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गर्लफ्रेंड का बर्गर खा लिया तो दोस्त को मार दी गोली, एक के पापा जज तो दूसरे के SSP

Pakistan News: मृतक अली कीरियो सत्र न्यायाधीश का बेटा है, जबकि आरोपी दानियाल वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) नजीर अहमद मीरबहार का बेटा है। पुलिस ने दानियाल को हिरासत में ले लिया है। अधिकारियों ने बताया कि गर्लफ्रेंड का बर्गर खाने से दानियार अली से नाराज हो गया था और उसने उस पर गोली चला दी।

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गर्लफ्रेंड का बर्गर खा लिया तो दोस्त को मार दी गोली

Photo : iStock

Pakistan News: क्या एक बर्गर किसी की हत्या की वजह बन सकता है? जवाब होगा नहीं। लेकिन पाकिस्तान में ऐसा हुआ है, यहां बर्गर की एक बाइट लेने पर एक युवक ने अपने ही दोस्त की गोली मारकर हत्या कर दी। यह घटना 8 फरवरी को हुई थी, हालांकि पुलिस ने बीते बुधवार को इस मामले में अपनी जांच पूरी कर ली है। पाकिसतनी एआरवाई न्यूज ने बताया कि यह घटना तब हुई जब युवक के दोस्त ने उसकी गर्लफ्रें का बर्गर खा लिया था।

जानकारी के मुताबिक, मृतक अली कीरियो सत्र न्यायाधीश का बेटा है, जबकि आरोपी दानियाल वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) नजीर अहमद मीरबहार का बेटा है। पुलिस का कहना है कि आरेापी दानियल नजीर को फिलहाल हिरासत में ले लिया गया है, उसके खिलाफ अदालत में मुकदमा चलाए जाने की तैयारी है।

क्या है पूरा मामला?

जानकारी के मुताबिक, सत्र न्यायाधीश के बेटे अली कीरियो 8 फरवरी को अपने दोस्त दानियाल के घर पहुंचा था। पूछताछ में पता चला किया दानियाल ने उस दिन अपनी गर्लफ्रेंड शजिया को भी अपने घर बुलाया था। दानियाल ने अपने और शाजिया के लिए दो बर्गर ऑर्डर किया था। हालांकि, दानियाल के दोस्त अली ने उसकी गर्लफ्रेंड के बर्गर में से एक बाइट खा ली, जिसके बाद दोनों में झगड़ा शुरू हो गया।

गार्ड की राइफल से मारी गोली

धीरे-धीरे मामला इतना बढ़ गया कि दोनों के बीच हाथापाई की नौबत आ गई। इसी दौरान दानियाल खुद पर काबू नहीं पा सका और वहीं पर मौजूद एक गार्ड की राइफल से अली पर हमला कर दिया और गोली दाग दी। इस हमले में अली बुरी तरह घायल हो गया, जिसके बाद उसे अस्पताल ले जाया गया। हालांकि, डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस का कहना है कि इस घटना में वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के बेटे दानियाल को जिम्मेदार ठहराया गया है।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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