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अंतरिक्ष से धरती पर कब लौटेंगी सुनीता विलियम्स? NASA ने अंतरिक्ष में फंसे यात्रियों पर दिया अपडेट

When will Sunita Williams Returns: भारतीय मूल की सुनीता विलियम्स और अन्य अंतरिक्ष यात्री जो अंतरिक्ष में पिछले छह महीने से फंसे हुए हैं, वो पृथ्वी पर कब लौटेंगे? इसे लेकर नासा ने ताजा अपडेट दिया है। नासा के अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष में फंसे छह महीने हुए, अभी दो महीने और बाकी है।

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बुच विल्मोर और सुनीता विलियम्स।

Photo : AP

NASA Astronauts Updates: अंतरिक्ष यात्री बुच विल्मोर और भारतीय मूल की सुनीता विलियम्स को बृहस्पतिवार को अंतरिक्ष में फंसे हुए छह महीने हो गए। उन्हें अभी दो और महीने वहां गुजारने पड़ेंगे। ये दोनों पांच जून को कक्षा में पहुंचे थे। दोनों को एक सप्ताह अंतरिक्ष में रहकर वापस लौट आना था। लेकिन स्टारलाइनर अंतरिक्ष यान में खराबी आने के कारण सुनीता विलियम्स और उनके साथी बुच विल्मोर दोनों अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर ही फंसे हुए हैं।

फरवरी तक पूरा होगा मिशन

अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी ‘नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन’ (नासा) ने अंतरिक्ष यान को वापसी की उड़ान के लिए बहुत जोखिम भरा माना, इसलिए उनके लंबे और कठिन मिशन के समाप्त होने में फरवरी तक का समय लगेगा। नासा के प्रबंधक हालांकि दोनों अंतरिक्ष यात्रियों को फंसा हुआ कहने से कतराते हैं।

दोनों अंतरिक्ष यात्री पहले भी वहां रह चुके थे, इसलिए वे जल्दी ही चालक दल के पूर्ण सदस्य बन गए तथा विज्ञान प्रयोगों में मदद करने लगे। ये दोनों टूटे हुए शौचालय की मरम्मत, वायु-द्वारों की सफाई और पौधों को पानी देने जैसे काम करने लगे। विलियम्स ने सितंबर में स्टेशन कमांडर का प्रभार संभाला था।

अंतरिक्ष में फंसी भारतीय मूल की सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर की वापसी के लिए नासा ने सितंबर के महीने में अपना अभियान शुरू कर दिया है। दोनों अंतरिक्ष यात्रियों की वापसी के लिए स्पेसएक्स क्रू-9 मिशन को लॉन्च किया गया है। यह लॉन्चिंग फ्लोरिडा के केप केनवरल से की गई है, जिसमें ड्रैगल कैप्सूल को फाल्कन-9 रॉकेट से लॉन्च किया गया है।

क्या है नासा का क्रू-9 मिशन?

सुनीता विलियम्स की वापसी क्रू-9 मिशन के जरिए होगी। दरअसल, अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन (ISS) पर हमेशा ही अंतरिक्ष यात्रियों की एक टीम तैनात रहती है। धरती से 420 किमी की ऊंचाई पर लगातार अंतरिक्ष यात्री वैज्ञानिक प्रयोग करते रहते हैं। फिलहाल सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर भी आईएसएस में हैं और यह जून माह में 8 दिन के मिशन पर गए थे, लेकिन अंतरिक्ष यान में खराबी की वजह से वहां पर फंस गए। ऐसे में अब दोनों ही अंतरिक्ष यात्रियों को एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स के ड्रैगन कैप्सूल से वापस लाया जाएगा।

इन दो लोगों को सौंपी जिम्मेदारी

स्पेसएक्स के इस मिशन के तहत नासा के निक हेग और रूस के अलेक्जेंडर गोरबुनोव को बुच विल्मोर और सुनीता विलियम्स को वापस लाने का काम सौंपा गया है। चूंकि नासा अंतरिक्ष स्टेशन के कर्मचारियों को लगभग हर छह महीने में बदलता है, इस नई उड़ान में विलमोर और विलियम्स के लिए दो खाली सीटें हैं और यह फरवरी के अंत में वापस आएगी। जबकि, इसी मिशन में पहले जाने वाली दो महिला अंतरिक्ष यात्री एस्ट्रोनॉट जेना कार्डमैन और स्टेफनी विल्सन को रोका गया है। अब वह अगले मिशन में इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन की यात्रा करेंगी।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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