एशिया, दुनिया की 33 में से 19 मेगासिटीज का घर है और शीर्ष 10 में से 9 एशिया में हैं। जकार्ता, ढाका और टोक्यो के अलावा, शीर्ष 10 में शामिल अन्य एशियाई शहर हैं-नई दिल्ली, भारत (3.02 करोड़); शंघाई, चीन (2.96 करोड़); ग्वांगझू, चीन (2.76 करोड़); मनीला, फिलीपींस (2.47 करोड़); कोलकाता, भारत (2.25 करोड़); और सियोल, दक्षिण कोरिया (2.25 करोड़)। (तस्वीर-Istock)
UN के अनुसार, 3.2 करोड़ आबादी वाला मिस्र का काहिरा शीर्ष 10 में एकमात्र शहर है जो एशिया के बाहर स्थित है। ब्राजील का साओ पाउलो, 1.89 करोड़ लोगों के साथ, अमेरिका महाद्वीप का सबसे बड़ा शहर है। वहीं नाइजीरिया का लागोस भी तेजी से बढ़ा है, जिससे वह उप-सहारा अफ्रीका का सबसे बड़ा शहर बन गया है। (तस्वीर-Istock)
ढाका की जनसंख्या में तेज वृद्धि की एक वजह यह भी है कि गांव के इलाकों से लोग मौके की तलाश में या बाढ़ और बढ़ते समुद्र लेवल जैसी समस्याओं की वजह से अपने शहर छोड़कर राजधानी आ रहे हैं, जो जलवायु परिवर्तन की वजह से और भी खराब हो गई है। (तस्वीर-Istock)
नई दिल्ली, भारत (3.02 करोड़); शंघाई, चीन (2.96 करोड़); ग्वांगझू, चीन (2.76 करोड़); मनीला, फिलीपींस (2.47 करोड़); कोलकाता, भारत (2.25 करोड़); और सियोल, दक्षिण कोरिया (2.25 करोड़)।
फिर भी, जबकि शहर के अधिकारियों और पार्लियामेंट्री बिल्डिंग्स को एक नया घर मिलेगा। UN का अनुमान है कि 2050 तक जकार्ता में 10 मिलियन और लोग रह रहे होंगे। इस बीच, UN की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान की राजधानी तेहरान, जहां पानी खत्म होने वाला है, वहां पानी की कमी हो रही है, अभी उसकी आबादी 90 लाख है।
जकार्ता भी बढ़ते समुद्र लेवल की वजह से समस्याओं का सामना कर रहा है। अनुमान है कि 2050 तक शहर का एक चौथाई हिस्सा पानी में डूब सकता है। समस्या इतनी गंभीर है कि इंडोनेशिया की सरकार बोर्नियो आइलैंड के ईस्ट कालीमंतन प्रांत के नुसंतारा में एक नई खास राजधानी बना रही है। (तस्वीर-Istock)
संयुक्त राष्ट्र के आर्थिक और सामाजिक मामलों के विभाग की वर्ल्ड अर्बनाइजेशन प्रॉस्पेक्ट्स 2025 रिपोर्ट में यह भी पाया गया कि मेगासिटीज यानी 1 करोड़ से अधिक आबादी वाले शहरी क्षेत्र की संख्या बढ़कर 33 हो गई है, जो 1975 में विश्वभर में मौजूद 8 मेगासिटीज की तुलना में चार गुना अधिक है।
जापान की राजधानी की आबादी 33.4 मिलियन थी और हाल के वर्षों में इसमें तेजी से कमी आई। इसके बाद वह बांग्लादेश से एक पायदान नीचे चला गया। ढाका के बारे में अनुमान जताया जा रहा है कि साल 2050 तक वह दुनिया का सबसे ज्यादा आबादी वाला शहर बन जाएगा।