क्या मार्को रुबियो से मिले थे अजीत डोभाल? विदेश मंत्रालय ने कर दिया साफ, जानिए क्या कहा
- Edited by: अमित कुमार मंडल
- Updated Feb 5, 2026, 02:54 PM IST
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रेड डील से कुछ महीने पहले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने वाशिंगटन का दौरा किया था और अमेरिका को दो-टूक कह दिया था कि भारत को डराने-धमकाने की कोशिश न की जाए। हालांकि, विदेश मंत्रालय ने इस रिपोर्ट का खंडन किया है।
क्या अमेरिका में हुई थी डोभाल-रुबियो मुलाकात? (AP/PTI)
India US Trade Deal: लंबे इंतजार के बाद भारत-अमेरिका व्यापार समझौता आखिरकार पूरा हो गया। लेकिन इस डील के रास्ते में कई रुकावटें थी और सबसे बड़ी रुकावट थी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके सिपहसालार। इनके बयानों और ट्रंप के टैरिफ ने गाड़ी को पूरी तरह से पटरी से उतार दिया था, लेकिन भारत के सख्त रुख ने आखिरकार ट्रंप को झुकने पर मजबूर कर दिया। ब्लूमबर्ग ने इस डील को लेकर दावा किया कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने मार्को रुबियो से साफ कह दिया था कि भारत किसी भी तरह की धमकी के आगे नहीं झुकेगा। इस सख्त रुख के कारण ही ये डील हो सकी। लेकिन विदेश मंत्रालय ने इसका साफ तौर पर खंडन कर दिया है।
विदेश मंत्रालय ने किया खंडन
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पिछले साल राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के बीच हुई मुलाकात की खबरों के संबंध में मीडिया के एक प्रश्न का उत्तर देते हुए कहा, उस रिपोर्ट का कोई आधार नहीं है। ऐसी कोई बैठक या मुलाकात नहीं हुई।
अमेरिका गए थे अजीत डोभाल, रुबियो को सुनाई थी खरी-खरी - रिपोर्ट
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रेड डील से कुछ महीने पहले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने वाशिंगटन का दौरा किया था और अमेरिका को दो-टूक कह दिया था कि भारत को डराने-धमकाने की कोशिश न की जाए। यहां उन्होंने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से साफ-साफ कहा कि वह दोनों देशों के बीच की कटुता को पीछे छोड़कर व्यापार समझौते पर बातचीत फिर से शुरू करना चाहते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, डोभाल ने रुबियो से यह भी कहा कि भारत अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और उनके शीर्ष सहयोगियों के दबाव में नहीं आएगा। ब्लूमबर्ग के अनुसार, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार डोभाल ने रुबियो से यह भी कहा कि भारत ट्रंप का कार्यकाल समाप्त होने तक इंतजार करने को तैयार है, लेकिन चाहता है कि अमेरिकी प्रशासन अपनी सार्वजनिक आलोचना कम करे ताकि संबंधों को फिर से पटरी पर लाया जा सके। बता दें कि ट्रंप के मंत्री हर मंच पर भारत को निशाना बना रहे थे और अपमानजनक बातें कह रहे थे।
मोदी-पुतिन-जिनपिंग मीटिंग से घबराए ट्रंप
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, यह बैठक कथित तौर पर सितंबर की शुरुआत में हुई थी। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के शी जिनपिंग के साथ वार्ता करने के कुछ ही समय बाद ही यह घटनाक्रम हुआ। यानी इन तीन बड़े नेताओं की बैठक ने ट्रंप के माथे पर शिकन ला दी थी। भारत के सख्त रुख ने ट्रंप को भी सोचने पर मजबूर कर दिया। उधर, भारत-ईयू ट्रेड डील ने भी अमेरिका और ट्रंप को दबाव में ला दिया था।
सोमवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की कि भारत और अमेरिका के बीच एक व्यापार समझौता हो गया है। ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में, अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि अमेरिकी टैरिफ कम किए जाएंगे और दावा किया कि भारत रूसी तेल की खरीद बंद कर देगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस घोषणा का स्वागत किया और 'मेड इन इंडिया' उत्पादों पर शुल्क कम करने के लिए ट्रंप को धन्यवाद दिया।
पीएम मोदी ने भी की डील की तारीफ
हालांकि पीएम मोदी के पोस्ट में टैरिफ राहत की पुष्टि की गई, लेकिन इसमें रूसी तेल खरीद या अमेरिकी वस्तुओं पर शून्य टैरिफ से संबंधित किसी व्यापार समझौते या प्रतिबद्धताओं का स्पष्ट रूप से जिक्र नहीं किया गया। एक्स पर एक पोस्ट में, प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, जब दो बड़ी अर्थव्यवस्थाएं और दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र एक साथ काम करते हैं, तो इससे हमारे लोगों को लाभ होता है और पारस्परिक रूप से लाभकारी सहयोग के अपार अवसर खुलते हैं। वैश्विक शांति, स्थिरता और समृद्धि के लिए राष्ट्रपति ट्रंप का नेतृत्व महत्वपूर्ण है। भारत शांति के लिए उनके प्रयासों का पूरी तरह से समर्थन करता है। मैं अपनी साझेदारी को अभूतपूर्व ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए उनके साथ मिलकर काम करने के लिए उत्सुक हूं।
ट्रंप करने लगे पीएम मोदी की जमकर तारीफ
रूसी तेल और टैरिफ के अलावा, ट्रंप ने यह भी कहा कि भारत अमेरिका और संभवतः वेनेजुएला से अधिक ऊर्जा खरीदने पर सहमत हो गया है, और अमेरिकी वस्तुओं पर अपने टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाओं को शून्य कर देगा। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा कि मोदी से बात करना सम्मान की बात है। मोदी को अपना सबसे अच्छा दोस्त और शक्तिशाली और सम्मानित नेता बताते हुए उन्होंने कहा कि दोनों नेता काम को अंजाम देने वाले व्यक्ति हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, प्रधानमंत्री मोदी के प्रति मित्रता और सम्मान के कारण, और उनके अनुरोध पर, तुरंत प्रभाव से हमने संयुक्त राज्य अमेरिका और भारत के बीच एक व्यापार समझौते पर सहमति व्यक्त की है, जिसके तहत संयुक्त राज्य अमेरिका पारस्परिक टैरिफ को 25% से घटाकर 18% कर देगा। वे भी संयुक्त राज्य अमेरिका के खिलाफ अपने टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाओं को शून्य करने की दिशा में आगे बढ़ेंगे।