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Pakistan: इमरान खान को 14 साल कैद की सजा, जानें किस मामले पाकिस्तान की अदालत ने सुनाया फैसला

Pakistan News: पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को पाकिस्तानी अदालत से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने इमरान को 14 साल की सजा सुनाई है। आपको बताते हैं कि आखिर किस मामले में पूर्व पाकिस्तानी पीएम को सजा सुनाई गई है।

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इमरान खान

World News: पाकिस्तान की एक अदालत ने पूर्व पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान (Imran Khan) को तगड़ा झटका दिया है। भूमि भ्रष्टाचार के एक मामले में इमरान खान को सजा सुना दी गई है। अदालत ने इस मामले में इमरान खान को 14 साल की जेल की सजा मुकर्रर की है।

पाकिस्तान की अदालत ने इमरान खान को 14 साल कैद की सजा सुनाई

स्थानीय प्रसारक एआरवाई न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, एक पाकिस्तानी अदालत ने शुक्रवार को भूमि भ्रष्टाचार के एक मामले में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को 14 साल कैद की सजा सुनाई। खान द्वारा सामना किए गए वित्तीय गलत कामों के मामले में सबसे बड़े मामले में फैसला रावलपिंडी के गैरीसन शहर की एक जेल में भ्रष्टाचार विरोधी अदालत द्वारा सुनाया गया, जहां खान अगस्त 2023 से जेल में हैं।

जेल से बाहर आने को लेकर एक दिन पहले आया था इमरान का रिएक्शन

इमरान खान ने एक दिन पहले ही अपने बयान में कहा था कि वह नवाज शरीफ नहीं है कि जेल से बाहर आने के लिए सेना से समझौता कर लेंगे। पाकिस्तान के तीन बार प्रधानमंत्री रहे शरीफ दो बार स्व-निर्वासित हो चुके हैं। पहली बार वह 2000 की शुरुआत में सैन्य शासक जनरल परवेज मुशर्रफ और दूसरी बार 2019 में सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा के साथ समझौते के तहत स्व-निर्वासित हुए थे। खान ने बुधवार के ‘एक्स’ पर लिखा था, “मैं यह स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि चाहे कोई भी हथकंडा अपनाया जाए, मैं कोई सौदा नहीं करूंगा। मैं नवाज शरीफ नहीं हूं जो भ्रष्टाचार से कमाए गए अपने अरबों डॉलर बचाना चाहते हैं। मैं पाकिस्तान में रहा हूं और यहीं मरूंगा... मैं हमेशा अपने देश के लिए खड़ा रहूंगा।”

खान की पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) पार्टी और सेना का समर्थन प्राप्त शहबाज शरीफ की सरकार के बीच जारी बातचीत के बीच खान ने यह टिप्पणी की है। अनुमान है कि वह वार्ता सफल होने पर जेल से बाहर आ सकते हैं। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ नवाज शरीफ के छोटे भाई हैं। खान कई मामलों में अगस्त 2023 से जेल में हैं।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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