Trump Noble Prize Claim: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को नोबेल पुरस्कार मिलने का सपना टूटता नजर आ रहा है। वह बार-बार इसका जिक्र कर अपनी हताशा और बेचैन जाहिर कर रहे हैं। ट्रंप ने एक बार फिर ऐसा ही बयान दिया है जिससे उनकी हताशा साफ नजर आ रही है। इस बार उन्होंने इस मामले को अमेरिकी की अस्मिता से जुड़ दिया है। ट्रंप का कहना है कि अगर उन्हें नोबेल पुरस्कार नहीं मिला तो यह अमेरिका का अपमान होगा। साथ ही ट्रंप ने फिर से कई युद्ध रुकवाने का भी दावा किया।
ट्रंप ने नोबेल शांति पुरस्कार का जताया दर्द
ट्रंप ने कहा कि सात से ज़्यादा वैश्विक संघर्षों को समाप्त करने के बावजूद अगर उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार नहीं दिया जाता है, तो यह अमेरिका के लिए बहुत बड़ा अपमान होगा। गाजा संघर्ष को समाप्त करने की अपनी योजना का जिक्र करते हुए ट्रंप ने मंगलवार को क्वांटिको में सैन्य नेताओं को दिए अपने भाषण में कहा- मुझे लगता है कि हमने इसे सुलझा लिया है। देखते हैं। हमास को सहमत होना होगा, और अगर वे सहमत नहीं होते हैं, तो उनके लिए बहुत मुश्किल होगा। लेकिन सभी अरब राष्ट्र, मुस्लिम राष्ट्र, सहमत हो गए हैं। इजराइल सहमत हो गया है। यह एक अद्भुत बात है। यह सब बस एक साथ आ गया।
आठ संघर्षों को सुलझाने का लिया श्रेय
ट्रंप ने कहा कि अगर सोमवार को घोषित गाजा संघर्ष को समाप्त करने की उनकी योजना कामयाब हो जाती है, तो वे इतने ही महीनों में आठ संघर्षों को सुलझा लेंगे। यह बहुत अच्छा है। किसी ने ऐसा कभी नहीं किया। क्या आपको नोबेल पुरस्कार मिलेगा?' बिल्कुल नहीं। वे इसे किसी ऐसे व्यक्ति को देंगे जिसने कुछ भी नहीं किया। वे इसे उस व्यक्ति को देंगे जिसने डोनाल्ड ट्रंप के दिमाग और युद्ध को सुलझाने के लिए क्या किया, इस पर एक किताब लिखी है... नोबेल पुरस्कार एक लेखक को मिलेगा, हां, लेकिन देखते हैं क्या होता है।
यह हमारे देश का बहुत बड़ा अपमान होगा
ट्रंप ने कहा, लेकिन यह हमारे देश का बहुत बड़ा अपमान होगा। मैं आपको बता दूं। मैं ऐसा नहीं चाहता। मैं चाहता हूं कि देश को यह मिले। उसे मिलना ही चाहिए क्योंकि ऐसा पहले कभी नहीं हुआ। जरा सोचिए। तो अगर यह (गाजा संघर्ष को समाप्त करने की योजना) होती है, तो मुझे लगता है कि ऐसा होगा। मैं यह बात हल्के में नहीं कह रहा, क्योंकि मैं किसी से भी ज़्यादा समझौतों के बारे में जानता हूं। मेरा पूरा जीवन इसी पर टिका है। लेकिन आठ समझौते करना वाकई एक सम्मान की बात है।
