अमेरिका और रूस के बीच तनावपूर्ण माहौल में इस हफ्ते एक अहम मोड़ आने वाला है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को एक सख्त संदेश देते हुए कहा कि यदि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने आगामी अलास्का शिखर वार्ता में युद्ध रोकने पर सहमति नहीं दी, तो उन्हें इसके “बहुत गंभीर परिणाम” भुगतने होंगे। यह बयान ऐसे समय आया है जब रूस-यूक्रेन युद्ध ने एक बार फिर से उग्र रूप ले लिया है, और वैश्विक मंच पर युद्धविराम को लेकर कूटनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं।
यूरोपीय नेताओं के साथ हुई ऑनलाइन बैठक
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने पुष्टि की कि ट्रंप ने बुधवार को यूरोपीय देशों के नेताओं के साथ हुई ऑनलाइन बैठक में अपनी स्थिति साफ कर दी है। मैक्रों ने कहा, “ट्रंप ने बहुत स्पष्ट रूप से कहा है कि अमेरिका इस वार्ता में संघर्षविराम समझौता चाहता है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि रूस इसमें बाधा डालता है तो अमेरिका और उसके सहयोगी देश चुप नहीं बैठेंगे।”
जेलेंस्की की चिंता: पुतिन कर रहे हैं ‘गुमराह’
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने भी बैठक में अपनी चिंता साझा की। उन्होंने कहा कि पुतिन अमेरिका-रूस बैठक से पहले जानबूझकर भ्रम फैला रहे हैं और यूक्रेनी सीमा के सभी मोर्चों पर दबाव बनाकर यह दिखाना चाहते हैं कि रूस युद्ध जीतने की स्थिति में है। जेलेंस्की के अनुसार, यह एक “छलावा” है ताकि शिखर वार्ता से पहले रूस की सैन्य ताकत को अधिक प्रभावशाली दिखाया जा सके। उन्होंने यह भी कहा, “पुतिन प्रतिबंधों के प्रभाव को नजरअंदाज कर रहे हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए आर्थिक प्रतिबंध रूस की अर्थव्यवस्था पर भारी असर डाल रहे हैं। इससे रूस की युद्धक्षमता कमजोर हो रही है, और यही प्रतिबंध हमारी रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।”
क्या अलास्का में बनेगा कोई समाधान?
यह वार्ता ऐसे समय हो रही है जब अंतरराष्ट्रीय समुदाय युद्ध की बढ़ती लागत और मानवीय संकट को लेकर गहरी चिंता में है। अमेरिका और यूरोपीय देश इस बात पर जोर दे रहे हैं कि अब रूस को पीछे हटने और एक स्थायी युद्धविराम पर सहमत होने की ज़रूरत है।
