Iran Turns Back Pak Ship At Hormuz: ईरान युद्ध में ईरान-अमेरिका के बीच मध्यस्थता की कोशिश कर रहे पाकिस्तान को बड़ा झटका लगा है। ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में पाकिस्तान जा रहे एक जहाज को कानूनी प्रोटोकॉल का पालन न करने और इस जलमार्ग से गुजरने की अनुमति न होने के कारण वापस भेज दिया। सेलेन (CELEN) नामक यह जहाज कराची जा रहा था, तभी ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कोर (IRGC) नौसेना ने इसे होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने से रोक दिया।
शांति वार्ता में पाकिस्तान बन रहा मध्यस्थ
यह घटनाक्रम तब सामने आया है जब ईरान ने कथित तौर पर अमेरिका के साथ शांति वार्ता में पाकिस्तान को मध्यस्थ बनने की सहमति दी है। तेहरान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन को बताया है कि दुश्मन देशों से संबंध नहीं रखने वाले जहाज ईरानी अधिकारियों के साथ समन्वय कर होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर सकते हैं।
ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल युद्ध के कारण जलडमरूमध्य से होकर दुनिया के लगभग एक-पांचवें तेल और द्रवीकृत प्राकृतिक गैस का परिवहन लगभग ठप हो गया है, जिससे तेल आपूर्ति बाधित हो रही है। ईरान के विदेश मंत्रालय का यह पत्र रविवार को 15 सदस्यीय सुरक्षा परिषद और संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस को भेजा गया था। इसके बाद मंगलवार को इसे लंदन स्थित संयुक्त राष्ट्र की उस जहाजरानी एजेंसी के 176 सदस्यों के बीच वितरित किया गया, जो अंतरराष्ट्रीय जहाजरानी की सुरक्षा और संरक्षा को रेगुलेट करने और प्रदूषण को रोकने के लिए जिम्मेदार है।
पाकिस्तानी जहाज को क्यों रोका गया?
नौसेना के कमांडर अलीरेजा तंगसिरी ने X पर एक पोस्ट में कहा- कंटेनर जहाज SELEN को IRGC नौसेना ने कानूनी प्रोटोकॉल का पालन न करने और होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति न होने के कारण वापस भेज दिया। उन्होंने आगे कहा, इस जलमार्ग से किसी भी जहाज के गुजरने के लिए ईरान के समुद्री प्राधिकरण के साथ पूर्ण समन्वय जरूरी है, और यह उपलब्धि ईरान के सम्मानित लोगों के समर्थन के बिना संभव नहीं होती।
क्या पाकिस्तान शांति वार्ता आयोजित करेगा?
तेहरान द्वारा इस्लामाबाद की मध्यस्थता के लिए सहमति देने के बाद पाकिस्तान ईरान और अमेरिका के बीच शांति वार्ता की मेजबानी करेगा। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा पांच दिनों के लिए आंशिक युद्धविराम की घोषणा के बाद वाशिंगटन ईरान पर वार्ता के लिए दबाव बढ़ा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वार्ता शुरू होने से पहले ईरान अपना लिखित एजेंडा और मांगें पाकिस्तान को भेजेगा, जिसके बाद इन दस्तावेजों को अमेरिकी अधिकारियों के साथ विचार के लिए साझा किया जाएगा।
ईरान और अमेरिका के बीच वार्ता शुरू में अप्रत्यक्ष वार्ता हो सकती है, जिसमें दोनों देशों के प्रतिनिधि एक-दूसरे से सीधे बातचीत नहीं करेंगे। सूत्रों ने समाचार एजेंसी को बताया है कि इस चरण में बातचीत पारस्परिक आदान-प्रदान प्रारूप में होने की संभावना है। उन्होंने यह भी संकेत दिया है कि ईरान मध्यस्थ द्वारा रखी गई कई वैध मांगों पर सहमत हो गया है। उन्होंने कहा, ईरान ने मध्यस्थता के लिए सहमति दे दी है। तेहरान की लिखित मांगों के बाद संदर्भ की शर्तें और एजेंडा अंतिम रूप दिया जाएगा। पाकिस्तान ईरान की मांगों का इंतजार कर रहा है।
