Putin Praise India: रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने एक बार फिर भारत की जमकर तारीफ की। वहीं, उन्होंने भारत की स्वतंत्र विदेश नीति की सराहना की है। सेंट पीटर्सबर्ग इंटरनेशनल इकोनॉमिक फोरम के मुख्य सत्र में पतिन ने कहा कि भारत ने अपने इतिहास में कभी की किसी विदेशी ताकत के हुक्म या दबाव को स्वीकार नहीं किया है।
पुतिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लीडरशिप की जमकर तारीफ की है। पुतिन ने साफ शब्दों में कहा कि भारत हमेशा एक संप्रभु राष्ट्र के रूप में काम करता है और उस पर कोई भी देश अपनी शर्तें नहीं थोप सकता। अमेरिकी दबाव के बीच डोनाल्ड ट्रंप को सीधा संदेश देते हुए कहा,"भारत अपने राष्ट्रीय हितों से संचालित होता है। वह उन उत्पादों को चुनने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है जो उसके लिए सबसे आधुनिक, उपयुक्त और सर्वोत्तम मूल्य-गुणवत्ता (Price-Quality Ratio) वाले हों।"
कोई हमें डिक्टेट नहीं कर सकता कि भारत को क्या न दें: पुतिन
रूस और भारत के रणनीतिक संबंधों पर बोलते हुए पुतिन ने वैश्विक शक्तियों को कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा, "भारत या हमारे किसी भी अन्य भागीदार के साथ हमारा सहयोग किसी राजनीतिक माहौल या दबाव का मोहताज नहीं है। हमें कोई यह निर्देश (Dictate) नहीं दे सकता कि हम भारत को क्या आपूर्ति न करें। कोई भी हमें डिक्टेट नहीं कर सकता और न ही कोई ऐसा करने की कोशिश करेगा। हम अपने भागीदारों, विशेषकर भारत जैसे देशों को दिए गए वादों पर हमेशा कायम रहेंगे।"
भारतीय प्रतिभा और ऐतिहासिक 'भाईचारे' का जिक्र
पुतिन ने साल 1947 से स्थापित भारत-रूस राजनयिक संबंधों को याद करते हुए इन्हें "बेहद अच्छे, भरोसेमंद और हर मायने में भाईचारे वाले संबंध" बताया। भारतीयों की तारीफ करते हुए रूसी राष्ट्रपति ने कहा, "हम जानते हैं कि भारत के लोग कितने प्रतिभाशाली और शिक्षित हैं। कोडिंग (IT) और अन्य क्षेत्रों में भारतीयों की क्षमताएं दुनिया भर में मशहूर हैं।"
संकट के समय भारत को रूस का साथ
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज (Strait of Hormuz) में चल रहे घटनाक्रमों के कारण पैदा हुए ऊर्जा संकट का जिक्र करते हुए पुतिन ने कहा कि इसके चलते पीएम मोदी को निजी कारों के उपयोग और लंबी दूरी की यात्राओं पर कुछ प्रतिबंध लगाने पड़े थे।पुतिन ने कहा, "मुझे लगता है कि हमारी कंपनियों और भारतीय समकक्षों ने आपसी सहयोग का रास्ता चुनकर बिल्कुल सही कदम उठाया। संकट के इस समय में हम भारत की मदद के लिए हाथ बढ़ा रहे हैं और भारतीय बाजार व सामान्य रूप से पूरे एशिया में तेल और गैस की आपूर्ति बढ़ा रहे हैं। इसके साथ ही हम अपनी तकनीकी समाधान (Technological Solutions) भी भारत के साथ साझा कर रहे हैं।"
