Zakir Naik in Pakistan: भारत में मोस्ट वांडेट जाकिर नाइक पाकिस्तान पहुंच गया है। जाकिर यहां 28 अक्टूबर तक रहेगा और धार्मिक तकरीरों में हिस्सा लेगा। जाकिर इस्लामाबाद, कराची और लाहौर में सार्वजनिक भाषण देने के सात ही शुक्रवार की प्रार्थना सभाओं का नेतृत्व और संबोधन भी करेगा। पाक के धार्मिक मंत्रालय के प्रवक्ता के हवाले से द एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने यह रिपोर्ट दी है। इस्लामाबाद पहुंचने पर धार्मिक मामलों के मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने उसका स्वागत किया।
जाकिर नाइक के कई कार्यक्रम
जाकिर नाइक अपने दौरे में कराची और लाहौर सहित कई प्रमुख शहरों में रुकेगा और 20 अक्टूबर को इस्लामाबाद में एक व्याख्यान के साथ दौरा समाप्त होगा। भारतीय मूल के उपदेशक नाइक ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट के माध्यम से अपने दौरे की घोषणा की, जहां उसने सार्वजनिक भाषणों का विवरण साझा किया। नाइक के कार्यक्रम 5 अक्टूबर से शुरू होंगे। शुरुआत कराची से होगी और उसके बाद लाहौर और इस्लामाबाद में दौरा खत्म होगा।
जाकिर ने बताया, क्यों कम कर दी सभाएं
जाकिर नाइक ने एक्स पर एक वीडियो साझा किया और बताया कि उसने अपने सार्वजनिक व्याख्यानों की संख्या क्यों कम कर दी है। नाइक ने कहा, अगर आप सार्वजनिक वार्ता में लोगों की संख्या गिनें, तो उपस्थिति हर साल बढ़ी है। पहले, अगर मैं किसी शहर में जाता था और पांच दिन बिताता था और शायद 15 सभाए करता था, या दो सप्ताह बिताता था और 20 वार्ता करता था। अब मैं किसी देश में जाता हूं और केवल दो दिन बात करता हूं तो उन दो वार्ताओं में भाग लेने वाले लोगों की संख्या दस वाप्काओं से अधिक होती है।
नाइक ने आगे बताया कि कैसे मीडिया और सोशल मीडिया ने उसकी पहुंच का विस्तार किया है। नाइक ने लिखा- हम इसे मीडिया पर भी रिकॉर्ड करते हैं, और जब यह सोशल मीडिया पर जाता है, तो सोशल मीडिया के लोग बड़ी संख्या में सोशल मीडिया और सैटेलाइट चैनल पर देखते हैं। इसलिए जब हमने 2006 में सैटेलाइट चैनल शुरू किया, तो हमारा मुख्य ध्यान यह देखना था कि सैटेलाइट चैनलों पर कार्यक्रम अच्छे हों। इसलिए मेरी वार्ताएं तो कम हो गईं, लेकिन पहुंच ज़्यादा हो गई।
मुंबई में होने वाले शांति सम्मेलन को किया याद
नाइक ने भारत में, विशेषकर मुंबई में आयोजित होने वाले शांति सम्मेलन को याद करने की बात कही। नाइक ने कहा, मैं शांति सम्मेलन को सबसे ज्यादा याद करता हूं, क्योंकि मैंने भारत छोड़ दिया है, खासकर बॉम्बे। अपने परिवार के अलावा जिस चीज को मैं सबसे ज्यादा याद करता हूं, वह हैं मेरे माता-पिता, भाई-बहन हैं। दावा (Dawah) के संबंध में जो चीज मैं सबसे अधिक याद करता हूं वह है शांति सम्मेलन। इसमें 30 से अधिक वक्ता दुनिया के विभिन्न हिस्सों से आ रहे हैं, मैं इससे चूक गया।
