ईरान ने समृद्ध यूरेनियम स्टॉक को छोड़ने पर सहमति जताई है। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में यह दावा किया गया है। अखबार के मुताबिक, ईरान एनरिच्ड यूरेनियम देने पर राजी हो गया है।
रिपोर्ट में दो अमेरिकी आधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि अमेरिका और इरान के बीच प्रस्तावित करार का एक महत्वपूर्ण प्वाइंट यह है कि ईरान अपना अत्यंत समृद्ध यूरेनियम का स्टॉक छोड़ने पर सहमत हुआ है। हालांकि, इस रिपोर्ट पर व्हाइट हाउस के अधिकारियों से प्रतिक्रिया देने के लिए कहा गया लेकिन वे इसके लिए तैयार नहीं हुए।
अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, प्रस्ताव में यह तय नहीं किया गया है कि ईरान अपने उच्च स्तर पर समृद्ध यूरेनियम के भंडार को किस तरह छोड़ेगा। इस मुद्दे को अगली दौर की परमाणु वार्ताओं के लिए टाल दिया गया है। फिर भी अमेरिका के लिए यह बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है कि ईरान कम-से-कम सिद्धांत रूप में अपने यूरेनियम भंडार को छोड़ने पर सहमत हो। यह अमेरिका का लंबे समय से प्रमुख लक्ष्य रहा है। खासकर इसलिए भी क्योंकि इस व्यापक समझौते को अमेरिकी संसद में रिपब्लिकन नेताओं की ओर से संदेह की नजर से देखा जा सकता है।
दूसरे चरण की बातचीत में इसे शामिल करना चाहता था ईरान
अब तक ईरान की ओर से ट्रंप द्वारा घोषित इस संभावित समझौते पर कोई सार्वजनिक बयान सामने नहीं आया है। रिपोर्ट के अनुसार, शुरुआती चरण में ईरान अपने यूरेनियम भंडार पर किसी भी सहमति को शामिल करने के खिलाफ था और चाहता था कि इसे दूसरे चरण की बातचीत तक टाल दिया जाए।
वार्ता की मेज पर कैसे झुका ईरान?
अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के मुताबिक, ईरान के पास फिलहाल 60 प्रतिशत तक समृद्ध लगभग 970 पाउंड यूरेनियम का खतरनाक भंडार है। ईरान इस शुरुआती चरण में इस परमाणु भंडार पर बात करने के मूड में बिल्कुल नहीं था और इसे दूसरे दौर की चर्चा के लिए टालना चाहता था, लेकिन अमेरिकी वार्ताकारों ने मध्यस्थों के जरिए साफ कर दिया कि यदि शुरुआती समझौते में यूरेनियम भंडार पर प्रतिबद्धता नहीं मिली, तो अमेरिका तुरंत बातचीत की मेज से उठ जाएगा और अपनी सैन्य कार्रवाई दोबारा शुरू कर देगा। इसी सख्त रुख के आगे तेहरान को झुकना पड़ा।
इस्फाहान न्यूक्लियर टेक्नॉलजी सेंटर में मौजूद है स्टॉक!
इसी बीच अमेरिकी सैन्य योजनाकारों ने राष्ट्रपति ट्रंप को ईरान के परमाणु भंडार पर हमला करने के विकल्प भी तैयार करके दिए हैं। माना जा रहा है कि ईरान का अधिकांश समृद्ध यूरेनियम इस्फाहान न्यूक्लियर टेक्नॉलजी सेंटर में मौजूद है। इस साइट पर पिछले जून में अमेरिकी टॉमहॉक मिसाइलों से हमला किया गया था, जिससे वहां मौजूद समृद्ध यूरेनियम फिलहाल मलबे के नीचे दब गया है।
इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रविवार को दावा किया कि अमेरिका और ईरान, खाड़ी क्षेत्र में तनाव कम करने के उद्देश्य से एक व्यापक समझौते के करीब पहुंच रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित समझौते के हिस्से के रूप में होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोला जाएगा। ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में, ट्रम्प ने कहा कि समझौते पर "काफी हद तक बातचीत" हो चुकी है और औपचारिक घोषणा से पहले केवल अंतिम विवरण ही बाकी हैं।
यूरेनियम भंडार का अब क्या होगा?
प्रस्तावित समझौते में अभी यह तय नहीं हुआ है कि ईरान इस भंडार को किस तरह सौंपेगा। इसके लिए आने वाले हफ्तों या महीनों में विशेष परमाणु वार्ता शुरू होगी। इस भंडार को ठिकाने लगाने के दो रास्ते हो सकते हैं। मुमकिन है कि 2015 में ओबामा प्रशासन के समय हुए परमाणु समझौते की तरह ईरान इस बार भी अपना पूरा भंडार रूस के हवाले कर दे। इसके अलावा, ईरान इस यूरेनियम के संवर्धन स्तर को इतना घटा दे कि इससे परमाणु हथियार बनाना असंभव हो जाए।
