Iran US Conflict: पश्चिम एशिया में तनाव कम होने का नाम ही नहीं ले रहा है। इस बीच, तेहरान के एक बार फिर अपना रुख स्पष्ट किया। ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालीबाफ ने कहा कि ईरान सही समय पर अपनी पूरी सैन्य ताकत का इस्तेमाल करके करारा प्रहार करेगा और उसके बाद अपनी सैन्य बढ़त को मजबूत करने के लिए कूटनीति का सहारा लेगा।
'...बंद रहेगा होर्मुज'
अमेरिका के साथ लगभग सात महीने से चल रहे युद्ध के बीच संसद को संबोधित करते हुए गालीबाफ ने ईरान के बातचीत के रुख को "पूरी तरह से स्पष्ट, तर्कसंगत और गैर-समझौतावादी" बताया। उन्होंने कहा कि जब तक अमेरिका अपनी सभी प्रतिबद्धताओं को पूरा नहीं करता तब तक होर्मुज स्ट्रेट बंद रहेगा।
गालीबाफ ने कहा, "इसका मतलब है कि नाजुक मोड़ पर हमें दुश्मन को पीछे धकेलना होगा और अपनी पूरी सैन्य क्षमता से करारा प्रहार करना होगा। हालांकि, एक बार जब हम युद्ध के मैदान में महत्वपूर्ण सफलता हासिल कर लेंगे और दुश्मन कमजोरी की स्थिति में आ जाएगा, तब हमें इन फायदों को मजबूत करने के लिए कूटनीति का सहारा लेना चाहिए।''
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उन्होंने आगे कहा, "हमारे संदेश और शर्तें मध्यस्थों के जरिए दूसरे पक्ष तक स्पष्ट रूप से पहुंचा दी गई हैं। दुश्मन भली-भांति जानता है कि धोखेबाजी और एकतरफा शर्तें थोपने का रास्ता बंद हो चुका है। जब तक ये शर्तें पूरी नहीं होतीं, ईरान के वैध अधिकारों को मान्यता नहीं मिलती और अमेरिकी अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा नहीं करते, तब तक पुरानी बातचीत की स्थितियों में लौटने या होर्मुज को फिर से खोलने की कोई संभावना नहीं है।"
गालीबाफ ने कहा कि पश्चिम एशिया में पुरानी अमेरिकी व्यवस्था ध्वस्त हो चुकी है और अब इस क्षेत्र के इस्लामिक देशों को ही एक नई व्यवस्था लागू करनी होगी। यह बयान ऐसे समय में आया है जब तेहरान ने अमेरिका को अपनी सात शर्तें भेजी हैं। ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के प्रमुख मोहसिन रजाई ने बताया कि ईरान ने कतर के जरिए युद्ध समाप्त करने की अपनी शर्तें अमेरिका तक पहुंचा दी हैं और अब उन्हें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की प्रतिक्रिया का इंतजार है।
