MiG-31BM और Su-35 जैसे एयरक्राफ्ट के लिए डेवलप की गई R-37M, अभी सबसे लंबी रेंज वाली ऑपरेशनल AAM में से एक है। इसकी अनुमानित रेंज 400 km तक है और स्पीड Mach 6 के करीब है, इसे एयरबोर्न वॉर्निंग और स्नाइपर एयरक्राफ्ट सहित हाई-वैल्यू टारगेट को इंटरसेप्ट करने के लिए बनाया गया है। इसका रडार सीकर और डेटा-लिंक मिड-कोर्स गाइडेंस इसे इलेक्ट्रॉनिक काउंटरमेजर के बावजूद भी असरदार बनाए रखता है।
चीन की PL-15 को पश्चिमी हवाई ताकत को चुनौती देने के लिए डिजाइन किया गया है, जिसकी रिपोर्टेड रेंज 300 km से ज्यादा है। एक डुअल-पल्स मोटर और एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड एरे (AESA) सीकर इसे जैमिंग और बचने के पैंतरेबाजी से बचाता है। इसे J-20 और J-16 जैसे प्लेटफॉर्म पर तैनात किया गया है और इसे चीन के एंटी-एयर सुपीरियरिटी का मेन पार्ट माना जाता है।
AIM-260 जॉइंट एडवांस्ड टैक्टिकल मिसाइल, तेजी से हो रहे एशियाई मिसाइल डेवलपमेंट का अमेरिकी जवाब है। हालांकि इसकी डिटेल्स अभी भी क्लासिफाइड हैं, लेकिन बताया जाता है कि इसकी रेंज AIM-120D से ज्यादा है, जो 200 km से भी अधिक है। JATM को खास तौर पर भीड़भाड़ वाले एयरस्पेस में स्टील्थ एयरक्राफ्ट और बहुत ज्यादा मैन्यूवरेबल फाइटर जेट्स का मुकाबला करने के लिए डिजाइन किया गया है।
अभी भी दुनिया की सबसे सफल बियॉन्ड-विज़ुअल-रेंज मिसाइल मानी जाने वाली AIM-120D की रेंज लगभग 180 km है और इसे कई संघर्षों में प्रभावी ढंग से इस्तेमाल किया गया है। GPS-एडेड गाइडेंस और टू-वे डेटा लिंक क्षमता मिड-कोर्स अपडेट की अनुमति देती है, जिससे टारगेट के दिशा बदलने पर भी ट्रैक बना रहता है।
MBDA द्वारा डेवलप किया गया मेटियोर सिर्फ अपनी रेंज (लगभग 150 km) की वजह से ही नहीं, बल्कि रैमजेट प्रोपल्शन सिस्टम से बने अपने बहुत बड़े 'नो-एस्केप जोन' की वजह से भी खास है। यह मिसाइल लड़ाई के आखिरी फेज तक एनर्जी बनाए रख सकती है, जिससे टारगेट को बचने का बहुत कम मौका मिलता है।
DRDO द्वारा विकसित भारत की एस्ट्रा Mk-2 की रेंज लगभग 160 किमी है और यह लॉन्च से पहले लॉक-ऑन और लॉन्च के बाद लॉक-ऑन क्षमता को सपोर्ट करती है। Su-30MKI, LCA तेजस और MiG-29 प्लेटफॉर्म पर इंटीग्रेशन चल रहा है। एक लंबी रेंज वाली ये एस्ट्रा Mk-3 डुअल-पल्स रॉकेट मोटर से चलती है और अभी डेवलपमेंट में है।
हालांकि यह इस लिस्ट में सबसे लंबी दूरी की मिसाइल नहीं है, लेकिन पाइथन-5 को विज़ुअल रेंज में सबसे खतरनाक मिसाइलों में से एक माना जाता है। इसका इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सीकर बहुत भीड़भाड़ वाले माहौल में भी टारगेट की पहचान कर सकता है और इसकी हाई एजिलिटी इसे बहुत ज्यादा ऑफ-बोरसाइट एंगल से फायर करने पर भी टारगेट को सफलतापूर्वक हिट करने में मदद करती है।