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अमेरिका में 'ब्रैंड इमेज' चमकाएगा पाकिस्तान! पूर्व अमेरिकी सांसद की फर्म से की डील, हर महीने देगा 50000 डॉलर

Pakistan Hires US Lobbying Firm: अमेरिका-ईरान युद्ध में मध्यस्थता के बाद पाकिस्तान ने वाशिंगटन में अपनी छवि सुधारने और 'प्रमुख गैर-नाटो सहयोगी' का दर्जा बचाने के लिए पूर्व अमेरिकी सांसद टॉम ग्रेव्स की लॉबिंग फर्म के साथ 50,000 डॉलर प्रति माह का दो साल का करार किया है।

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आतंकवाद के आरोपों के बीच पाकिस्तान का अमेरिकी संसद में बड़ा दांव

Pakistan Hires US Lobbying Firm: आतंकवाद और सुरक्षा के मोर्चे पर वैश्विक दबाव झेल रहे पाकिस्तान ने अमेरिका के राजनीतिक और रणनीतिक हलकों में अपनी साख मजबूत करने के लिए वाशिंगटन की एक लॉबिंग फर्म के साथ हाथ मिलाया है। अमेरिका में मौजूद पाकिस्तानी दूतावास ने इस महीने की शुरुआत में पूर्व रिपब्लिकन कांग्रेसी टॉम ग्रेव्स के नेतृत्व वाले 'इरविन ग्रेव्स स्ट्रैटेजी ग्रुप' के साथ एक आधिकारिक समझौता किया है। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य अमेरिका के भीतर पाकिस्तान के राजनयिक, आर्थिक और रणनीतिक हितों को आगे बढ़ाना और वाशिंगटन में अपनी धूमिल हो चुकी छवि को 'ब्रैंड न्यू' लुक देना है।

2 साल का कॉन्ट्रैक्ट, हर महीने देगा 50,000 डॉलर

अमेरिकी न्याय विभाग में दर्ज किए गए आधिकारिक समझौते के दस्तावेजों के मुताबिक, पाकिस्तान और इस लॉबिंग फर्म के बीच यह करार दो साल के लिए हुआ है। इसके लिए कंगाली के दौर से गुजर रहा पाकिस्तान इस अमेरिकी फर्म को हर महीने 50,000 अमेरिकी डॉलर (भारतीय रुपयों में करीब 47 लाख रुपये से अधिक) का भुगतान करेगा।

यह फर्म अमेरिकी संसद, कार्यकारी शाखा की एजेंसियों, नीतिगत संस्थानों (थिंक टैंक), उद्योग जगत के हितधारकों और वाशिंगटन के नीति-नियंत्रण वातावरण में सक्रिय अन्य प्रमुख चेहरों के साथ पाकिस्तानी मिशन का संपर्क और पैठ मजबूत कराएगी।

लॉबिंग फर्म को मिला है ये 'स्पेशल टास्क'

पाकिस्तान ने इस फर्म को बेहद संवेदनशील और रणनीतिक मोर्चों पर काम करने की जिम्मेदारी सौंपी है। फर्म को अमेरिकी कांग्रेस में उन विधायी या नीतिगत पहलों पर नजर रखने और उन्हें रोकने का काम सौंपा गया है, जो अमेरिका के 'प्रमुख गैर-नाटो सहयोगी' के रूप में पाकिस्तान के दर्जे को नुकसान पहुंचा सकती हैं। इसके अलावा, यह फर्म पाकिस्तान पर लगने वाले संभावित प्रतिबंधों, मानवाधिकारों के उल्लंघन के आरोपों और सुरक्षा सहायता से जुड़े घटनाक्रमों की लगातार निगरानी करेगी और अमेरिकी सांसदों को पाकिस्तान के पक्ष में ब्रीफ करेगी। फर्म पाकिस्तान को प्रमुख अमेरिकी मीडिया घरानों के एडिटोरियल बोर्ड और ओपिनियन सेक्शन तक पहुंच बनाने में मदद करेगी, ताकि अमेरिकी मीडिया में पाकिस्तान के रणनीतिक महत्व को सकारात्मक रूप से पेश किया जा सके।

अमेरिकी सांसदों के लिए 'पाकिस्तान टूर' और दावतें

वाशिंगटन के प्रभावशाली लोगों को अपने पाले में लाने के लिए यह फर्म वाशिंगटन स्थित पाकिस्तानी दूतावास और राजदूत के आवास पर विशेष रिसेप्शन, गोलमेज सम्मेलन और बंद कमरे की नीतिगत चर्चाओं का आयोजन करेगी। इतना ही नहीं, अमेरिकी सांसदों और उनके स्टाफ को पाकिस्तान की जमीनी हकीकत दिखाने और उन्हें प्रभावित करने के लिए 'पाकिस्तान दौरों' की व्यवस्था भी यही फर्म करेगी और सांसदों के दौरे पर जाने से पहले उन्हें ब्रीफिंग देगी।

अमेरिका-ईरान युद्ध में मध्यस्थता से बढ़ी नजदीकियां, लेकिन खतरा बरकरार

यह कदम ऐसे समय में आया है जब हाल के महीनों में पाकिस्तान और अमेरिका के रिश्तों में थोड़ी कड़वाहट कम हुई है। पाकिस्तान ने हाल ही में अमेरिका-ईरान युद्ध को शांत कराने के लिए इस्लामाबाद में शांति वार्ता की मेजबानी की थी और एक प्रमुख मध्यस्थ के रूप में उभरा था। इसी के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वॉशिंगटन में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की मेजबानी भी की थी। हालांकि, इस नई नजदीकी के बावजूद पाकिस्तान का डर कम नहीं हुआ है। मार्च 2026 में आई एक अमेरिकी कांग्रेसनल रिपोर्ट में साफ कहा गया था कि वर्षों के सैन्य अभियानों के बावजूद पाकिस्तान की धरती से अब भी एक दर्जन से अधिक आतंकवादी संगठन सक्रिय हैं और पाकिस्तान उन्हें रोकने में नाकाम रहा है। इसी डर और नकारात्मक छवि को बदलने के लिए अब पाकिस्तान पानी की तरह पैसा बहाकर अमेरिकी सांसदों की लॉबिंग का सहारा ले रहा है।

Nishant Tiwari
निशांत तिवारीauthor

निशांत तिवारी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी टीम में कॉपी एडिटर हैं। शहरों से जुड़ी खबरों, स्थानीय मुद्दों और नागरिक सरोकार को समझने की उनकी गहरी दृष्टि उन्हें इस बीट का एक भरोसेमंद और प्रभावी कंटेंट राइटर बनाती है। वे जटिल लोकल इश्यूज को सहज, स्पष्ट और असरदार अंदाज में पेश करने में दक्ष हैं और अबतक 2,000 से अधिक न्यूज रिपोर्ट लिख चुके हैं। उनकी लेखन शैली शहर की नब्ज पकड़ते हुए ऐसे कंटेंट पर केंद्रित रहती है, जो सीधे पाठकों के जीवन और उनकी रोजमर्रा की चिंताओं से जुड़ा होता है।

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