पुतिन ने दिया पाकिस्तान को सपोर्ट करने का ऑफर, क्या अमेरिका के साथ भारत की डील ने रूस को कर दिया नाराज? जानें- यह कितना खतरनाक
- Edited by: Nitin Arora
- Updated Feb 8, 2026, 02:04 PM IST
Russia-Pakistan Relation: रूस भारत का सच्चा दोस्त है और एक समय पर वह भारत के लिए अमेरिका के आगे आकर खड़ा हो गया, जहां अमेरिका और पाकिस्तान को मुंह की खानी पड़ी थी, लेकिन अब रूस का पाक के प्रति ऐसा प्रेम व्यवहार क्या कुछ अपने भीतर छुपाए हुए है?
पुतिन ने पाकिस्तान को आतंकवाद विरोधी समर्थन की पेशकश की
Putin Offers Support to Pakistan: रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पाकिस्तान के इस्लामाबाद में एक मस्जिद में हुए जानलेवा बम धमाके की कड़ी निंदा की है। उन्होंने इस प्रकार की हिंसा को बर्बर बताया और आतंकवाद से लड़ने में पाकिस्तान को मदद की पेशकश की है। पाकिस्तानी राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को भेजे गए संदेशों में पुतिन ने दुख जताया और पीड़ितों और देश के प्रति एकजुटता व्यक्त की।
उन्होंने शोक संदेश में कहा, 'धार्मिक समारोह के दौरान लोगों की हत्या आतंकवाद के बर्बर, अमानवीय स्वभाव का एक और सबूत है।'
पुतिन ने यह भी कहा कि मारे गए लोगों के परिवारों और दोस्तों तक उनकी सच्ची सहानुभूति और समर्थन पहुंचाया जाए और घायलों के जल्दी ठीक होने की कामना की। उन्होंने सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी मामलों में इस्लामाबाद के साथ सहयोग मजबूत करने के लिए मॉस्को की तैयारी का संकेत दिया।
धमाके के बारे में
यह धमाका शुक्रवार की नमाज के दौरान शहजाद टाउन इलाके की इमामबारगाह खदीजा-तुल-कुबरा मस्जिद में हुआ, जो सालों में इस्लामाबाद में हुए सबसे खतरनाक हमलों में से एक था। पाकिस्तानी अधिकारियों ने बताया कि जब सुरक्षा बलों ने एक आत्मघाती हमलावर को रोकने की कोशिश की, तो उसने विस्फोटक के साथ खुद को उड़ा लिया, जिस कारण कम से कम 31 लोग मारे गए और लगभग 169 अन्य घायल हो गए। खबरों के मुताबिक, इस्लामिक स्टेट ग्रुप के पाकिस्तान से जुड़े संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है, जिससे चरमपंथी हिंसा के फैलने को लेकर अंतरराष्ट्रीय चिंता बढ़ गई है।
पाकिस्तान ने इस बम धमाके के सिलसिले में चार संदिग्धों को गिरफ्तार किया है, जिसमें मास्टरमाइंड भी शामिल है। यह कार्रवाई आतंकवाद विरोधी बड़े अभियान का हिस्सा है।
दुनिया भर के नेताओं ने मस्जिद पर हुए हमले की निंदा की है। चीन ने इस घटना पर गहरा दुख जताया और पाकिस्तान की सुरक्षा कोशिशों को पूरा समर्थन दिया, जबकि कई पश्चिमी देशों और इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) सहित अन्य देशों ने नागरिकों और पूजा स्थलों को निशाना बनाने की निंदा करते हुए बयान जारी किए।
इस हमले से राजनयिक तनाव भी पैदा हो गया है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने इसमें विदेशी हाथ होने का आरोप लगाया है। इन दावों को भारत ने बेबुनियाद बताकर सिरे से खारिज कर दिया है।
क्या भारत की अमेरिकी डील पाकिस्तान और रूस को करीब ला रही है?
रूस भारत का सच्चा दोस्त है और एक समय पर वह भारत के लिए अमेरिका के आगे आकर खड़ा हो गया, जहां अमेरिका और पाकिस्तान को मुंह की खानी पड़ी थी, लेकिन अब रूस का पाक के प्रति ऐसा प्रेम व्यवहार क्या कुछ अपने भीतर छुपाए हुए है या एक सामान्य नजरिया है किसी देश में हुए हमले में मदद की पेशकश करने का। लेकिन क्या ऐसा अमेरिका और भारत के बीच हुई डील के दौरान कुछ सवाल खड़े करता है? जैसे अमेरिका भी बार बार कह रहा है कि अब भारत रूस से तेल नहीं खरीदेगा और पाक भारत का दुश्मन है तो क्या ये कड़ियां एक दूसरे से जुड़ी हुई हैं?
ऐसा देखने में आ रहा है कि अमेरिका की तरफ भारत का झुकाव साफ तौर पर रूस-पाकिस्तान के बीच दोस्ती के लिए एक रणनीतिक मौका बना रहा है। जैसे ही नई दिल्ली फरवरी 2026 के ट्रेड डील को पक्का करेगा, जिसमें 500 बिलियन डॉलर के अमेरिकी इंपोर्ट और रूसी कच्चे तेल से दूरी बनाने की बात है तो मॉस्को अपने सबसे भरोसेमंद दक्षिण एशियाई पार्टनर को खो देगा, जिससे उसे मजबूरी में इस्लामाबाद की तरफ व्यावहारिक रूप से 'उत्तर की ओर' मुड़ना पड़ेगा।
यह उभरता हुआ 'जरूरत का रिश्ता' इन तीन मुख्य कारणों से
एनर्जी की कमी: जब भारत को बड़े पैमाने पर रूसी तेल खरीदने पर अमेरिका की निगरानी और संभावित 'स्नैपबैक' टैरिफ का सामना करना पड़ रहा है, तो मॉस्को को नए बाजार खोजने होंगे। पाकिस्तान, जिसे रियायती ईंधन की सख्त जरूरत है, पहले ही कई MoU साइन कर चुका है और रूसी कच्चे तेल और LNG के लिए लॉन्ग-टर्म फ्रेमवर्क का टेस्ट कर रहा है।
सुरक्षा का संतुलन: जैसे-जैसे अमेरिका और भारत AI और रक्षा के लिए अपने 'TRUST' फ्रेमवर्क को मजबूत कर रहे हैं, पाकिस्तान खुद को ज्यादा अकेला महसूस कर रहा है। रूस आतंकवाद विरोधी समर्थन और इंटेलिजेंस शेयरिंग की पेशकश करके इस कमी को पूरा कर रहा है, और IS-K हिंसा के बाद खुद को एक क्षेत्रीय स्टेबलाइजर के रूप में पेश कर रहा है।
'संतुलन बनाने वाली' रणनीति: मॉस्को इस्लामाबाद के साथ अपने संबंधों का इस्तेमाल नई दिल्ली को यह याद दिलाने के लिए कर रहा है कि उसकी रणनीतिक वफादारी का एक विकल्प है। ऐसे में वह दक्षिण एशिया में एक नया एक्सिस बना रहा है, जहां रूस और पाकिस्तान वाशिंगटन-दिल्ली साझेदारी के मुकाबले एनर्जी, रेल कनेक्टिविटी और यूरेशियन स्थिरता पर एक साथ आएंगे।
