एलन मस्क के स्टारलिंक को मार गिराएंगे पुतिन? NATO के खुफिया एजेंसी को शक- हथियार बना रहा रूस
- Edited by: शिशुपाल कुमार
- Updated Dec 22, 2025, 01:54 PM IST
नाटो के दो देशों की खुफिया एजेंसियों को संदेह है कि रूस, एलन मस्क की स्टारलिंक उपग्रह प्रणाली को निशाना बनाने के लिए नया “जोन-इफेक्ट” हथियार विकसित कर रहा है, जो कक्षा में धातु कण फैलाकर कई उपग्रहों को निष्क्रिय कर सकता है।
स्टारलिंक सैटेलाइट को अंतरिक्ष में ले जाता हुआ फाल्कन 9 रॉकेट (फोटो-@SpaceX)
नाटो के दो सदस्य देशों की खुफिया एजेंसियों को आशंका है कि रूस, एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स के स्टारलिंक उपग्रह नेटवर्क को निशाना बनाने के लिए एक खतरनाक और नया हथियार विकसित कर रहा है। माना जा रहा है कि इस कदम के पीछे रूस का उद्देश्य अंतरिक्ष के क्षेत्र में पश्चिमी देशों की बढ़त को चुनौती देना है, जिसने यूक्रेन को युद्ध के दौरान बड़ी तकनीकी मदद दी है।
गोपनीय दस्तावेज में जिक्र
एजेंसियों द्वारा तैयार गोपनीय दस्तावेज, जिन्हें ‘एसोसिएटेड प्रेस’ ने देखा है, के अनुसार रूस कथित “जोन-इफेक्ट” नामक हथियार पर काम कर रहा है। यह हथियार स्टारलिंक की कक्षा में सैकड़ों हजारों उच्च-घनत्व वाले धातु कणों (छर्रों) को फैलाने में सक्षम हो सकता है। इससे एक साथ कई उपग्रह निष्क्रिय होने का खतरा बढ़ जाएगा। साथ ही यह अंतरिक्ष के अन्य कक्षीय प्रणालियों के लिए भी विनाशकारी साबित हो सकता है।
रूस-चीन को भी खतरा?
हालांकि कई विश्लेषक इस संभावना पर सवाल उठा रहे हैं। उनका मानना है कि ऐसे किसी हथियार के इस्तेमाल से रूस और उसके सहयोगी चीन को भी नुकसान पहुंच सकता है, क्योंकि दोनों देश भी संचार, रक्षा और निगरानी के लिए हजारों उपग्रहों पर निर्भर हैं। ऐसे जोखिम रूस के कदमों को सीमित कर सकते हैं। उधर कनाडा की सेना के अंतरिक्ष प्रभाग के कमांडर ब्रिगेडियर जनरल क्रिस्टोफर हॉर्नर ने कहा कि इसे पूरी तरह नकारा नहीं जा सकता। उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिका पहले ही रूस पर अंतरिक्ष में परमाणु आधारित हथियार विकसित करने के आरोप लगा चुका है, ऐसे में खतरा वास्तविक भी हो सकता है।
रूस ने साधी चुप्पी
क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने इस मुद्दे पर ‘एपी’ के सवालों का जवाब नहीं दिया। जबकि रूस अतीत में संयुक्त राष्ट्र से अंतरिक्ष में परमाणु हथियारों की तैनाती रोकने की अपील कर चुका है। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी यह दावा किया था कि मॉस्को का ऐसा कोई इरादा नहीं है। खुफिया निष्कर्ष बताते हैं कि रूस स्टारलिंक को एक गंभीर सामरिक चुनौती मानता है। यूक्रेनी सेना युद्ध के दौरान स्टारलिंक की हाई-स्पीड इंटरनेट सेवा का उपयोग संचार, हथियार प्रणालियों के नियंत्रण और अन्य सैन्य अभियानों में कर रही है। यही कारण है कि रूस के संभावित कदमों ने अंतरिक्ष सुरक्षा और वैश्विक उपग्रह नेटवर्क के भविष्य पर नई बहस छेड़ दी है।