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Israel-Lebanon War: लेबनान का मिसाइल हमला, इजरायल में पांच लोगों की मौत; इजरायली हमले में लेबनान में मारे गए आठ लोग

Missile Attack in Israel from Lebanon: इजरायल और लेबनान के बीच घमासान लगातार जारी है। दोनों ओर से हमले हो रहे हैं, लोगों की मौत का आंकड़ा बढ़ता ही जा रहा है। इसी बीच इजरायली हमले में लेबनान में आठ लोग मारे गए है। इससे पहले इजरायल के अधिकारी ने बताया था कि लेबनान से किये गए मिसाइल हमले में पांच लोगों की मौत हो गई।

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इजरायली हमले में लेबनान में आठ लोग मारे गए

Photo : AP

Israel vs Lebanon: इजरायली हवाई हमले में बृहस्पतिवार को लेबनान में कम से कम आठ लोगों की मौत हो गई। हमलों के बीच, इजरायली सेना ने दक्षिणी लेबनान के ज्यादातर इलाके लोगों को खाली करने को कहा है। इस बीच, फलस्तीनी अधिकारियों ने कहा कि कब्जे वाले वेस्ट बैंक में हुए इजरायली हमले में तीन लोगों की मौत हो गई।

इजरायलियों पर हमले की साजिश रच रहा आतंकवादी ढेर

फलस्तीनी स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि इजरायली हमले में दो फलस्तीनी मारे गए और तीसरा इजरायली गोलीबारी में मारा गया। इजरायली सेना ने कहा कि उसने बल नूर शम्स शरणार्थी शिविर क्षेत्र में हमला किया, जहां हाल के महीनों में उसने बार-बार कार्रवाई की है। सेना ने कहा कि उसने हमास के एक आतंकवादी को मार गिराया जो इजरायलियों पर हमले की साजिश रच रहा था।

'लेबनान से किये गए मिसाइल हमले में पांच लोगों की मौत'

उत्तरी इजरायल के एक शहर की स्थानीय परिषद ने कहा है कि लेबनान से किये गए मिसाइल हमले में चार विदेशी श्रमिकों सहित पांच लोगों की मौत हो गई। मेतुला क्षेत्रीय परिषद ने बृहस्पतिवार को हुए हमले की जानकारी दी।

लेबनान का चरमपंथी समूह हिज्बुल्ला एक साल से अधिक समय से उत्तरी इजरायल में रॉकेट, मिसाइल और ड्रोन दाग रहा है। वहीं, इजरायल भी जवाबी हमले कर रहा है। बता दें, इजरायल और लेबनान के बीच हमलों का सिलसिला लगातार जारी है। दोनों देशों एक दूसरे के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। इसी बीच लोगों की मौत का आंकड़ा बढ़ता ही जा रहा है।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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