Pakistan Foreign Office Statement US Iran: पश्चिम एशिया (West Asia) में अमेरिका और ईरान के बीच जारी विनाशकारी मिसाइल हमलों और पूर्ण युद्ध के खतरों के बीच पड़ोसी देश पाकिस्तान ने चिंता जाहिर की है। बृहस्पतिवार को पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान दोनों पक्षों से तुरंत अपनी दुश्मनी खत्म करने, हिंसा का रास्ता छोड़ने और कूटनीतिक बातचीत को फिर से शुरू करने की पुरजोर अपील की है।
पाकिस्तान को डर है कि दोनों देशों के बीच शुरू हुए हमलों के नए और आक्रामक दौर से हाल ही में हुआ अंतरिम शांति समझौता पूरी तरह से पटरी से उतर जाएगा, जिससे पूरे क्षेत्र में कभी न खत्म होने वाली अस्थिरता और तबाही फैल सकती है।
संकट में 'इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन'
इस्लामाबाद में आयोजित एक साप्ताहिक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने माना कि अमेरिका और ईरान के बीच का अंतरिम शांति समझौता इस समय बेहद गंभीर चुनौतियों से गुजर रहा है।
प्रवक्ता ने कूटनीतिक कड़ियों का हवाला देते हुए बताया था, 'पिछले महीने दोनों पक्षों के बीच ऐतिहासिक 'इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन' (Islamabad MoU) पर हस्ताक्षर हुए थे। इसके बाद दोनों देशों के बीच तकनीकी स्तर की बातचीत शुरू हुई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य 60 दिनों के भीतर क्षेत्र में स्थायी शांति के लिए एक मजबूत समझौता तैयार करना था।'
वहीं, पिछले हफ्ते जब अमेरिका ने ईरान पर हवाई हमले तेज किए और जवाब में ईरान ने अमेरिकी ठिकानों पर पलटवार किया, तो शांति स्थापना की यह पूरी तकनीकी प्रक्रिया बीच में ही रुक गई।
पाकिस्तान की सभी पक्षों से 'संयम' बरतने की अपील
ताहिर अंद्राबी ने पिछले एक सप्ताह से खाड़ी क्षेत्र में बढ़े भारी तनाव और सैन्य लामबंदी पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने पाकिस्तान सरकार का रुख स्पष्ट करते हुए कहा, 'पाकिस्तान इस संघर्ष से जुड़े सभी पक्षों से एक बार फिर यह पुरजोर अपील करता है कि वे ज्यादा से ज्यादा संयम बरतें। दोनों पक्षों को ऐसी किसी भी सैन्य कार्रवाई या आक्रामकता से बचना चाहिए जिससे मध्य पूर्व की बची-खुची शांति और स्थिरता को और ज्यादा नुकसान पहुंचे। पाकिस्तान दोनों महाशक्तियों को हिंसा का रास्ता छोड़ने और रोकी गई तकनीकी स्तर की वार्ता को तुरंत मेज पर आकर शुरू करने के लिए प्रोत्साहित करता रहेगा।'
