Pakistan News: पाकिस्तान दिवालिया होने की कगार पर है। महंगाई बढ़ती जा रही है। आटा-दाल के भाव आसमान छू रहे हैं। जनता भूख से तड़प रही है। सरकार का खजाना खाली हो रहा है। कर्मचारियों को देने के लिए सैलरी भी नहीं है। इसके बावजूद कंगाल पाकिस्तान को चीन की चिंता सता रही है। और चीन के हित साधने के लिए पाकिस्तान की हुकूमत कुछ भी करने को तैयार है।
खबर है कि पाकिस्तान की सरकार ने सशस्त्र बलों के लिए 45 अरब रुपये का अतिरिक्त बजट उपलब्ध कराया है। इस बजट से नकदी की कमी से जूझ रहे देश में चीन के वाणिज्यिक हितों की रक्षा की जाएगी। साथ ही अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर बाड़ लगाने का प्रबंधन करने की चीन की क्षमता को मजबूत किया जाएगा। द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की खबर के अनुसार, यह निर्णय गुरुवार को कैबिनेट की आर्थिक समन्वय समिति (ईसीसी) की बैठक में लिया गया, जिसकी अध्यक्षता वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब ने की।
कहां खर्च होंगे 45 अरब रुपये
अखबार ने कहा कि 45 अरब रुपये में से 35.4 अरब रुपये सेना को और 9.5 अरब रुपये नौसेना को विभिन्न उद्देश्यों के लिए दिए जाएंगे। ईसीसी ने चालू वित्त वर्ष के दौरान रक्षा सेवाओं की पहले से स्वीकृत परियोजनाओं के लिए 45 अरब रुपये के तकनीकी अनुपूरक अनुदान के लिए रक्षा प्रभाग द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव पर विचार किया और उसे मंजूरी दी। जून में बजट की मंजूरी के बाद सशस्त्र बलों के लिए स्वीकृत यह दूसरा बड़ा अनुपूरक अनुदान है। इससे पहले ईसीसी ने ‘ऑपरेशन अज्म-ए-इस्तेहकाम’ के लिए 60 अरब रुपये दिए थे। ये अनुपूरक अनुदान 2127 अरब रुपये के रक्षा बजट के अतिरिक्त है।
चीनियों की सुरक्षा के लिए बड़ा खर्च कर रहा पाकिस्तान
पाकिस्तान में आतंकवादी हमलों की बढ़ती संख्या के कारण, चीन ने अपनी सुरक्षा चिंताओं को दूर करने के लिए आतंकवाद विरोधी सहयोग पर एक समझौते पर हस्ताक्षर करने की मांग की है। चीन ने पाकिस्तान में पहले से काम कर रहे अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक संयुक्त कंपनी की स्थापना का भी प्रस्ताव रखा है।
