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सिडनी का सबसे बड़ा रेपिस्ट, कोरियन महिलाओं को बेहोश कर करता था 'गंदा काम'

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Apr 25, 2023, 01:20 PM IST

Sydney Serial Rapist Balesh Dhankhar: सिडनी की एक अदालत ने बालेश को 39 मामलों में दोषी ठहराया है। इस साल के अंत तक उसकी सजा का ऐलान किया जाएगा। उसे कोरियन महिलाओं के साथ रेप मामले में दोषी पाया गया है।

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बालेश धनखड़

Photo : Twitter

Sydney Serial Rapist Balesh Dhankhar: भारतीय मूल के बालेश धनखड़ को पांच कोरियाई महिलाओं के साथ रेप मामले में दोषी करार दिया है। ऑस्ट्रेलिया के सिडनी की एक अदालत ने उसके खिलाफ दर्ज 39 मामलों में उसे दोषी ठहराया है। साथ ही उसे सिडनी के अब तक के इतिहास का सबसे बड़ा रेपिस्ट करार दिया गया है।

जानकारी के मुताबिक, 43 साल का बालेश धनखड़ सिडनी में एक डेटा एक्सपर्ट के तौर पर काम करना है। रिपोर्ट के अनुसार, उसने पांच कोरियाई महिलाओं को नौकरी का झांसी देकर अपने अपार्टमेंट में बुलाया और उनके साथ रेप किया। चौंकाने वाली बात यह है कि बालेश ने यह सब महिलाओं के साथ बेहोशी की हालत में किया। रिपोर्ट में कहा गया है कि बालेश ने पहले महिलाओं को नशा कराया, बाद में जब वे महिलाएं बेहोशी की हालत में आ गईं, तो उनके साथ रेप किया गया।

रेप के रिकॉर्ड किए वीडियो

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, बालेश ने अपनी अलार्म घड़ी और फोन में छिपे कैमरे की मदद से महिलाओं के वीडियो भी बनाए। जब पुलिस ने अक्टूबर 2018 में धनखड़ के सीबीडी अपार्टमेंट पर छापा मारा, तो उन्हें महिलाओं के साथ यौन संबंध बनाने के दर्जनों वीडियो मिले। इसमें एक वीडियो 95 मिनट का था। जानकारी के मुताबिक, धनखड़ कोरियाई महिलाओं के प्रति आकर्षित था। ऐसे में उसने 2017 में एक वेबसाइट के जरिए फर्जी नौकरी का विज्ञापन जारी किया। उसने ऐसी कोरियाई महिलाओं की जानकारी जुटाई, जो काम की तलाश में थीं और सिडनी में अकेली रह रही थीं। रिपोर्ट में कहा गया है कि धनखड़ ने एक होटल में महिलाओं को इंटरव्यू लिया और उन्हें जबरन शराब पिलाई।

बहाने से ले जाता था अपार्टमेंट

रिपोर्ट में कहा गया है कि होटल के बाद धनखड़ बहाने से महिलाओं को अपने अपार्टमेंट में ले जाता और उनके साथ रेप करता। जिस समय यह सब हुआ धनखड़ की पत्नी और परिवार उस समय ऑस्ट्रेलिया में नहीं रहता था।

अकेलापन दूर करने के लिए रची साजिशधनखड़ ने कोर्ट में स्वीकार किया कि उसने महिलाओं से झूठ बोला, क्योंकि उसकी शादी ठीक नहीं चल रही थी और वह अकेला महसूस कर रहा था। वहीं धनखड़ के वकील ने बताया, संबंध बनाने के लिए महिलाओं ने बालेश को सहमति दी थी। बता दें, धनखड़ मई में फिर से अदालत का सामना करेगा, जिसके बाद इस साल के अंत तक उन्हें सजा सुनाई जाएगी।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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