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BRICS 2026 के वेज मेनू पर क्यों खड़ा हुआ विवाद, डिनर पार्टी कैसे बनी सियासत का अखाड़ा?

भारत मंडपम और दिल्ली के प्रमुख फाइव-स्टार होटलों द्वारा तैयार किए गए इस विशेष मेनू में भारतीय क्षेत्रीय व्यंजनों का अनूठा मिश्रण पेश किया गया था। लेकिन इसे लेकर सियासी विवाद हो गया...जानें पूरा मामला।

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BRICS वेज फूड पर सियासत क्यों हुई?
Authored by: अमित कुमार मंडल
Updated Sep 14, 2026, 14:49 IST
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नई दिल्ली में आयोजित 18वें BRICS शिखर सम्मेलन 2026 के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा आयोजित भव्य गाला डिनर में विश्वभर से आए राष्ट्राध्यक्षों और प्रतिनिधियों को शत-प्रतिशत शाकाहारी और बाजरे से बने व्यंजनों की थाली परोसी गई। भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विविधता और खान-पान की परंपरा को प्रदर्शित करने के उद्देश्य से तैयार किया गया यह मेनू जल्द ही एक बड़े राजनीतिक विवाद में बदल गया। विपक्षी दल कांग्रेस ने सरकार पर भारत की विविधता को छिपाने और अपनी सांस्कृतिक व खान-पान संबंधी प्राथमिकताओं को विदेशी मेहमानों पर थोपने का आरोप लगाया। इसके जवाब में सत्तारूढ़ भाजपा ने इसे निचले स्तर की राजनीति करार दिया और राहुल गांधी को निशाने पर लिया। क्या है पूरा मामला और क्यों शुरू हुई इस पर सियासत, विस्तार से समझते हैं।

मेनू में क्या था खास?

भारत मंडपम और दिल्ली के प्रमुख फाइव-स्टार होटलों द्वारा तैयार किए गए इस विशेष मेनू में भारतीय क्षेत्रीय व्यंजनों का अनूठा मिश्रण पेश किया गया था।

  • पारंपरिक भारतीय व्यंजन: पनीर लबाबदार, राजमा रसीला, दाल पंचमेल, सबज मोतिया पुलाव, मकई लहसुनी पालक, बनारसी दम आलू और गुच्छी मशरूम।
  • श्रीअन्न/मोटे अनाज पर जोर: बाजरा, जवार, कुट्टू और सत्तू से बनी रोटियां, क्विनोआ उपमा, बाजरे के लड्डू और ट्रेल मिक्स।
  • अंतरराष्ट्रीय फ्यूजन: पेने अल पोमोडोरो, पर्ल मिलेट-हैरिकॉट बीन्स सलाद और बेक्ड वेज ऑ ग्रैटिन।

डिनर पार्टी कैसे बनी सियासत का मैदान?

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने बिना सीधे मेनू का जिक्र किए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर निशाना साधा। उन्होंने लिखा: "रिकॉर्ड के लिए, 80% भारतीय मांसाहारी हैं। भारतीय मांसाहारी भोजन बेहद स्वादिष्ट होता है...ठीक उसी तरह जैसा कि मेरी बहन द्वारा बनाए गए छोले भटूरे भी हैं।" उनका तर्क था कि भारत की पाक कला की पहचान शाकाहारी भोजन से कहीं अधिक व्यापक है और जब देश अंतरराष्ट्रीय मेहमानों के सामने अपने व्यंजनों का प्रदर्शन कर रहा हो तो मांसाहारी व्यंजनों को भी स्थान मिलना चाहिए। इसके बाद कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने सरकार की नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि भारत दुनिया के सबसे बेहतरीन गैर-शाकाहारी व्यंजनों का घर है। उन्होंने पूछा, आखिर सरकार ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की इस विविधता और खान-पान की संस्कृति के इस हिस्से को क्यों छिपाया?

ब्रिक्स का वेज-फूड मेनू

ब्रिक्स का वेज-फूड मेनू

भाजपा ने किया पलटवार

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस के आरोपों पर तीखा जवाब दिया। उन्होंने कहा, "मुझे विश्वास नहीं हो रहा कि कांग्रेस BRICS नेताओं को परोसे गए भोजन पर भी राजनीति कर रही है। हमारे विदेशी मेहमानों ने भारतीय शाकाहारी भोजन का जमकर आनंद लिया, जो अपने स्वाद, पोषण और क्षेत्रीय विविधताओं के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है।" भाजपा नेताओं और सरकारी अधिकारियों ने कहा कि समिट की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आलोचकों के पास विरोध करने के लिए केवल फूड मेनू ही बचा है।

'फूड डिप्लोमेसी' और शाकाहारी मेनू का कूटनीतिक गणित

अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों और वैश्विक कूटनीति में भोजन केवल पेट भरने का साधन नहीं, बल्कि देश की सॉफ्ट पावर और सांस्कृतिक ब्रांडिंग का प्रतीक होता है। शाकाहारी और बाजरा-आधारित भोजन को बढ़ावा देना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वैश्विक 'LiFE' (Lifestyle for Environment) विजन का हिस्सा है। बाजरा (Millet) कम पानी में उगता है और जलवायु परिवर्तन के खिलाफ एक टिकाऊ खाद्य विकल्प माना जाता है। भारत इस अंतरराष्ट्रीय मंच के जरिए मोटे अनाज (श्रीअन्न) की वैश्विक ब्रांडिंग करना चाहता था।

कूटनीतिक और लॉजिस्टिक सुगमता

BRICS में रूस, चीन, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, ईरान, यूएई, इथियोपिया और इंडोनेशिया जैसे विविधता भरे देश शामिल हैं। इन देशों में हलाल (Halal), कोषेर (Kosher) और विभिन्न धार्मिक व सांस्कृतिक खाद्य पाबंदियां लागू होती हैं। अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में एक 100% शुद्ध शाकाहारी और न्यूट्रल मेनू रखना कूटनीतिक रूप से सबसे सुरक्षित और समावेशी माना जाता है, जिससे किसी भी देश के प्रतिनिधि की धार्मिक या व्यक्तिगत भावनाएं आहत न हों।

भारत की 'डिनर डिप्लोमेसी' का इतिहास

भारत की स्वतंत्रता के बाद पंडित जवाहरलाल नेहरू के दौर में जब राजकीय भोज होते थे, तो उनमें भारतीय और पश्चिमी दोनों तरह के (नॉन-वेज सहित) व्यंजन परोसे जाते थे, ताकि विदेशी मेहमान सहज महसूस करें। इंदिरा गांधी और अटल बिहारी वाजपेयी के समय भी 'फूड डिप्लोमेसी' में भारतीय मांसाहारी व्यंजनों (जैसे कबाब, बिरयानी और रोगन जोश) को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए परोसा जाता था। डॉ. मनमोहन सिंह के कार्यकाल के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू. बुश या अन्य नेताओं के स्वागत में आयोजित भोज में हमेशा शाकाहारी और मांसाहारी दोनों विकल्प उपलब्ध कराए जाते थे। पीएम मोदी के नेतृत्व में 'ब्रांड इंडिया' के तहत योग, आयुर्वेद, शाकाहार और मोटे अनाज को वैश्विक मंच पर प्रमोट करने की रणनीति पर जोर दिया गया है। 2023 में G20 सम्मेलन के दौरान भी मिलेट्स और शाकाहारी व्यंजनों को प्रमुखता दी गई थी।

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