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'होर्मुज की स्थिति बेहद जटिल...', अराघची बोले- पश्चिम एशिया में शांति के लिए भारत निभा सकता है 'बड़ी भूमिका'

Abbas Araghchi: दिल्ली में BRICS सम्मेलन के दौरान ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भारत की कूटनीतिक भूमिका की तारीफ की। उन्होंने चाबहार पोर्ट को भारत-ईरान सहयोग का बड़ा प्रतीक बताया और कहा कि भारत पश्चिम एशिया में शांति स्थापित करने में अहम भूमिका निभा सकता है।

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भारत दौरे पर ईरान के विदेश मंत्री का बड़ा बयान

Photo : ANI

Abbas Araghchi: ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची (Iran Foreign Minister Abbas Araghchi) इन दिनों दिल्ली में आयोजित BRICS सम्मेलन (BRICS Summit Delhi) में हिस्सा लेने भारत आए हुए हैं। इस दौरान उन्होंने भारत-ईरान संबंधों, चाबहार पोर्ट और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव जैसे कई अहम मुद्दों पर खुलकर बात की। उन्होंने भारत की कूटनीतिक भूमिका की तारीफ करते हुए कहा कि भारत इस क्षेत्र में शांति और सुरक्षा बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभा सकता है।

चाबहार पोर्ट भारत के लिए ‘गोल्डन गेट’-अराघची

चाबहार पोर्ट को लेकर अराघची ने कहा कि यह भारत और ईरान की दोस्ती और सहयोग का बड़ा प्रतीक है। उन्होंने कहा कि इस बंदरगाह के विकास में भारत ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। हालांकि अमेरिकी प्रतिबंधों की वजह से इसका काम कुछ धीमा हुआ है, लेकिन उन्हें भरोसा है कि भविष्य में यह पोर्ट भारत के लिए मध्य एशिया, कॉकस क्षेत्र और यूरोप तक पहुंचने का अहम रास्ता बनेगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि भारत चाबहार पोर्ट के विकास का काम आगे भी जारी रखेगा।

भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि काफी अच्छी-ईरानी विदेश मंत्री

ईरानी विदेश मंत्री ने कहा कि भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि काफी अच्छी है और वह खाड़ी क्षेत्र के सभी देशों का दोस्त माना जाता है। ऐसे में भारत शांति और कूटनीति को मजबूत करने में अहम योगदान दे सकता है। उन्होंने कहा कि ईरान भारत की सकारात्मक और रचनात्मक भूमिका की सराहना करता है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और अमेरिका के साथ संबंधों पर बोलते हुए अराघची ने कहा कि मौजूदा बातचीत भरोसे की कमी से जूझ रही है। उनका कहना था कि अमेरिका की तरफ से हर दिन अलग-अलग संदेश आते हैं, जिससे अविश्वास और बढ़ता है।

उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ ताकतें जानबूझकर कूटनीतिक प्रयासों को कमजोर करना चाहती हैं और क्षेत्र में युद्ध का माहौल बनाना चाहती हैं।अराघची ने कहा कि ईरान ने लंबे समय तक कठिन हालात का सामना किया है और अमेरिका अपने कई लक्ष्य हासिल नहीं कर सका। उन्होंने साफ कहा कि अगर कोई समाधान निकलता है तो वह केवल बातचीत और दोनों पक्षों के हितों को ध्यान में रखकर ही संभव होगा।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस बयान पर कि अमेरिका और चीन ईरान को परमाणु हथियार रखने देना नहीं चाहते और होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला रखना चाहते हैं, ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा, "हम भी यही राय रखते हैं। ईरान ने कभी परमाणु हथियार नहीं चाहे। हमने 2015 में समझौते पर हस्ताक्षर करते समय यह साबित कर दिया था कि हम परमाणु हथियार नहीं चाहते और यह हमारी नीति नहीं है। हमारा परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण है और हम हमेशा से यह विश्वास दिलाने के लिए तत्पर रहे हैं कि यह कार्यक्रम शांतिपूर्ण है और शांतिपूर्ण ही रहेगा।"

अराघची ने आगे कहा: "होर्मुज जलडमरूमध्य के संबंध में भी हमारी यही इच्छा है कि इसे पूरी तरह से फिर से खोल दिया जाए। जहां तक हमारा सवाल है, होर्मुज जलडमरूमध्य खुला है और हमारे साथ युद्ध कर रहे देशों के जहाजों को छोड़कर सभी जहाज वहां से गुजर सकते हैं... अमेरिकी आक्रामकता के कारण क्षेत्र में असुरक्षा का माहौल है... यह जलडमरूमध्य ईरान और ओमान के क्षेत्रीय जल में स्थित है... सब कुछ ईरान और ओमान द्वारा प्रबंधित किया जाना चाहिए। हम अभी इस बारे में आपस में परामर्श कर रहे हैं ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि व्यवस्थाएं सुचारू रूप से हों और होर्मुज जलडमरूमध्य में सुचारू प्रशासन हो।" भविष्य में होर्मुज, जो सभी जहाजों के सुरक्षित मार्ग की गारंटी देता है।"

monu jha
मोनू झा author

मोनू कुमार टाइम्स नाउ नवभारत की डिजिटल टीम में वायरल और ट्रेंडिंग डेस्क पर काम कर रहे हैं। न्यूजरूम में 4 साल से अधिक का अनुभव रखने वाले मोनू वायरल कं... और देखें

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