Jammu Kahsmir: पहलगाम आतंकी हमले के बाद जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ रणनीति को और मजबूत करते हुए केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) ने अपनी तैनाती का बड़ा विस्तार किया है। सूत्रों के मुताबिक, सुरक्षा बल ने घाटी में टेम्परेरी ऑपरेटिंग बेस (TOBs) की संख्या 45 से बढ़ाकर 55 कर दी है। नए ऑपरेटिंग बेस 8,000 से 10,000 फीट की ऊंचाई वाले दुर्गम पहाड़ी इलाकों में स्थापित किए गए हैं। इनका उद्देश्य विदेशी आतंकवादियों को पहाड़ों में सुरक्षित ठिकाने बनाने से रोकना, घुसपैठ वाले संवेदनशील मार्गों पर लगातार निगरानी रखना और चौबीसों घंटे आतंकवाद विरोधी अभियान चलाना है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इन फॉरवर्ड बेस के जरिए ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सुरक्षा बलों की स्थायी मौजूदगी बनी रहेगी और आतंकियों के लिए ऑपरेशन चलाना कठिन हो जाएगा।
पहलगाम हमले के बाद बदली गई रणनीति
सूत्रों के मुताबिक, यह कदम पहलगाम आतंकी हमले के बाद तैयार की गई नई सुरक्षा रणनीति का हिस्सा है। इसका मकसद जम्मू-कश्मीर के ऊंचाई वाले इलाकों में आतंकियों की गतिविधियों और उनके सुरक्षित ठिकानों पर पूरी तरह रोक लगाना है।
अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा में 232 कंपनियां तैनात
श्री अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा के लिए सीआरपीएफ ने घाटी में 232 कंपनियों की तैनाती की है। इसके अलावा केंद्र सरकार ने सभी केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs) के महानिदेशकों (DGs) को रोटेशन के आधार पर जम्मू-कश्मीर में मौजूद रहने के निर्देश दिए हैं, ताकि यात्रा की सुरक्षा व्यवस्था की लगातार निगरानी की जा सके।
2.75 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने किए दर्शन
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 13 जुलाई 2026 तक 2,75,618 श्रद्धालु बाबा बर्फानी के पवित्र गुफा मंदिर में दर्शन कर चुके हैं। सूत्रों का कहना है कि इस वर्ष अमरनाथ यात्रा में श्रद्धालुओं की संख्या पिछले वर्षों की तुलना में कम रही है। पहलगाम और बालटाल, दोनों मार्गों पर प्रतिदिन पंजीकरण 20 हजार से नीचे बना हुआ है। हालिया आतंकी हमले के बाद से यात्रा के लिए हेलीकॉप्टर सेवा भी अभी तक बहाल नहीं की गई है।
पंजीकरण प्रक्रिया में होगा बदलाव
केंद्र सरकार यात्रा की सुरक्षा और प्रबंधन को और प्रभावी बनाने के लिए पंजीकरण प्रक्रिया में बदलाव की तैयारी कर रही है। प्रस्तावित योजना के तहत अगले चरण से ऑन-द-स्पॉट (तत्काल) रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था समाप्त कर फिक्स्ड रजिस्ट्रेशन सिस्टम लागू किया जाएगा, जिससे श्रद्धालुओं की आवाजाही को बेहतर ढंग से नियंत्रित किया जा सके।
