Delhi Prison Extortion Racket: दिल्ली की तिहाड़ और रोहिणी जेलों के भीतर चल रहे एक बेहद चौंकाने वाले और संगठित रंगदारी व रिश्वतखोरी रैकेट का पर्दाफाश हुआ है। दिल्ली सरकार (ACB Delhi GNCTD) की एंटी-करप्शन ब्रांच (ACB) ने जेल प्रशासन को शर्मसार करने वाले इस सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है। इस सिंडिकेट में जेल के बड़े अधिकारी, वार्डर, वकील और आम लोग शामिल थे, जो जेल में बंद कैदियों के परिवारों को डरा-धमकाकर उनसे लाखों रुपये वसूल रहे थे। इस पूरे मामले की शुरुआत 9 फरवरी 2026 को मिली एक शिकायत से हुई।
एक पीड़ित ने एसीबी को बताया कि रोहिणी जेल में बंद उसके पिता और भाई की सुरक्षा और उन्हें जेल के अंदर बुनियादी सुविधाएं व 'आराम' दिलाने के बदले उनसे मोटी रकम की मांग की जा रही है। शिकायत पर तुरंत कार्रवाई करते हुए एसीबी ने जाल बिछाया और रंगे हाथों आरोपियों को दबोचकर एफआईआर (FIR No. 04/2026) दर्ज की। पहली कार्रवाई में पुलिस ने जेल वार्डर दिनेश डबास, पंकज कुमार, रवि कुमार, हेड वार्डर जोगेंद्र, वकील मनीष और एक आम नागरिक आशीष राणा को गिरफ्तार कर उनके पास से 1 लाख रुपये की घूस बरामद की।
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जांच में खुलीं साजिश की और परतें
शुरुआती गिरफ्तारियों के बाद जब एसीबी ने आरोपियों के बैंक खातों, मोबाइल डेटा और डिजिटल सबूतों की गहराई से जांच की, तो एक बहुत बड़ी साजिश सामने आई। जांच में पता चला कि कैदियों के परिवारों से वसूला गया पैसा अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर किया जाता था और बाद में उसे कैश (नकद) निकालकर आपस में बांट लिया जाता था।
इन वित्तीय सबूतों के आधार पर एसीबी ने कार्रवाई का दायरा बढ़ाते हुए पांच और आरोपियों को गिरफ्तार किया। इनमें रोहिणी जेल के असिस्टेंट सुपरिंटेंडेंट सुनील कुमार, हेड वार्डर योगेश, वार्डर जगबीर, बागपत के वकील हरेंद्र बंसल और दिल्ली के रहने वाले विप्लव खारी शामिल हैं।
अब तक 11 आरोपी शिकंजे में
इस बड़े रैकेट में अब तक कुल 11 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें जेल का एक सहायक अधीक्षक (असिस्टेंट सुपरिंटेंडेंट), छह जेल वार्डर, दो वकील और दो आम लोग शामिल हैं। एसीबी के अधिकारियों का कहना है कि यह एक बेहद संगठित नेटवर्क था जो जेल के भीतर 'प्रोटेक्शन मनी' और विशेष सुविधाओं के नाम पर वसूली कर रहा था। फिलहाल इस सिंडिकेट के अन्य सदस्यों की पहचान करने और पैसे के पूरे लेनदेन (मनी ट्रेल) का पता लगाने के लिए जांच जारी है।
