पितृ पक्ष का समय अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा प्रकट करने का माना जाता है। इस दौरान लोग अपने परिवार के दिवंगत सदस्यों के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान जैसे धार्मिक अनुष्ठान करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस अवधि में पितरों का स्मरण, तर्पण, पिंडदान और दान करने से उन्हें संतुष्टि मिलती है।
तर्पण के माध्यम से पूर्वजों का स्मरण किया जाता है और उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त की जाती है। तर्पण में जल अर्पित किया जाता है। जल के साथ काले तिल और अन्य सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है।
श्राद्ध करते समय संबंधित पूर्वज की मृत्यु तिथि यानी तिथि का विशेष ध्यान रखें। अगर किसी व्यक्ति की मृत्यु की तिथि मालूम है, तो उसी तिथि के अनुसार श्राद्ध करने की परंपरा है।
पितरों का तर्पण, श्राद्ध और दान प्रमुख हैं। इसके अलावा जरूरतमंद लोगों को भोजन कराना, गाय, कुत्ते और पक्षियों को भोजन देना भी कई परंपराओं में शुभ माना गया है। पितृ पक्ष में केवल कर्मकांड पर ध्यान देने के बजाय अपने जीवित माता-पिता और परिवार के बुजुर्गों का सम्मान भी किया जाए।
किसी विशेष कर्मकांड के लिए परिवार की परंपरा या योग्य आचार्य की सलाह लें। पितृ पक्ष के दौरान सात्विक भोजन करने, धार्मिक कार्यों में मन लगाने और जरूरतमंदों की मदद करने की परंपरा है।
धार्मिक मान्यताओं में कौए को पितरों से जोड़कर देखा जाता है। पितृ पक्ष में कौए को भोजन कराने की परंपरा भी काफी प्रचलित है। इसलिए श्राद्ध के भोजन का एक हिस्सा कौए के लिए निकालकर उसे खिलाया जाता है।