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पुतिन के साथ वार्ता के बाद अधिकारियों ने किम की मौजूदगी के सभी 'निशान' मिटाए? WATCH VIDEO

उत्तर कोरियाई अधिकारियों को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ बीजिंग में हुई बातचीत के बाद किम जोंग उन द्वारा इस्तेमाल की गई कुर्सी और मेज को सावधानीपूर्वक साफ करते हुए दिखाया गया है। यह वीडियो काफी वायरल हो रहा है।

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किम की मौजूदगी के निशान हटाते उत्तर कोरियाई अधिकारी (फोटो -ट्वीटर - Russian Market@runews )

एक हालिया वीडियो में उत्तर कोरियाई अधिकारियों को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ बीजिंग में हुई बातचीत के बाद किम जोंग उन द्वारा इस्तेमाल की गई कुर्सी और मेज को सावधानीपूर्वक साफ करते हुए दिखाया गया है। यह वीडियो काफी वायरल हो रहा है जिसमें एक एक चीज को साफ करते हुए दिखाया जा रहा है जिसमें कुर्सियां ,सोफे और प्लेट तक शामिल है।

उत्तर कोरियाई अधिकारियों को किम जोंग उन के रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ बातचीत के दौरान बैठने वाली सीट को पोंछते हुए देखा गया। बुधवार को आए इस वीडियो में दोनों नेताओं के बीजिंग में एक भव्य सैन्य परेड के बाद बातचीत करने के तुरंत बाद, जहाँ चीन ने अपनी बढ़ती राजनयिक ताकत का प्रदर्शन किया।

फुटेज में किम के कर्मचारियों को किम की मौजूदगी के सभी निशानों को मिटाते हुए, उत्तर कोरियाई नेता द्वारा इस्तेमाल की गई हर सतह को साफ़ करते हुए दिखाया गया है। किम द्वारा इस्तेमाल की गई कुर्सी के बैक रेस्ट को पॉलिश किया गया और यहां तक कि कुर्सी के आर्मरेस्ट को भी पोंछा गया। उत्तर कोरियाई अधिकारियों ने साइड टेबल को भी साफ किया। वीडियो में देखा जा सकता है कि पानी पीने का गिलास एक ट्रे पर ले जाया गया।

रूसी पत्रकार ने पोस्ट किया वीडियो

रूसी पत्रकार अलेक्जेंडर युनाशेव ने अपने चैनल युनाशेव लाइव पर वीडियो के साथ लिखा कि बातचीत के बाद, डीपीआरके के प्रमुख के साथ आए कर्मचारियों ने किम की उपस्थिति के सभी निशानों को सावधानीपूर्वक हटाया गया। उन्होंने वह गिलास हटा दिया जिससे उन्होंने पानी पिया था, कुर्सी के आर्मरेस्ट और फर्नीचर के उन हिस्सों को पोंछ दिया जिन्हें कोरियाई नेता ने छुआ था।

साकारात्मक रही पुतिन और किम की बैठक

युनाशेव ने कहा कि इस अजीबोगरीब सफाई के बावजूद बैठक सकारात्मक रही और किम और पुतिन दोनों ने एक साथ चाय पीने से पहले बहुत संतुष्ट होकर विदा ली। विदेशी जानकारों के मुताबिक किम अकेले नहीं हैं जो ऐसा कर रहे हैं। डीएनए की चोरी को रोकने के लिए असाधारण उपाय करने वाले किम एकमात्र विदेशी नेता नहीं हैं।

Sanjeev Dubey
संजीव कुमार दुबेauthor

पत्रकारिता में मेरे सफर की शुरुआत 20 साल पहले हुई। 2002 अक्टूबर में टीवी की रुपहले दुनिया में दाखिल हुआ। शुरुआत टीवी की दुनिया के उस पहलू से हुई जहां हर खबर को उसके मुताबिक आकार दिया जाता है यानी उसे कसा जाता है। सहारा टीवी में मेरे कामकाज की शुरुआत पैकेजिंग से हुई जहां खबरों को अलग-अलग प्रारूपों में गढ़ने का काम होता है। फिर पीसीआर में आउटपुट एडिटर की भूमिका निभाने का मौका मिला जहां तुरंत निर्णय कर खबरों को ब्रेक करने की चुनौती रहती है। न्यूजरूम की गहमागमी के बीच रनडाउन तैयार करने की जिम्मेदारी भी बखूबी निभाई। यहां ब्रेकिंग, हार्ड कोर की खबरों और फीचर्ड प्रोग्रामिंग ने मेरे अनुभव का दायरा तो बढ़ाया ही उसमें गहराई एवं पैनापन भी दिया। 2011 में टेलिविजन न्यूज की दुनिया को अलविदा कहना पड़ा। अक्टूबर 2011 में Zee News की हिंदी वेबसाइट को अपनी अगवुाई में लॉन्च करने का मौका मिला। डिजिटल की दुनिया और टीवी की दुनिया में खबरें परोसने और खबरों को दिखाने का अंदाज बिल्कुल अलग था। मैं उस दौर में दस्तक दे चुका था जब टीवी भी स्मार्टफोन पर देखा जाने लगा था। डिजिटल पर भी ब्रेकिंग थी। अगर टीवी में प्रोग्रामिंग थी तो यहां भी बतौर फीचर, सॉफ्ट स्टोरीज का विशाल संसार था। एक नया मीडियम जो स्मार्टफोन पर बखूबी देखा और समझा जा सकता था। डिजिटल की इस दुनिया में टीवी और अखबार दोनों समाहित थे। यहां काम करते हुए डिजिटल न्यूज मीडिया की बारीकियां तो सीखी हीं। साथ ही जब जी न्यूज से विदाई ली तो उस समय 33 मिलियन यूजर्स के बीच 84 मिलियन पीवीज देखने की अपार खुशियां हासिल हुईं। जी न्यूज में एक लंबी पारी खेलने के बाद जुलाई 2017 में टाइम्स नाउ नेटवर्क से जुड़ने का अवसर मिला। 2017 में ही टाइम्स नाउ की हिंदी वेबसाइट की शुरुआत हुई। यह पहला मौका था जब टाइम्स नाउ की अगुवाई में कोई हिंदी न्यूज वेबसाइट लॉन्च हुई। यहां एक नई और युवा टीम बनी। यह टीम आक्रामक अंदाज में काम करते हुए कम समय में अपनी पहचान बनाई। डिजिटल की दुनिया के बदलते संसार में अब चुनौती पीवीज की नहीं बल्कि यूजर्स की थी, जिन्हें लाना इतना आसान नहीं थी। लेकिन टीम के जज्बे, हौसले ने असाधारण चुनौतियों को भी अपनी मेहनत एवं लगन से उसे सामान्य बनाया। डिजिटल न्यूज की दुनिया में हर पल चुनौतियों के बीच नया कुछ सीखने-समझने और कुछ कर गुजरने की प्रेरणा मिलती है। यह सिलसिला आज भी अनवरत जारी है-

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