काहिरा: पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। अमेरिका और सऊदी अरब की ओर से इराक में ईरान समर्थित ठिकानों पर किए गए संयुक्त हवाई हमले में ईरान के छह सैन्य सलाहकार मारे गए हैं। यह जानकारी इराकी मिलिशिया के दो अधिकारियों ने समाचार एजेंसी एपी को दी। अधिकारियों ने पहचान उजागर न करने की शर्त पर बताया कि हमले में ईरानी सलाहकारों के अलावा कई ईरान समर्थित लड़ाके भी मारे गए।
यह हमला ऐसे समय हुआ है जब कुछ दिनों की शांति के बाद ईरान ने अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइलों की नई खेप दागी, जिससे पूरे पश्चिम एशिया में बड़े युद्ध की आशंका फिर बढ़ गई है।
ईरान के 6 सलाहकारों की मौत
इराकी मिलिशिया अधिकारियों के मुताबिक, अमेरिकी और सऊदी लड़ाकू विमानों ने पूर्वी इराक में ईरान समर्थित समूहों के हथियार भंडार, लॉजिस्टिक केंद्रों और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इन हमलों में ईरान के छह सैन्य सलाहकारों की मौत हुई। हालांकि, ईरान की ओर से अभी तक इस पर आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
वहीं, इराक के पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्सेज (PMF), जिसमें मुख्य रूप से ईरान समर्थित शिया सशस्त्र समूह शामिल हैं, ने बताया कि हवाई हमलों में कम से कम 20 लड़ाके मारे गए और 32 अन्य घायल हुए हैं।
ईरान ने दागीं मिसाइलें
हवाई हमलों से पहले ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया कि उसने जॉर्डन स्थित मुवाफ्फक सल्ती एयर बेस पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं, जिसे क्षेत्र में अमेरिकी सेना का प्रमुख सैन्य अड्डा माना जाता है। जॉर्डन की सेना ने कहा कि उसने पांच ईरानी मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया और किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं है।
इराक ने जताया विरोध
इराक के राष्ट्रपति निजार अमीदी के कार्यालय ने अमेरिका और सऊदी अरब की इस कार्रवाई की कड़ी आलोचना की। बयान में कहा गया कि यह इराक की संप्रभुता का उल्लंघन है और देश की आधिकारिक सुरक्षा संस्थाओं को निशाना बनाया गया है। इराक की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने भी हमलों की निंदा करते हुए कहा कि सरकार पहले से ही इस मामले को लेकर संबंधित पक्षों के संपर्क में थी और विवाद का समाधान बातचीत के जरिए तलाशा जा रहा था। इन घटनाओं के बाद इराक के प्रधानमंत्री अली अल-जायदी की सऊदी अरब यात्रा भी अनिश्चितकाल के लिए टाल दी गई है।
अमेरिका और सऊदी ने क्यों की कार्रवाई?
अमेरिका का कहना है कि यह कार्रवाई हाल के दिनों में सऊदी अरब के तेल प्रतिष्ठानों पर हुए ड्रोन हमलों के जवाब में की गई। सऊदी अरब ने आरोप लगाया था कि ईरान समर्थित इराकी मिलिशिया ने उसके ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाया। हालांकि, कुछ इराकी मिलिशिया समूहों ने इन आरोपों से इनकार किया, जबकि यमन के हूती विद्रोहियों ने अलग से सऊदी तेल प्रतिष्ठानों पर ड्रोन हमलों की जिम्मेदारी ली।
तेल बाजार पर दिखा असर
संघर्ष तेज होने के साथ ही अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में भी उथल-पुथल देखने को मिली। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत करीब 3.1 प्रतिशत बढ़कर 84.58 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तनाव इसी तरह बढ़ता रहा तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है और तेल की कीमतों में और तेजी आ सकती है।
सऊदी तेल प्रतिष्ठानों पर ड्रोन हमलों का दावा
ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने दावा किया है कि उन्होंने सऊदी अरब के ऊर्जा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया। बताया गया कि यनबू बंदरगाह तक तेल पहुंचाने वाले बुनियादी ढांचे पर ड्रोन हमले किए गए। सैटेलाइट तस्वीरों में सऊदी अरामको के अबकैक ऑयल प्रोसेसिंग प्लांट को नुकसान पहुंचने के संकेत मिले हैं। इसके अलावा जाज़ान स्थित तेल रिफाइनरी को भी हालिया हमले में नुकसान पहुंचा है, जिसके कारण उत्पादन अस्थायी रूप से रोकना पड़ा है।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर गतिरोध कायम
इस बीच, हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी तनाव बना हुआ है। ईरान ने ओमान के उस प्रस्ताव को खारिज कर दिया है, जिसमें जहाजों की आवाजाही के संयुक्त प्रबंधन की बात कही गई थी। ईरान के उप विदेश मंत्री काज़ेम ग़रीबाबादी ने कहा कि उनका देश चाहता है कि जलडमरूमध्य की स्थिति युद्ध से पहले जैसी न हो। हॉर्मुज वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक माना जाता है और यहां तनाव बढ़ने से दुनिया भर के ऊर्जा बाजार प्रभावित हो सकते हैं।
युद्ध का खतरा फिर गहराया
लगातार बढ़ते हमलों ने पूरे क्षेत्र में व्यापक युद्ध की आशंकाओं को फिर मजबूत कर दिया है। पिछले पांच महीनों से जारी संघर्ष ने वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजार को प्रभावित किया है। विश्लेषकों का मानना है कि अगर मौजूदा हालात नहीं सुधरे तो यह संघर्ष कई नए देशों को भी अपनी चपेट में ले सकता है।
