Starship V3 Launching: एलन मस्क की कंपनी SpaceX ने टेक्सस में स्थित अपने स्पेसपोर्ट 'स्टारबेस' (Starbase) से दुनिया के सबसे बड़े मेगा-रॉकेट 'स्टारशिप वर्जन 3' (Starship V3) को पहली बार अंतरिक्ष में भेजने की पूरी तैयारी कर ली थी। भारतीय समयानुसार शुक्रवार (22 मई 2026) की सुबह इस रॉकेट के लिए डेढ़ घंटे की 'लॉन्च विंडो' खुली थी। SpaceX के लाइव ब्रॉडकास्ट (लाइव स्ट्रीमिंग) के दौरान होस्ट ने पुष्टि की कि रॉकेट में पूरी तरह से फ्यूल (ईंधन) लोड किया जा चुका था, लेकिन आखिरी सेकंडों में आई कुछ तकनीकी दिक्कतों के कारण इस मिशन को टालना पड़ा। इस ऐतिहासिक पल का गवाह बनने के लिए मशहूर सिंगर निकी मिनाज (Nicki Minaj) भी स्टारबेस पर मौजूद थीं, लेकिन लॉन्चिंग टलने से अंतरिक्ष प्रेमियों को थोड़ी निराशा हाथ लगी। SpaceX के कम्युनिकेशंस अधिकारी डैन हुओट ने कहा, "जब हम इन जटिल सिस्टम को पहली बार चला रहे होते हैं, तो बहुत कुछ सीख रहे होते हैं। आखिरी सेकंडों में आई सभी समस्याओं को तुरंत ठीक करना मुमकिन नहीं था।"
अब कब होगी अगली कोशिश? (Next Launch Date & Time of Starship V3)
SpaceX ने आधिकारिक तौर पर अगली लॉन्चिंग का समय तय नहीं किया है, लेकिन माना जा रहा है कि कंपनी शनिवार सुबह (23 मई 2026) भारतीय समयानुसार सुबह 4:00 बजे से 5:30 बजे के बीच इस रॉकेट को छोड़ने का दूसरा प्रयास करेगी।
क्या है स्टारशिप V3 और यह क्यों इतना खास है? (What is Starship V3?)
यह कोई साधारण रॉकेट नहीं है, बल्कि इंसानी इतिहास का सबसे ऊंचा और ताकतवर रॉकेट सिस्टम है। आसान शब्दों में समझें तो यह एक 'टू-स्टेज' (Two-Stage) रॉकेट है। एक हिस्सा नीचे का बूस्टर है, इसे 'सुपर हैवी बूस्टर' कहते हैं, जो रॉकेट को जमीन से आसमान में धकेलता है। ऊपर का हिस्सा, जो शिप है यह मुख्य स्पेसक्राफ्ट है जो यात्रियों या सैटेलाइट्स को लेकर अंतरिक्ष में जाता है। जब इसके दोनों हिस्सों को एक के ऊपर एक खड़ा किया जाता है, तो इसकी लंबाई 408 फीट हो जाती है। यह 18 मिलियन पाउंड का थ्रस्ट (धकेलने की शक्ति) पैदा करता है। SpaceX के मुताबिक, इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि हवाई जहाज की तरह इसके दोनों हिस्सों को बार-बार इस्तेमाल किया जा सके। यह एक बार में 100 मीट्रिक टन सामान अंतरिक्ष की कक्षा में ले जा सकता है। साल 2025 में इसके पुराने मॉडल 'वर्जन 2' की कई उड़ानें सफल रही थीं, लेकिन इस नए और बड़े 'वर्जन 3' को यहां तक लाने में कंपनी को काफी नुकसान उठाना पड़ा है। ग्राउंड टेस्टिंग के दौरान दो बड़े विस्फोटों में इसका एक बूस्टर और एक मुख्य रॉकेट पूरी तरह नष्ट हो चुके हैं।
'फ्लाइट 12' का मिशन प्रोफाइल: अंतरिक्ष में होने थे ये बड़े टेस्ट
इस 'फ्लाइट 12' नामक टेस्ट मिशन में कोई इंसान या असली कमर्शियल सैटेलाइट नहीं जा रहा है। इसके बजाय SpaceX इसमें 20 नकली स्टारलिंक सैटेलाइट (Simulators) भेज रहा है। इस आधे-अधूरे अंतरिक्ष सफर (Sub-orbital Flight) के मुख्य लक्ष्य थे, हीट शील्ड की टेस्टिंग (Heat Shield Test) और इंजन को दोबारा चालू करना (Engine Relight)। जब रॉकेट अंतरिक्ष से वापस धरती पर लौटता है, तो वायुमंडल की रगड़ से वह आग के गोले में बदल जाता है। उससे बचने के लिए रॉकेट पर 'हीट शील्ड' लगाई जाती हैं। इस बार रॉकेट की कुछ टाइल्स को जानबूझकर सफेद रंग से रंगा गया था, ताकि दो विशेष सैटेलाइट्स उनकी तस्वीरें लेकर जमीन पर भेज सकें और यह जांचा जा सके कि टाइल्स सुरक्षित हैं या नहीं। उड़ान के 39वें मिनट में अंतरिक्ष के शांत वातावरण में इसके 'रैप्टर इंजन' को बंद करके दोबारा चालू करने का टेस्ट होना था। यह डेटा भविष्य में रॉकेट को वापस सुरक्षित जमीन पर उतारने के काम आएगा। इस बार रॉकेट को हवा में टावर से लपकने (Tower Catch) की योजना नहीं थी। लॉन्च के 7 मिनट बाद नीचे के बूस्टर को मेक्सिको की खाड़ी में और ऊपर के मुख्य शिप को करीब एक घंटे बाद हिंद महासागर में नियंत्रित तरीके से गिराया जाना था।
