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पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर से लंदन तक प्रदर्शन; रावलकोट में रात भर गूंजती रही पाकिस्तानी सेना के खिलाफ आवाज

Pakistan Army Crackdown PoJK: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoJK) के रावलकोट में पाकिस्तानी सेना के दमन के खिलाफ रात भर हिंसक प्रदर्शन हुए, जिसमें दो और लोगों की मौत हो गई है।

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पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर से लंदन तक प्रदर्शन; रावलकोट में रात भर गूंजती रही पाकिस्तानी सेना के खिलाफ आवाज

PoJK Protests Rawalakot Violence: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoJK) में पाकिस्तानी सेना और स्थानीय प्रशासन के दमनकारी रवैए के खिलाफ कश्मीरी जनता का गुस्सा अब पूरी तरह से फूट पड़ा है। रावलकोट में स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो गई है, जहां रात भर हजारों की संख्या में स्थानीय कश्मीरियों ने सड़कों पर उतरकर पाकिस्तानी हुकूमत और सेना के खिलाफ उग्र प्रदर्शन किया। इस दौरान हुई ताजा हिंसक झड़पों में दो और प्रदर्शनकारियों की मौत की पुष्टि हुई है, जिसके बाद इलाके में तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है।

इस दमन और मानवाधिकारों के उल्लंघन की गूंज अब केवल PoJK तक सीमित नहीं है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्रिटेन की राजधानी लंदन की सड़कों तक भी इसकी भारी गूंज सुनाई दे रही है।

रावलकोट में रात भर प्रदर्शन और हिंसा: दो और की मौत

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, 'अवामी एक्शन कमेटी' के बैनर तले कश्मीरी जनता बुनियादी अधिकारों, भारी टैक्स, आटे की किल्लत और बिजली के बढ़े हुए दामों के खिलाफ शांतिपूर्ण आंदोलन कर रही थी। लेकिन पुलिस और अर्धसैनिक बलों (रेंजर्स) द्वारा किए गए लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोलों के इस्तेमाल ने इस आंदोलन को हिंसक बना दिया।

रावलकोट में रात भर चले इस प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच सीधी भिड़ंत हुई। ताजा हिंसा में गोली लगने और गंभीर रूप से घायल होने के कारण दो और स्थानीय कश्मीरियों की जान चली गई है। इससे पहले पिछले आठ दिनों में सुरक्षाबलों की फायरिंग में 53 लोगों के मारे जाने का दावा जेकेजेएएसी ने किया था।

लंदन में हजारों ब्रिटिश कश्मीरी सड़कों पर उतरे

लंदन में हजारों 'ब्रिटिश कश्मीरी' पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (Pok) में सुरक्षा बलों की कार्रवाई के विरोध में मार्च निकाले के लिए 'पार्लियामेंट स्क्वेयर' में इकट्ठा हुए। भीड़ ने बैनर लहराए और पाकिस्तानी बलों के खिलाफ क्रांति के समर्थन में नारे लगाए। प्रदर्शनकारियों ने 'ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी' (जेएएसी) के समर्थन में मानवाधिकारों की बहाली तथा क्षेत्र में फैलाए जा रहे आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तानी सेना वापस जाओ जैसे नारे भी लगाए। उन्होंने पीओके में आम नागरिकों की कथित हत्याओं, महिलाओं के उत्पीड़न और शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों के खिलाफ बल प्रयोग पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की।

प्रदर्शनकारियों ने न्याय की मांग करते हुए नारे लगाए और क्षेत्र में हाल में सामने आई अशांति की घटनाओं को उजागर करने के लिए तख्तियां लहराईं। यह विरोध मार्च इस सप्ताह की शुरुआत में ब्रैडफोर्ड स्थित पाकिस्तानी वाणिज्य दूतावास के बाहर हुए इसी तरह के प्रदर्शनों के बाद निकाला गया।

पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग ने जताई चिंता

पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग (एचआरसीपी) समेत कई संगठनों ने तथाकथित क्षेत्रीय सरकार के उस फैसले पर गहरी चिंता जताई है, जिसके तहत संजेएएसी को आतंकवाद-रोधी कानूनों के अंतर्गत प्रतिबंधित कर दिया गया है। पीओके के रावलाकोट में पुलिस और जेएएसी कार्यकर्ताओं के बीच हाल में हुई झड़पों में कई नागरिक और पुलिसकर्मी मारे गए हैं। वहीं, भारत का स्पष्ट मत है कि पाकिस्तान ने केंद्रशासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के कुछ हिस्से पर अवैध कब्जा कर रखा है।

Nitin Arora
नितिन अरोड़ाauthor

नितिन अरोड़ा टाइम्स नाउ नवभारत में न्यूज डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया में उनका 6 वर्षों का अनुभव है। वह राजनीति, देश–विदेश की बड़ी घटनाओं और समसामयिक मुद्दों को गहराई से समझकर उन्हें सटीक और सरल भाषा में प्रस्तुत करने में माहिर हैं। उन्होंने अपने करियर में लगातार करंट अफेयर्स, पॉलिटिकल डेवलपमेंट्स, डिप्लोमैटिक घटनाएं और डिफेंस सेक्टर से जुड़े विषयों पर प्रभावशाली कॉन्टेंट तैयार किया है और अबतक 6 हजार से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं। विभिन्न टॉपिक्स पर एक्सप्लेनेर, डेटा-आधारित रिपोर्ट्स और विश्लेषणात्मक कॉपी लिखने में उनकी मजबूत पकड़ है।

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