पाकिस्तान के सिंध प्रांत से हिंदू लड़की के साथ दरिंदगी की एक भयावह कहानी सामने आई है। जहां एक मुस्लिम बुजुर्ग से शादी करने के लिए एक हिंदू लड़की को न सिर्फ अगवा किया गया, बल्कि जबरन उसका धर्म परिवर्तन भी कराया गया। अब उमरकोट की एक अदालत ने उस हिंदू लड़की को उसके परिवार के पास वापस भेजने का आदेश दिया है।
पीड़िता ने कोर्ट में बयां किया दर्द
पीटीआई के अनुसार पीड़िता को मीरपुरखास जिले के कुनरी कस्बे से अगवा किया गया था। हिंदू कार्यकर्ता शिव काछी, जो पीड़िता के माता-पिता की ओर से इस मामले की पैरवी कर रहे थे, ने बताया कि अदालत के आदेश के बाद लड़की को शनिवार को उसके परिवार से मिलवाया गया। कई सुनवाइयों के बाद अदालत ने पहले पीड़िता को एक ‘सुरक्षित घर’ में भेजा था ताकि वह बिना किसी दबाव के अपने बयान दे सके। 10 अक्टूबर को मीरपुरखास की सत्र अदालत में पेशी के दौरान पीड़िता ने खुद न्यायाधीश को बताया था कि उसका अपहरण हुआ, जबरन धर्म परिवर्तन कराया गया और उसकी इच्छा के विरुद्ध निकाह कराया गया।
ऐसे कई मामले आ चुके हैं सामने
स्थानीय अधिवक्ता चंदर कोहली ने बताया कि पीड़िता का मामला सिंध में हिंदू समुदाय के सामने आने वाले लगातार संकट की एक मिसाल है। उन्होंने कहा, “यह कोई अकेला मामला नहीं है। सिंध में हिंदू लड़कियों के अपहरण, जबरन धर्मांतरण और निकाह की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। यह हमारे समुदाय को भयभीत कर रहा है।” कोहली ने यह भी कहा कि अधिकतर मामलों में आरोपी लोग फर्जी दस्तावेजों के सहारे यह साबित करने की कोशिश करते हैं कि लड़की ने अपनी इच्छा से शादी की है। लेकिन असलियत यह है कि ये लड़कियां प्रायः गरीब परिवारों से होती हैं, जिनके पास न कानूनी सहायता होती है और न ही पर्याप्त जानकारी। उन्होंने बताया कि पीड़िता का मामला उन “कुछ सौभाग्यशाली मामलों” में से एक है, जिनमें पीड़िता को न्याय मिल पाया। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने भी अदालत के इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह कदम सिंध में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय की आवाज को ताकत देगा। इसी तरह का एक और मामला हाल ही में सामने आया था, जिसमें 15 वर्षीय हिंदू लड़की ने अदालत से अपने परिवार के पास लौटने की अनुमति मांगी थी। उस लड़की के साथ भी अपहरण, बलात्कार और जबरन धर्मांतरण के बाद निकाह कराया गया था।
