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'मिनी इंडिया' से चीन को जवाब, मॉरीशस में तैयार हुआ भारत का सैन्य बेस, हिंद महासागर में बढ़ी नेवी की धाक

  • Written by: आलोक कुमार राव
  • Updated Mar 2, 2024, 09:37 AM IST

India Military base in Mauritius: पीएम मोदी और मॉरीशस के प्रधानमंत्री प्रविंद जगुनाथ दोनों नेताओं ने द्वीप पर बने तीन किलोमीटर लंबे रनवे, सेंट जेम्स जेट्टी सहित छह प्रोजेक्ट का उद्घाटन किया। समझा जाता है कि इस सैन्य बेस के जरिए भारत हिंद महासागर में चीन की गतिविधियों खासकर उसकी पनडुब्बियों पर करीबी नजर रख सकेगा।

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मॉरीशस में भारतीय सैन्य बेस का उद्घाटन।

Photo : PTI

India Military base in Mauritius: हिंद महासागर में चीन की बढ़ते असर और उसके फुटप्रिंट्स को कमजोर करने के लिए भारत इस क्षेत्र में लगातार अपनी उपस्थिति मजबूत कर रहा है। इसी क्रम में 'मिनी इंडिया' के नाम से मशहूर द्विपीय देश मॉरीशस में भारतीय सैन्य बेस बनकर तैयार हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को मॉरीशस के अपने समकक्ष प्रविंद जगन्नाथ के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अगालेगा द्वीप में सैन्य बेस का उद्घाटन किया।

चीन की पनडुब्बियों की होगी निगरानी

रिपोर्टों के मुताबिक दोनों नेताओं ने द्वीप पर बने तीन किलोमीटर लंबे रनवे, सेंट जेम्स जेट्टी सहित छह प्रोजेक्ट का उद्घाटन किया। समझा जाता है कि इस सैन्य बेस के जरिए भारत हिंद महासागर में चीन की गतिविधियों खासकर उसकी पनडुब्बियों पर करीबी नजर रख सकेगा। यह देखने में आया है कि चीन पिछले कुछ वर्षों से हिंद महासागर में गुपचुप तरीकों से अपनी पनडुब्बियों को भेजता रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि दरअसल समुद्री डाटा जुटाने और रिसर्च के नाम पर वह अपनी पनडुब्बियों के जरिए भारत की जासूसी करता है।

हिंद महासागर में भारत को घेरना चाहता है चीन

हिंद महासागर में भारत को घेरने के लिए वह श्रीलंका के हंबनटोटा और पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह पर मोटी रकम लगा चुका है। श्रीलंका का हंबनटोटा बंदरगाह को उसके 99 साल के लीज पर है। अभी कुछ दिनों पहले उसकी एक पनडुब्बी मालदीव के पास नजर आई। उसकी कोशिश समुद्र में भारत को चारो तरफ से घेरने की है। उसकी इस नीयत को भारत भी समझता है और उसे जवाब देने की पूरी तैयारी कर रहा है।

12 किलोमीटर लंबा है अगालेगा द्वीप

मॉरीशस के उत्तरी अगालेगा द्वीप पर भारत का यह सैन्य बेस बना है। यह द्वीप 12 किलोमीटर लंबा और करीब डेढ़ किलोमीटर चौड़ा है। इस द्वीप पर करीब 300 लोग रहते हैं। द्वीप पर रनवे तैयार करने के लिए भारत ने मॉरीशस सरकार को वित्तीय मदद दी। यहां विमानों को रखने के लिए 180 फीट लंबा और 200 फीट चौड़ा एक हैंगर भी बनाया गया है। बताया जाता है कि भारतीय नौसेना यहां अपने निगरानी विमान पी-8 आई को तैनात कर सकती है। यही नहीं इस सैन्य बेस को संचालित रखने के लिए नेवी अपने करीब 50 सैन्य कर्मियों को रखेगी।

भारत-मॉरीशस स्वाभाविक साझेदार

परियोजनाओं का उद्घाटन करने के बाद मोदी ने कहा कि भारत और मॉरीशस समुद्री क्षेत्र में इनसे निपटने के लिए ‘स्वाभाविक साझेदार’ हैं। उन्होंने कहा, ‘हिंद महासागर क्षेत्र में कई पारंपरिक और गैर पारंपरिक चुनौतियां उभर रही हैं। ये सभी चुनौतियां हमारी अर्थव्यवस्था को प्रभावित करती हैं। चुनौतियों से निपटने के लिए भारत और मॉरीशस समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में स्वाभाविक साझेदार हैं।’

आलोक कुमार राव
आलोक कुमार रावauthor

19 वर्षों से मीडिया जगत में सक्रिय आलोक राव ने प्रिंट, न्यूज एजेंसी, टीवी और डिजिटल चारों ही माध्यमों में काम किया है। इस लंबे अनुभव ने उन्हें समाचारों की समझ, प्रेजेंटेशन, डिटेलिंग और न्यूजरूम डायनेमिक्स में असाधारण दक्षता प्रदान की है। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों में विशेष रुचि रखने के साथ-साथ जियो-पॉलिटिक्स एवं डिफेंस की स्टोरीज में इनकी खासी दिलचस्पी है। आलोक ने अलग-अलग माध्यमों में काम करते हुए समाचारों की समझ, प्रस्तुति और विश्लेषण में मजबूत दक्षता विकसित की है और अब तक 25,000 से अधिक आर्टिकल तैयार कर चुके हैं। तथ्यों की गहन जांच, मजबूत न्यूज सेंस और तेज निर्णय क्षमता उनकी पत्रकारिता की प्रमुख खासियतें हैं।

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