। बयूमी ने हमेशा हमलों में किसी भी भूमिका से इनकार किया है और सऊदी अरब की सरकार ने भी बार-बार इन आरोपों को खारिज किया है। यह सिर्फ एक आदमी की कहानी नहीं है। 2016 की एक FBI रिपोर्ट जो 'ऑपरेशन एनकोर' नाम की गुप्त जांच का हिस्सा थी, उसमें यह भी सामने आया कि अमेरिका में मौजूद कई सऊदी धार्मिक अधिकारियों के तार अल-कायदा से जुड़े संदिग्धों से मिलते थे।

दो अलग-अलग जांचों के नतीजे आपस में टकराते हैं

पीड़ित परिवारों के वकीलों का आरोप है कि सऊदी सरकार का एक पूरा नेटवर्क हाईजैकर्स को अपार्टमेंट, पैसा, अंग्रेजी की क्लासेस और फ्लाइट ट्रेनिंग तक मुहैया कराने में लगा था। दूसरी तरफ, 9/11 कमीशन ने 2004 में यह कहा था कि उसे सऊदी सरकार द्वारा संस्थागत रूप से अल-कायदा को फंड करने का कोई सबूत नहीं मिला। यानी यहां दो अलग-अलग जांचों के नतीजे आपस में टकराते हैं। दरअसल, 25 साल बाद भी, 9/11 के पूरे सच पर से पर्दा नहीं उठा है। सवाल अब भी वही है जितनी बातें बताई गईं हैं, क्या उतना ही सच हैं, या उससे कहीं ज्यादा दबाया गया?

Alok Rao
आलोक कुमार रावauthor

19 वर्षों से मीडिया जगत में सक्रिय आलोक राव ने प्रिंट, न्यूज एजेंसी, टीवी और डिजिटल चारों ही माध्यमों में काम किया है। इस लंबे अनुभव ने उन्हें समाचारों की समझ, प्रेजेंटेशन, डिटेलिंग और न्यूजरूम डायनेमिक्स में असाधारण दक्षता प्रदान की है। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों में विशेष रुचि रखने के साथ-साथ जियो-पॉलिटिक्स एवं डिफेंस की स्टोरीज में इनकी खासी दिलचस्पी है। आलोक ने अलग-अलग माध्यमों में काम करते हुए समाचारों की समझ, प्रस्तुति और विश्लेषण में मजबूत दक्षता विकसित की है और अब तक 25,000 से अधिक आर्टिकल तैयार कर चुके हैं। तथ्यों की गहन जांच, मजबूत न्यूज सेंस और तेज निर्णय क्षमता उनकी पत्रकारिता की प्रमुख खासियतें हैं।

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