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ईरान की महिलाओं की असली ताकत नहीं जानतें होंगे आप, इस मामले में भारत की लड़कियों से भी आगे

Iran Women Literacy Power: ईरान में महिलाओं की साक्षरता (Women's Literacy Levels in Iran) के स्तर में पिछले पांच दशकों में जबरदस्त बदलाव आए हैं।

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ईरान की महिलाओं की असली ताकत नहीं जानतें होंगे आप, इस मामले में भारत की लड़कियों से भी आगे

Iran women literacy rate vs Indian Ladies: आपने कई बार सुना होगा कि पहले ईरान ऐसा नहीं था, पहले का मतलब 1976 में क्रांति से पहले का ईरान। तब बताया जाता था कि देश इस्लाम को लेकर कट्टर नहीं था और खुलापन था। लेकिन यहां एक बात जो आपको हैरान करेगी वो ये कि बेशक 1976 से पहले का ईरान खुले विचारों का बताया जाता रहा हो, लेकिन ये वो ही दौर था, जब महिलाएं वहां उतनी पढ़ी-लिखी नहीं होती थी, जितनी कि उस दौर के बाद होने लगीं। ऐसा हम क्यों कह रहे हैं और इसके क्या मायने हैं, वो आपको नीचे धीरे धीरे पता चलेगा।

ईरान में महिलाओं की साक्षरता (Women's Literacy Levels in Iran) के स्तर में पिछले पांच दशकों में जबरदस्त बदलाव आए हैं। ईरान में महिलाओं की साक्षरता के स्तर में आए इन बदलावों पर, समय के साथ देश में हुए सामाजिक, राजनीतिक और शैक्षिक विकास का असर पड़ा है। ईरान में महिलाओं की साक्षरता के स्तर (Iran Higher Female Literacy Rate) में पिछले लगभग पांच दशकों में, क्रांति से पहले के समय से लेकर आज तक, जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। ईरान में महिलाओं की साक्षरता के स्तर के सफर का आकलन करने के लिए इस्तेमाल किया गया डेटा, वयस्क महिलाओं (15+ वर्ष), युवाओं (15 से 24 वर्ष) से जुड़ी जानकारी पर आधारित है। इसके अलावा, इसमें विश्व बैंक और UNESCO Institute for Statistics (UIS) जैसी अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं से मिले प्रासंगिक डेटा और जनगणना जैसे ईरानी स्रोतों से प्राप्त डेटा को भी शामिल किया गया है।

वयस्क महिलाओं की साक्षरता दर बेहद कम थी (1976–1990 का दशक)

विश्व बैंक (UIS) द्वारा UNESCO Institute for Statistics से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, 1976 में क्रांति से पहले ईरान में वयस्क महिलाओं (Adult Female literacy rate in Iran) की साक्षरता दर 35.5% थी, जबकि वयस्क पुरुषों की साक्षरता दर 61.8% थी। UNESCO के आंकड़ों के अनुसार, क्रांति से पहले ईरान में वयस्क साक्षरता दर 37% थी और उस समय समाज में बिना पढ़े-लिखे वयस्कों में महिलाओं का प्रतिशत काफी अधिक था।

UNESCO UIS और विश्व बैंक के स्रोतों से प्राप्त युवा साक्षरता आंकड़ों के अनुसार, 15 से 24 वर्ष की आयु वर्ग की युवा महिलाओं की साक्षरता दर 42% थी। साक्षरता और कंप्यूटर कौशल को बढ़ावा देने के लिए ईरान के एक प्रोजेक्ट को UNESCO साक्षरता पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

क्रांति के बाद सरकार ने साक्षरता के विशाल कार्यक्रम शुरू किए, जिनमें 1979 में स्थापित 'साक्षरता आंदोलन संगठन' भी शामिल था। इस साक्षरता अभियान का लक्ष्य ग्रामीण क्षेत्र और वे वयस्क लोग थे, जिन्हें अपनी युवावस्था में औपचारिक शिक्षा प्राप्त करने का अवसर नहीं मिला था। इसके बाद धीरे-धीरे वयस्क महिलाओं की साक्षरता दर के अलावा युवाओं की साक्षरता दर में भी जबरदस्त प्रगति देखने को मिली।

1990 के दशक में साक्षरता दरों में सुधार का सिलसिला जारी रहा। मिडिल ईस्ट इंस्टीट्यूट द्वारा ईरानी राष्ट्रीय जनगणना के आंकड़ों के आधार पर किए गए विश्लेषण के अनुसार, 1991 में वयस्क महिलाओं की साक्षरता दर 56.2% थी, और 1996 में यह बढ़कर 74.2% हो गई। UNESCO UIS के आंकड़ों के अनुसार, 15 से 24 वर्ष की आयु वर्ग की युवा महिलाओं की साक्षरता दर 1991 में बढ़कर 81.2% और 1996 में 90.6% हो गई।

2000 के दशक से अब तक: लगातार बढ़त

2000 के दशक की शुरुआत में भी यही बढ़ता रुझान जारी रहा। विश्व बैंक और UNESCO की डेटा सीरीज से मिले आंकड़ों के मुताबिक, 2002 तक वयस्क महिलाओं की साक्षरता दर बढ़कर 70.4% हो गई। UNESCO UIS के कुल आंकड़ों के आधार पर, यह दर 2005 तक और बढ़कर 76.8% हो गई, और फिर 2006 तक 77.2% तक पहुंच गई।

इस दौरान युवाओं की साक्षरता दर भी लगभग सार्वभौमिक स्तर तक पहुंच गई; UNESCO के आंकड़ों के अनुसार, 2005 तक यह दर 96.7% थी, और फिर 2006 तक 96.1% हो गई।

युवाओं की साक्षरता दर लगातार बढ़ती रही

युवाओं की साक्षरता दर बढ़ती रही

जनगणना के आंकड़ों के अनुसार, छह वर्ष और उससे अधिक उम्र की ईरानी महिलाओं में साक्षरता दर 2006 तक बढ़कर 80.3% हो गई थी। यह आंकड़ा मिडिल ईस्ट इंस्टीट्यूट द्वारा राष्ट्रीय जनगणना डेटा के विश्लेषण से प्राप्त जानकारी पर आधारित है।

साक्षरता दरों पर हाल के आंकड़े लगातार सुधार का संकेत देते हैं, हालांकि यह सुधार पिछली अवधियों की तुलना में धीमी गति से हो रहा है। विश्व बैंक और UNESCO UIS डेटा सीरीज द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के आधार पर, 2016 तक वयस्क महिलाओं की साक्षरता दर बढ़कर 80.8% हो गई। विश्व बैंक के जेंडर डेटा पोर्टल द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, जिसमें UNESCO इंस्टीट्यूट फॉर स्टैटिस्टिक्स के डेटा का उपयोग किया गया था। इसके मुताबिक, यह दर 2022 तक बढ़कर 84.9% और फिर 2023 तक 85.1% हो गई।

UNESCO UIS के युवा साक्षरता संबंधी आंकड़ों के आधार पर, युवाओं की साक्षरता दर लगभग सार्वभौमिक स्तर तक पहुंच गई है; यह 2016 में 97.9%, 2022 में 98.9% और 2023 में लगभग 99% रही।

ये आंकड़े ईरान को मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका क्षेत्र के औसत से ऊपर रखते हैं। क्षेत्रीय तुलनाओं पर आधारित विश्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, इन क्षेत्रों में वयस्क महिलाओं की साक्षरता दर लगभग 67% है।

2026 में कहां पहुंच जाएंगी ईरान की महिलाएं?

फिलहाल किसी भी बड़ी अंतरराष्ट्रीय संस्था ने ईरान की विशेष रूप से 2026 तक के लिए साक्षरता को लेकर कोई रिपोर्ट प्रकाशित नहीं की है। हालांकि, हाल के डेटा पर आधारित रुझान विश्लेषण से धीरे-धीरे सुधार का संकेत मिलता है।

विश्व बैंक और UNESCO के टाइम-सीरीज डेटा के अनुसार, 2016 और 2023 के बीच, वयस्क महिलाओं की साक्षरता दर में हर साल लगभग 0.6 प्रतिशत अंकों की वृद्धि हुई है। यदि यह पैटर्न जारी रहता है, तो वयस्क महिलाओं के बीच साक्षरता दर लगभग इस स्तर तक पहुंच सकता है- 2026 में 86.9%

युवाओं की साक्षरता दर पहले से ही लगभग यूनिवर्सल स्तर, यानी 99% पर है। भविष्य में साक्षरता दर के पूर्वानुमान में कुछ हद तक अनिश्चितता बनी हुई है, क्योंकि विश्व बैंक के वैश्विक शिक्षा रुझान विश्लेषण के अनुसार, देश को दुनिया भर में चल रहे आर्थिक, जनसांख्यिकीय और क्षेत्रीय संकटों के कारण कुछ झटकों का सामना करना पड़ सकता है। सबसे बड़ी बात अभी ईरान अमेरिका और इजरायल के साथ युद्ध लड़ रहा है, जिससे शिक्षा से जुड़ी चीजें भी प्रभावित हो रही हैं।

भारत से कैसे आगे ईरान की महिलाएं?

ईरान में महिलाओं की साक्षरता दर भारत की तुलना में काफी ज्यादा है। जैसे कि बताया गया ईरान में 15 से 24 साल की युवा महिलाओं में साक्षरता दर लगभग 98-99% तक पहुंच गई है। भारत की महिला साक्षरता दर लगभग 65–77% है, जो एक भारी जेंडर अंतर को दर्शाती है। ईरानी महिलाएं विश्वविद्यालय के छात्रों में लगभग 60% हिस्सेदारी रखती हैं, जो भारत की तुलना में काफी अधिक अनुपात है। भारत में भारी असमानता है; जहां केरल जैसे राज्यों में महिला साक्षरता दर 92% से भी अधिक है, वहीं अन्य राज्यों में यह काफी कम है, और राष्ट्रीय औसत 65.46% है।

Nitin Arora
नितिन अरोड़ा author

नितिन अरोड़ा टाइम्स नाउ नवभारत में न्यूज डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया में उनका 6 वर्षों का अनुभव है। वह राजनीति, देश–विदे... और देखें

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